Monday, April 19, 2021
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परीक्षा का तनाव

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‘पराजय मिली है किंतु पराजित नहीं हूं मैं…’

संयुक्त राज्य अमेरिका की सुप्रसिद्ध कवि माया एन्जोलो के इस कथन में दुनिया में अपने जीवन में असफलताओं से  परेशान शख्स के लिए प्रेरणा और पुर्नजीवन के अहम रहस्य छुपे हुए हैं, ‘आपको अपने जीवन में हजारों बार हार का सामना करना पड़ सकता है किन्तु आपको कभी खुद को हारा हुआ नहीं मानना हैक सच पूछिये तो जीवन में हारना जरूरी है क्योंकि तभी हम खुद को जान पाते हैं कि हम कौन हैं, तभी हम यह भी जान पाते हैं कि हम किन विषम परिस्थितियों में भी उठ खड़े हो सकते हैं और सबसे अधिक तभी हम खुद को फिर से जीने के लिए तैयार कर सकते हैं।’

परीक्षा के तनाव का मनोविज्ञान भी इस फलसफा से जरा भी इतर नहीं है,  क्योंकि इस सत्य से इनकार करना आसान नहीं होगा कि स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा का तनाव जीवन में असफलताओं से घबराकर खुद को हारा हुआ मानने की स्थिति के समान ही होता है। दुनिया भर में विद्याथी जीवन की यह एक स्वाभाविक और सबसे अधिक कॉमन घटना है।

दुनिया के तमाम मनोविश्लेषकों का मानना है कि एक सीमित मात्रा में एग्जामिनेशन स्ट्रेस स्टूडेंट्स के परफॉरमेंस के लिए अच्छा होता है क्योंकि यह एक उत्प्रेरक का कार्य करता है जो छात्रों को अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है’, किंतु जब यही तनाव अपनी सीमा से आगे बढ़ जाता है तो यह घातक हो जाता है और फिर यह सोचना अनिवार्य हो जाता है कि आखिर इसका समाधान क्या है?’ आखिर परीक्षा के तनाव का शमन और नियंत्रण कैसे किया जा सकता है।

खुद से ईमानदारी से प्रश्न पूछें 

जब आप परीक्षा के बारे में चिंतित होने लगते हैं तो सबसे पहले खुद से यह प्रश्न अवश्य पूछें कि आप चिंता किस लिए कर रहे हैं? आखिर आपको किस बात से डर लग रहा है? जब आप इन दोनों प्रश्नों का ईमानदारी से उत्तर दे देते हैं तो परीक्षा से संबंधित आधी चिंता उसी समय खत्म हो जाती है, क्योंकि अधिकांश परिस्थितियों में हमें खुद यह पता ही नहीं होता है कि आखिर हम डर किससे रहे हैं और हमें चिंता और तनाव किस बात की है।’

अपने माता-पिता से बात करने से डरें नहीं 

स्टूडेंट्स के साथ सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह होती है कि वे अपनी प्रॉब्लम्स के बारे में अपने पेरेंट्स से बात करने में झिझकते हैं। इस तरह की प्रवृत्ति से समस्या और भी सीरियस होती जाती है। लिहाजा जब आप अपने परीक्षा की तैयारी के संबंध में किसी प्रॉब्लम का सामना कर रहे हों तो अपने पेरेंट्स से खुलकर बातें अवश्य करें। यकीन मानिए उनके मार्गदर्शन में एंग्जायटीज और स्ट्रेस का सामना करने के लिए आपको अद्भुत ताकत और प्रेरणा मिलेगी।

खुद की ताकत को पहचानें और रियलिस्टिक लक्ष्य तय करें

एक स्टूडेंट के लिए सबसे बड़ी दुविधा यह होती है कि वह यह तय नहीं कर पाता है कि वास्तव में वह कितने प्रतिशत मार्क्स पाने के काबिल है। यह निर्धारित करने के लिए उसे खुद को पहले अच्छी तरह से जानने की दरकार होती है। आशय यह है कि उसे अपनी स्ट्रेंग्थ और वीकनेस के बारे में पूरी तरह से ज्ञान होना चाहिए। इस आधार पर जब लक्ष्य निर्धारण किया जाता है तो यह रियलिस्टिक होता है और इससे भय नहीं लगता है और फिर तनाव भी नहीं होता है।

