Wednesday, October 27, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsShamliदेवोत्थान एकादशी पर शादी-ब्याह से मंगल कार्य प्रारंभ

देवोत्थान एकादशी पर शादी-ब्याह से मंगल कार्य प्रारंभ

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  • प्रात: से देर रात तक जाम में सिसकती रहा शामली शहर
  • बैडबाजों, डीजे पर पाबंदी से बराती और घराती निराश

जनवाणी ब्यूरो |

शामली: देवोत्थान एकादशी पर अबूझ मुहूर्त पर उन शादी-ब्याह की धूम रही जिनकी शुभ लगन की तिथियां नहीं निकली थी। अबूझ मुहूर्त पर जनपद में बड़ी संख्या में वाग्दान संस्कार के साथ-साथ शादी-ब्याह संपन्न हुए। जिसके चलते शहर के बैंकट हॉल, बारातघर शादियों के चलते गुलजार रहे।

दूसरी ओर, कोविड-19 की गाइड लाइन लागू होने के चलते वर और पक्ष के लोग परेशा नजर आए। शादी में 100 लोगों समयसीमा ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। साथ ही, आसमान में पूरे दिन छाए बादलों और दोपहर बाद कहीं-कहीं बूंदाबांदी ने शादी-ब्याह वाले घरों में चिंता की लकीरें खींच दी।

देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार माह के लिए शयन के लिए चले जाते। इसके साथ ही सूर्य दक्षिणायन हो जाता है। देवोत्थान एकादशी को भगवान विष्णु जागते है। इसी दिन से शादी-ब्याह के मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक शादियों का मुर्हूत 11 दिसम्बर तक ही है, जिसमें बड़ी संख्या में शादिया होंगी।

इनमें प्रमुख रूप से 27 व 30 नवम्बर, एक, छह, सात, नौ, 10 तथा 11 दिसम्बर के मुर्हूत है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति है लेकिन इस बार मकर संक्राति पर विवाह का शुभ मुर्हुत नहीं है। देवोत्थान पर सहलग की शुभ लगन तिथियों में शादियों के लिए महीनों पहले ही घोड़ा बग्गी, बैंडबाजे, आतिशबाजी, बैंकटहॉल, फ्लावर डेकोरेशन, हलवाई आदि की बुकिंग कर ली गई है लेकिन तीन दिन पहले कोविड-19 के चलत अचानक शादी-ब्याह में जहां बैंडबाजे, डीजे पर प्रतिबंध लगा दिया गया, वहीं शादी-ब्याह में सिर्फ 100 लोग ही शामिल होने की संख्या निर्धारित कर दी।

इससे बुधवार को अबूझ मुहूर्त में शादियां तो काफी हुई लेकिन बैंडबाजे और डीजे के न बजने के कारण रौनक नजर नहीं आई। बाराती-घराती की संख्या निर्धारित होने के कारण भी शादियों में सिर्फ कार और छोटे वाहन ही जाते नजर आए। बस और अन्य बड़े वाहनों से लोगों ने परहेज किया।

तुलसी-शालिग्राम का विवाह

देवोत्थानी एकादशी पर बुधवार को शुभ मुहूर्त पर भर में श्री तुलसी विवाह पर जहां शहनाइयां गूंजी, वहीं मंदिरों में तुलसी का शालिग्राम से विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया। घरों और मंदिरों में भगवान विष्णु को फल, मिष्ठान, सिंगाड़ा और गन्ने से पूजन-अर्चन कर भोग लगाया गया।

गाड़ी सजवाने को फूलों की दुकानों पर बाहर

शहर में लोहे का पुल स्थित फूल मार्केट में दुल्हन के लिए गाड़ी को फूलों से सजवाने की आपा-धापी रही। कोविड-19 के चलते लंबे समय बाद फूल मार्केट में ग्राहक नजर आए। फूल विक्रेता सोनू का कहना है कि बुधवार को अबूझ मुहूर्त के चलते भले ही शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य प्रारम्भ हो गए हों लेकिन अभी गाड़ियां सजवाने के लिए उतने ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं जितने पूर्व में आते रहे। इसका कारण कोरोना महामारी माना जा रहा है।

पाबंदी के चलते वापस लौटे बैंड

उप्र सरकार द्वारा कोरोना के मरीजों की संख्या फिर से बढ़ने के चलते तीन दिन पहले शादी-ब्याह में कोविड-19 गाइड लाइन का पालन करने के आदेश जारी किए थे। साथ ही, शादी-ब्याह में बैंडबाजे और डीजे पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन बैंडबाजे और डीजे पहले ही बुक कर लिए जाते हैं इसलिए कई स्थानों पर विवाह स्थल से बैंडबाजे वापस लौटते नजर आए।

आसमान में बादल और बूंदाबांदी से टेंशन

देवोत्थान एकादशी पर बुधवार को दिनभर सूर्यदेव बादलों के आसमान में छिपे रहे। दोपहर बाद देहात क्षेत्र के कई हिस्सों में बूंदाबांदी भी हुई। शहर में भी बूंदाबांदी चंद मिनट के लिए हुई। इससे शादी-ब्याह वाले घरों में मेजबानों के साथ-साथ मेहमानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी गई।

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