Sunday, January 23, 2022
- Advertisement -
- Advertisement -
Homeसंवादकोरोना का प्रसार और चुनावी रैलियां

कोरोना का प्रसार और चुनावी रैलियां

- Advertisement -


देश में एक बार फिर कोरोना वायरस तेजी से अपना पैर पसार रहा है। दूसरी लहर के दौरान बंगाल विधानसभा चुनाव और यूपी में पंचायत चुनाव में जो कुछ हुआ उसका हश्र देश के सामने है और अब ओमिक्रॉन के बढ़ते मामले के बीच सवाल पांच राज्यों के चुनाव की सरगर्मी और रैलियों को लेकर उठने लगे हैं। क्या ये माहौल लाखों हजारों की भीड़ जुटाकर रैली करने की है और कैसे हो पाएंगे चुनाव… सवाल ये भी क्या देश तीसरी लहर को थामने के लिए तैयार है। कोरोना काल में कैसे हो चुनाव? इस बीच अच्छी खबर यह आई है कि भाजपा, कांग्रेस सहित कई दलों ने अपनी रैलियों को स्थगित कर दिया है। आगामी 9 जनवरी को प्रधानमंत्री की लखनऊ में रैली होने वाली थी, उसे भी स्थगित कर दिया गया है। लेकिन अभी तो चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं हुई है, ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में राजनैतिक दल क्या कदम उठाते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन-सैलाब में संक्रमण की 100 फीसदी संभावनाएं हैं। यदि जांच कराई जाए, तो आंकड़े सारी कहानी बयां कर देंगे। नेतागण लगातार कोरोना और खासकर ओमिक्रॉन की भयावहता को खारिज करते रहे हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार में नए साल का जश्न मनाने गए कई लोग संक्रमित हुए हैं। गोवा क्रूज पर 66 यात्री संक्रमित मिले हैं और गिनती अभी जारी है, क्योंकि वहां करीब 2000 लोग सवार थे। गोवा सरीखे छोटे से राज्य में संक्रमण-दर 27 फीसदी को पार कर चुकी है। यह भयावह हकीकत है। मणिपुर के इम्फाल में प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में ‘बिना मास्क की’ भीड़ जमा की गई। प्रधानमंत्री के चेहरे पर भी मास्क गायब था। वह ढोल बजाने में मस्त दिखाई दिए।

सितंबर 2020 से भारत में कोविड-19 संक्रमण के मामले धीरे-धीरे ही सही मगर कम होने लगे थे लेकिन फिर फरवरी 2021 से इनमें तेजी आनी शुरू हो गई। मार्च में संक्रमण इतनी तेजी से बढ़े कि पिछले साल के सारे रिकॉर्ड टूट गए। मार्च में एक तरफ संक्रमण के मामले रिकॉर्ड तेजी से बढ़ रहे थे और दूसरी तरफ भारत की राजनीतिक पार्टियां पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु में होने वाले चुनावों को लेकर बड़ी-बड़ी रैलियां कर रही थीं। चुनावी रैलियों का सिलसिला मार्च के शुरूआत से ही जारी था क्योंकि मार्च के आखिरी हफ्ते से लेकर पूरे अप्रैल महीने में वोटिंग तय थी। चुनावी रैलियों में बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी और लोगों के बीच फिजिकल डिस्टेंसिंग नाम की कोई चीज शायद बची नहीं। रैलियों में मास्क पहने लोग भी बहुत कम ही नजर आए। आम लोग तो दूर, रैलियां कर रहे नेता और उम्मीदवार भी कोविड से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन करते नजर नहीं आ रहे थे। भारतीय निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल में चुनावी रैलियों के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पालन न होने के लेकर चेतावनी जारी की। चेतावनी के बावजूद नेताओं को सुरक्षा मानकों का पालन न करते देख आखिरकार निर्वाचन आयोग ने 22 अप्रैल से चुनावी रैलियों पर रोक लगा दी। पश्चिम बंगाल में मार्च के दूसरे हफ्ते से लेकर अब तक कोरोना संक्रमण के रोजाना मामलों में तेजी से बढ़त दर्ज की गई। अन्य चुनावी राज्यों जैसे असम, केरल और तमिलनाडु में भी मार्च के आखिरी और अप्रैल के शुरूआती हफ्तों में संक्रमण के मामलों में ऐसी ही तेजी देखी गई।

बहरहाल उप्र, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर ऐसे राज्य हैं, जहां 2022 की शुरूआती तिमाही में ही चुनाव होने हैं। कोरोना विस्फोट सामने है, लेकिन राजनेता उसे ‘चुनावी हव्वा’ करार दे रहे हैं। राजधानी दिल्ली में चुनाव नहीं हैं, लेकिन मुख्यमंत्री केजरीवाल इन राज्यों में लगातार प्रचार करते रहे हैं। अब वह भी संक्रमित होकर पृथकवास में हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री और केंद्रीय कैबिनेट हैं। संसद और सर्वोच्च न्यायालय भी हैं। निर्वाचन आयोग भी है और देश के महामहिम राष्ट्रपति भी विराजमान हैं। उस राजधानी में ‘सप्ताहांत कर्फ्यू’ लगाना पड़ा है। एक ही दिन में 36 फीसदी मामले बढ़कर 5581 तक पहुंच चुके हैं। संक्रमण दर 9 फीसदी को छूने को है। यह 7 माह का सर्वोच्च स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाहर खुली हवा में होने वाले कार्यक्रमों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम ही रहता है। वारविक मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर लॉरेंस यंग कहते हैं, खुली हवा में कोरोना वायरस का असर जल्दी कम हो जाता है। हालांकि इसके बावजूद कई ऐसे कारण है चुनावी रैली जैसे कार्यक्रमों में संक्रमण की आशंका को बढ़ा सकते हैं। अगर लोग भीड़भाड़ वाली जगह में खुले में भी लंबे वक्त तक रहते हैं तो संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।

एम्स और सफदरजंग समेत अन्य अस्पतालों में 400 से ज्यादा डॉक्टर और नर्सें आदि संक्रमित पाए गए हैं। अस्पतालों में दहशत फैल गई है। सभी स्तरों के स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। यदि संक्रमण इतना ही फैलता रहा, तो कल्पना कीजिए कि अस्पतालों में मरीजों का इलाज कौन करेगा? देश भर में संक्रमण के आंकड़े बुधवार देर रात तक एक ही दिन में 90 हजार को पार कर गए थे। फिर भी देश के राजनेता रैलियां सजवा कर कोरोना के प्रति संवेदनहीन हैं! प्रधानमंत्री यह पहल कर सकते हैं कि वह सर्वदलीय बैठक बुलाएं और चुनावी रैलियां रद्द करने का निर्णय लें। चुनाव आयोग को भी इस मामले में पहल करते हुए सभी दलों के साथ मिल-बैठकर चुनाव प्रचार का तरीका निकालना चाहिए। भारत ने दुनिया के कई देशों की तुलना में अपने यहां कोविड19 के प्रसार को नियंत्रित किया है और अगर आने वाले वक्त में सरकार इसे काबू में रखने में कामयाब होती है तो यह वैश्विक स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।


What’s your Reaction?
+1
0
+1
3
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -
- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -

Recent Comments