Tuesday, April 28, 2026
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रुपये की कीमत लगातार गिरने से बढ़ा खतरा महंगाई का

  • पेट्रोल, डीजल के अलावा खाद्यान्नों के दामों को नियंत्रित करना होगा मुश्किल
  • विदेश में पढ़ाई की सोच रहे छात्रों पर पड़ेगा बुरा असर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: डालर के मुकाबले रुपये की कीमत लगातार गिरने से देश में महंगाई शिखर पर पहुंचने के करीब आ रही है। जिस तरह से एक सप्ताह से डालर बढ़ रहा है और रुपये लगातार गिर रहा है। उसको देखते हुए विदेशी निवेशक भारत से जैसे उभरते बाजारों से भागने लगे हैं। अब देश को जब महंगी दरों पर विदेश से सामान लेना होगा तो निश्चित रूप से कीमतें तो आसमान छुऐंगी ही।

घरेलू मुद्रा डालर 77.48 के स्तर पर खुली और शनिवार को रुपये की तुलना में 77.48 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर फिसल गई। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से रुपये पर दृष्टिकोण धूमिल हो गया है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं। जैसे ही अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से भागने लगते हैं।

रुपया-मंदी में योगदान देने वाले प्रमुख वैश्विक कारकों में रूस-यूक्रेन भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी, केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी मानी जा रही है। गिरते रुपये का सबसे बड़ा असर यह है कि आयात अधिक महंगा हो जाता है और निर्यात सस्ता हो जाता है। इसकी वजह ये है कि आयात की समान मात्रा का भुगतान करने में अधिक रुपये लगते हैं और निर्यात की समान मात्रा का भुगतान करने के लिए खरीदार को कम डॉलर लगते हैं।

इससे उन सामानों की कीमतें बढ़ने लगेंगी जिनको विदेशों से आयात किया जा रहा है। रुपया गिरने से विदेशी निवेशक देश से बाहर जा रहे हैं और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बहुत गिरा है। डॉलर की मांग बढ़ गई है और रुपये की मांग कम हो गई है। इससे ये डर पैदा हो रहा है कि अब रूपया और गिरेगा।

ऐसी अटकलों और अनिश्चितता से स्थिति और बिगड़ रही है। आम आदमी के लिए बड़ी समस्या तेल को लेकर है। पेट्रोल की कीमत पहले ही डॉलर में बढ़ गई और क्योंकि भारतीय रुपयें की कीमत गिर गई तो भारत के लिए रुपये के मामले में पेट्रोल और मंहगा हो जाएगा। जिसका सीधा असर आवश्यक चीजों के परिवहन की लागत पर पड़ेगा और मंहगाई और बढ़ेगी।

आम आदमी पर इसी बात का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। रुपये में आयी गिरावट का एक सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो पढ़ाई के लिए विदेश जाने की योजना बना रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से भारतीय छात्रों के लिए विदेशों में शिक्षा ले पाना महंगा हो जायेगा।

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