Thursday, April 25, 2024
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ईश्वर के चरण

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Amritvani


बहुत पुरानी बात है। एक समय जंगल से एक यात्री अपनी मंजिल की ओर जा रहा था। अचानक एक जगह उसे तीन डाकुओं ने घेर लिया और उसका सारा धन लूट लिया। उसे लूट लेने के बाद एक डाकू अपने साथियों से बोला, अब इस आदमी को जिंदा छोड़ देने से क्या लाभ? ये हमारे बारे में दूसरों को बताकर हमें पकड़वा भी सकता है। यह कह कर उसने म्यान से तलवार खींच ली। यह देख कर दूसरे डाकू ने उसे रोका और कहा, जब हम इसका सारा धन ले ही चुके हैं तो इसे मारने से क्या लाभ? इसे रस्सी से बांधकर यहीं छोड़ जाते हैं। अगर भाग्य ने साथ दिया तो यह बच जाएगा, नहीं तो यहीं किसी जंगली जानवर का भोज बन जाएगा। जानवर हमें दुआ देगा कि हमने उसके भोजन का प्रबंध कर दिया। तय रणनीति के तहत डाकुओं ने ऐसा ही किया। कुछ देर बाद तीसरा डाकू लौटकर आया, उसने उस यात्री की रस्सी खोल उसे मुक्त कर दिया और बोला, भाई! मैं तुम्हें सही रास्ते तक छोड़ देता हूं। तीसरे डाकू की कृतज्ञता देख यात्री ने कहा, आप मेरे यहां आतिथ्य ग्रहण करो। डाकू ने कहा, मैं किसी और दिन तुम्हें दूसरे वेश में मिलूंगा। यात्री अपने घर पहुंचा तो उसके चेहरे पर गम की वजह मुस्कान आ गई। क्योंकि उसका लुटा हुआ सामान पहले से यहां मौजूद था। साथ में एक पत्र रखा हुआ था उसमें लिखा था- दुनिया एक जंगल है। उसमें तीन डाकू रहते हैं। वे हैं सत, रज और तम। तम मनुष्य को समाप्त करने का प्रयत्न करता है। रज उसे संसार में बांधता है। परंतु सत उसे तम और रज के चंगुल से छुड़ाकर उस मार्ग पर छोड़ता है, जहां कोई भय नहीं। यह मार्ग हर किसी को ईश्वर के चरणों में पहुंचा देता है। इस कहानी से प्रेरणा लेने की जरूरत है।


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