
सुख-दुख के रूप में इंसानी जीवन अपने दो पड़ावों से होकर गुजरता है। अव्वल, जवानी जिसे इंसान हंसते-खेलते बिता लेता हैं, तो वहीं, दूसरा पड़ाव होता है ‘बुढ़ापा’? जो विभिन्न तरह की चुनौतियों से घिरा होता है। एक वरिष्ठ नागरिक एक नहीं, बल्कि अनगिनत कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करता है। पर, हां अगर उसके सामने सुविधाएं हों, अपनों का सहारा हो, तो तमाम परेशानियां भी उनके सामने घुटना टेक देती हैं। पर अफसोस सभी बुजुर्गों की किस्मत ऐसी नहीं होती। यही वजह है आज हिंदुस्तान में ‘बुजुर्ग आश्रमों’ की संख्या गली-मोहल्लों की परचून दुकानों की भांति खुले हैं।