अपनी तुलना किसी और से मत कीजिए

असफलता की स्थिति में हम प्राय: अपनी तुलना उन लोगों से करना शुरू कर देते हैं जो अपने सपनों को साकार करने में सफल हो जाते हैं। यह मानवीय प्रवृत्ति स्वाभाविक है और इसमें कुछ भी विचित्र नहीं है। किंतु यह मनोविज्ञान  निराशा और हताशा को जन्म देती है, सेल्फ कॉन्फिडेंस और सेल्फ-एस्टीम कमजोर पड़ जाता है जो अंतत: स्ट्रेस का कारण बन जाता है।

इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि इस दुनिया में हर व्यक्ति विशिष्ट प्रतिभा और अद्भुत कौशल का धनी होता है, जिसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता है और आप भी उनमें से एक हैं। खुद की काबिलियत में अडिग विश्वास रखें और आगे बढ़ते रहें।

पीछे मुड़ कर कभी भी नहीं देखें 

मानव के रूप में हम प्राय: गुजरे हुए कल के बारे सोचते रहते हैं, कुछ न कुछ गुनते और बुनते रहते हैं। इससे मन उद्विग्न रहता है, हम खुद को अपनी स्थिति के लिए कसूरवार ठहराते रहते हैं। सच पूछिए तो जीवन में चिंता और तनाव का इससे बड़ा और कोई दूसरा कारण नहीं है। यह हमारे लिए पांवों में बेड़ियां सरीखी होती हैं जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। जीवन के सुरंग के इस अंधेरे से हमें बाहर निकलने की जरूरत है। जीवन के घावों को सहलाना बंद करें और आगे की सोचें, अच्छा और सकारात्मक सोचें। क्योंकि जब हम जगते हैं तभी सबेरा होता है।

हौसले को बुलंद और आत्मविश्वास को अडिग रखें 

सफलता के लिए कॉन्फिडेंस काफी अहम होता है। लेकिन प्राय: ऐसा देखा जाता है कि स्टूडेंट्स का कॉन्फिडेंस लेवल हमेशा एक समान नहीं रह पाता है। कभी-कभी वे इतने अधिक निराश हो जाते हैं कि वे अपनी पढ़ाई पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इसीलिए तनाव से बचने के लिए यह भी अनिवार्य है कि आप खुद को वैसे दोस्तों या लोगों की संगती से दूर रखें, जो हमेशा ही नेगेटिव सोचते हैं और आपको कम आंकते हैं। अपना कॉन्फिडेंस हर परिस्थिति में ऊंचा करके रखना जरूरी होता है।

मेहनत तनाव के लिए एक एंटीडोट का कार्य करती है 

जीवन में सफलता का सबसे बड़ा रहस्य कठिन परिश्रम है, अध्यवसाय है। इस दुनिया में जितने महान लोगों ने बेशुमार कामयाबी और शोहरत पाई है, उन सब ने शून्य से शुरू किया था और केवल कठिन मेहनत के बल पर शिखर तक पहुंच पाए। सच पूछिये तो जब हम बिना मेहनत और संघर्ष के परीक्षा में अच्छा रिजल्ट पाने का सपना देखते हैं तो यही हमारी निराशा का कारण होता है, जो धीरे-धीरे चिंता और तनाव को जन्म देता है। इसीलिए यदि आप परीक्षा के तनाव को अपने जीवन से दूर रखना चाहते हैं तो आपको मेहनत के लिए तैयार रहना पड़ेगा। कठिन मेहनत तनाव को खत्म करने के लिए सर्वोत्तम एंटीडोट के रूप में कार्य करता है।

परीक्षा परिणाम जीवन से कभी बड़ा नहीं असफलता की स्थिति में निराश होना कुदरती और मानव स्वभाव है। लेकिन इसके साथ हम यहां पर यह भूल जाते हैं कि जीवन में कोई भी असफलता इतनी बड़ी और अहम नहीं होती है कि उसके सामने जिंदगी छोटी पड़ जाए। बार-बार गिर कर फिर से उठ खड़ा होना ही जीवन है और इसी जीवन शैली में तनावों और चिंताओं से बहुत दूर सुकून और प्रसन्न जीवन जीने का गोल्डन सीक्रेट छुपा होता है।

एसपी शर्मा

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