- मीटर रीडर गांव जाकर नहीं लेता रीडिंग, आॅफिस में बिल के नाम पर लिए जाते हैं पैसे
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: विद्युत विभाग द्वारा लाख पारदर्शिता की बात की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही नजर आते हैं। कुछ इसी तरह का नजारा ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा हैं। शासन द्वारा भले ही ग्रामीण उपभोक्ताओं को बिजली की व्यवस्था उपलब्ध करा दी गई हो। मगर बिजली के बिल के लिए रीडर गांव में नहीं जाते, जब महीनों का इकट्ठा बकाया हो जाता है।
तत्पश्चात कनेक्शन काटने के लिए उपभोक्ताओं को मैसेज कर दिए जाते हैं। उसके पश्चात जैसे ही उपभोक्ता बिजली घर जाकर कर्मचारी से बात करते हैं तो उनसे बिल बनाने के नाम पर भी अलग से चार्ज लिया जाता है। इस तरह के कार्य सिर्फ एक दो जगह नहीं अनेकों गांव में देखने को मिल रहे हैं। प्रतिदिन किसी ना किसी विद्युत उपकेंद्र पर तारों की मरम्मत के संबंधित कार्य चलता रहता है।
जिस कारण शहर भर में लाइट की व्यवस्था चौपट रहती है। वहीं, दूसरी ओर रैपिड रेल भी आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। क्योंकि रेपिड रेल के काम के कारण विभिन्न क्षेत्रों में लाइन बदलने का कार्य किया जाता। जिससे घंटों तक बिजली व्यवस्था पूर्ण रूप से बाधित रहती है।
हालांकि रैपिड के तहत बदलने वाली लाइनों के बारे में विभाग द्वारा एक दिन पूर्व भी सूचना दे दी जाती है। वहीं, इस संबंध में अधीक्षण अभियंता विद्युत विभाग प्रथम एके सिंह का कहना है कि आज के समय में ऐसा संभव नहीं है। अगर फिर भी ऐसी शिकायतें है तो उनका निवारण किया जाएगा।
100 रुपये तक का लिया जाता है चार्ज
ग्रामीण वासियों की माने तो उनसे बिल मनाने के नाम पर 100 रुपये अलग से लिए जाते हैं। जबकि शासन द्वारा निर्धारित किया गया है कि जिन गांव में बिजली के मीटर लग गए हैं। वहां पर रीडर उपभोक्ताओं को बिल उपलब्ध कराएं। इतना हीं नहीं कुछ उपकेन्द्रों पर तो बिल के साथ पेमेंट जमा कराने की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई हैं।
शहरी क्षेत्रों से कटे गांव में होता है खेल
जो गांव शहरी कनेक्टिविटी से कटे हुए हैं। उन गांव में इस तरह की समस्या देखने को मिल रही है। जिसमें की मेरठ जोन की बात की जाए तो मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, शामली, अमरोहा आदि अन्य शहरों में काफी ऐसे गांव हैं। जोकि गांव शहर की कनेक्टिविटी से काफी पीछे हैं।
गांव पहुंचने के लिए भी कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इसी बात का फायदा संबंधित मीटर रीडर द्वारा उठाया जाता है। जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से बचते हैं और उपभोक्ताओं से बिल बनाने के भी पैसे लेते हैं।
मरम्मत के कारण इन क्षेत्रों में कई घंटों की बिजली कटौती
विद्युत विभाग द्वारा आजकल विद्युत संबंधित ट्रांसफार्मर व अन्य उपकरणों की मरम्मत की जा रही है। ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो, लेकिन वहीं दूसरी और घंटों तक उपकरण बदलने के कारण उपभोक्ताओं को बिजली की सुविधा नहीं मिल पाती।
तीव्र गति से बढ़ते गर्मी के प्रकोप में भी उपभोक्ताओं को गर्मी से दो चार होना पड़ता है। मंगलवार को भी साकेत, कमिश्नर चौराहा आदि अन्य क्षेत्रों में लाइन के तार बदलने का कार्य किया गया। जिस वजह से संबंधित क्षेत्र में घंटों तक बिजली व्यवस्था बाधित रही।

