Monday, January 24, 2022
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वेस्ट यूपी में भाजपा और सपा-रालोद के बीच घमासान!, पढ़िए- जनवाणी की खास रिपोर्ट

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2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वेस्ट यूपी के 16 जिलों में कुल 136 सीटों में से 109 सीटें जीती थी तथा 27 सीटें हार गई थी। एबीपी सी-वोटर सर्वे के अनुसार भाजपा को वेस्ट यूपी में 65-69 सीटें ही मिलती दिख रही है, जो भाजपा के लिए 40 सीटों का बड़ा झटका माना जा रहा है। यहां सर्वाधिक लाभ सपा-रालोद के गठबंधन को मिल रहा है, जिसमें 58 से 62 सीटें सपा-रालोद को मिल सकती है। इस तरह से भाजपा को 40 सीटों का नुकसान हो रहा है।


रामबोल तोमर |

मेरठ: किसान आंदोलन खत्म हो गया। एक वर्ष तो लगा, लेकिन यूपी में 2022 के विधानसभा चुनाव नजदीक है। बड़ा सवाल यह है कि कृषि कानून वापस लेने के बाद क्या भाजपा को किसानों का गढ़ कहे जाने वाले वेस्ट यूपी में लाभ मिलेगा या फिर नहीं? 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वेस्ट यूपी के 16 जिलों में कुल 136 सीटें में से 109 सीटें जीती थी तथा 27 सीटें हार गई थी।

वेस्ट यूपी में भाजपा का शानदार प्रदर्शन रहा था, लेकिन किसान आंदोलन के बाद भाजपा की मुश्किले बढ़ी हैं। एबीपी सी-वोटर सर्वे के अनुसार भाजपा को वेस्ट यूपी में 65-69 सीटें ही मिलती दिख रही है, जो भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यहां सर्वाधिक लाभ सपा-रालोद के गठबंधन को मिल रहा है, जिसमें 58 से 62 सीटें सपा-रालोद को मिल सकती है। इस तरह से भाजपा को 40 सीटों का नुकसान हो रहा है।

यही वजह है कि भाजपा के शीर्ष नेताओं ने वेस्ट यूपी पर अपना फोकस कर दिया हैं, लेकिन किसानों को कृषि कानून वापसी के बाद भी भाजपा मना नहीं पा रही हैं, जिसका नुकसान विधानसभा चुनाव में होता दिख रहा है। हालांकि भाजपा के दिग्गज नेताओं ने वेस्ट यूपी के मतदाताओं की नब्ज हिन्दुत्व को पकड़ने की कोशिश की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मुजफ्फरनगर दंगे और कवाल कांड को अपने भाषण में फोकस करके गए हैं।

इस तरह से भाजपा शीर्ष नेतृत्व इशारा कर गया है कि भाजपा फिर चाहती है कि वेस्ट यूपी को हिन्दुत्व के मोड पर लाकर राजनीति की बेटिंग की जाए। क्योंकि 2013 में कवाल कांड हुआ था, जिसके बाद ही भाजपा ने वेस्ट यूपी में पैर जमा लिये थे। इसमें दो राय नहीं, सपा व रालोद का एक तरह से वेस्ट से सफाया भी हो गया था, लेकिन किसान आंदोलन के बाद रालोद को फिर से राजनीतिक आॅक्सीजन मिलने लगी है।

मेरठ के दबथुवा में रालोद-सपा की संयुक्त सभा हुई थी, जिसमें अच्छी-खासी भीड़ भी जुटी, जिसके बाद ही भाजपा में बेचैनी बढ़ गयी है। एबीपी सी-वोटर सर्वे के अनुसार पश्चिमी यूपी क्षेत्र की 136 विधानसभा सीटों पर कड़ी टक्कर के आसार हैं। भाजपा को इस क्षेत्र में 65 से 69 सीटें मिलती दिख रही हैं।

वहीं, समाजवादी पार्टी के खाते में 58 से 62 सीटें जाती दिख रही है। बसपा को 5 से 9, कांग्रेस को 0 से 4 और अन्य को 0 से 2 सीटें मिल सकती हैं। चुनाव पूर्व आ रहे सर्वेक्षण रिपोर्ट ने एक तरह से हलचल पैदा कर दी है। चुनाव मैदान में कमर कसकर राजनीतिक योद्धा उतर आये हैं।

वादे कर रहे है और दावे, अब देखना यह है कि जनता नेताओं के वादों और दावों से कितनी प्रभावित होती है? हिन्दुत्व पर ही भाजपा चुनाव लड़ेगी, इसकी मंशा जाहिर हो चुकी हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ऐलान कर चुके हैं, हमारा गन्ना, उनका जिन्ना। फिर कवाल में हुए सचिन और गौरव हत्याकांड के जख्म भी कुरेद गए।

फिलहाल शुरूआत है, अभी भाजपा इतनी आसानी से वेस्ट यूपी में हार मानने वाली नहीं है। वेस्ट यूपी को लेकर भाजपा ने प्लान किये हैं, अब देखना यह है कि भाजपा किसानों को रिझा पाती है या फिर नहीं। क्योंकि किसान वर्तमान में भी भाजपा से नाखुश नजर आ रहे हैं।

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