Sunday, June 7, 2026
- Advertisement -

120 बच्चों को पढ़ा रहे पांच शिक्षक

सुविधा के अभाव में नहीं हो रहे दाखिले, बड़ा सवाल: कैसे होगा शिक्षा में सुधार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ/सरधना: क्षेत्र के महादेव गांव में सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करके विशाल राजकीय इंटर कॉलेज को बनवा दिया है। मगर उसमें एक भी शिक्षक नहीं है। कॉलेज की शिक्षा का जिम्मा महज पांच शिक्षकों पर है। मतलब बिल्डिंग और संसाधन तो हैं, लेकिन उनका उपयोग करने वाला कोई नहीं है। यही कारण है कि कॉलेज में छात्रों की संख्या भी नहीं बढ़ पा रही है।

वर्तमान में यहां महज 120 बच्चे ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कॉलेज इंचार्ज शिक्षक व अन्य शिक्षकों के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र लिख चुके हैं। मगर सिस्टम की नींद नहीं खुल रही है। जिससे इतने बड़े कॉलेज और क्षेत्र के लोगों के साथ यह एक बेमानी हो रही है। यदि कॉलेज में स्टाफ की तैनाती हो जाए तो शायद ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा ग्रहण करने के लिए सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। मगर अफसोस इस ओर अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।

सरधना तहसील से करीब तीन किमी की दूरी पर स्थित महादेव गांव में राजकीय इंटर कालेज है। पहले कॉलेज का संचालन क्षतिग्रस्त और छोटी बिल्डिंग में किया जाता था। करीब दो साल में शासन द्वारा कॉलेज के लिए नई बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा है। लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से यहां कॉलेज की विशाल बिल्डिंग तैयार की गई। जिसमें दर्जनों क्लास, लैब, मीटिंग हॉल से लेकर पानी की टंकी आदि तमाम सुविधाएं शामिल हैं। सालों चले निर्माण के बाद कॉलेज का भवन बनकर तैयार हो गया।

तीन माह पूर्व पुरानी बिल्डिंग से कॉलेज यहां सिफ्ट भी कर दिया गया। कॉलेज के लिए नई बिल्डिंग तो मिल गई है। मगर उसमें बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराने के लिए स्टाफ ही नहीं है। नियमानुसार कॉलेज में 14 शिक्षक होने चाहिए। इसके अलावा खेल और कला समेत सभी विषय के शिक्षक भी अनिवार्य हैं। मगर इतने स्टाफ की सूची में कोई नहीं है। कॉलेज की जिम्मा महज पांच शिक्षकों पर है।

जिसके चलते अधिकांश क्लास में ताले लटके हुए हैं। यही कारण है कि इतने बड़े कॉलेज में अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने को तैयार नहीं हैं। वर्तमान में यहां महज 120 बच्चे ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्रधानाचार्य स्टाफ के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिख चुके हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अनदेखी का नतीजा यह है कि क्षेत्र के लोगों को इस कॉलेज का बहुत अधिक फायदा नहीं मिल पा रहा है। यदि अधिकारी इस ओर ध्यान दें तो शायद कॉलेज में बहार लाई जा सकती है।

कॉलेज में महज पांच शिक्षक

राजकीय इंटर कॉलेज में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक हैं। बाकी 14 लेक्चरार, खेल शिक्षक या कला शिक्षक कॉलेज को आज तक नसीब नहीं हुआ है। जिसके चलते क्षेत्र के लोगों को सरकारी शिक्षा सेवाओं ठीक से लाभ नहीं मिल पा रहा है।

इतने बड़े कॉलेज में चंद बच्चे

इतने बड़े कॉलेज में वैसे तो बच्चों की संख्या हजार से भी ऊपर होनी चाहिए। मगर शिक्षक और शिक्षकों की कमी होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों का यहां दाखिला कराने को तैयार नहीं हैं। वर्तमान में यहां महज 120 बच्चें शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

स्टाफ के लिए लगातार की जा रही मांग

ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को इस बात का पता नहीं है कि राजकीय इंटर कॉलेज महादेव को स्टाफ की जरूरत है। यहां के प्रधानाचार्य लगातार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर स्टाफ की मांग कर रहे हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

27 5
वर्तमान में कॉलेज में 120 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कॉलेज में पांच शिक्षकों की तैनाती है। कॉलेज में एक भी शिक्षक नहीं है। शिक्षकों के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द कॉलेज में पर्याप्त स्टाफ की तैनाती होगी।

-शैलेंद्र सक्सैना, प्रधानाचार्य

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

spot_imgspot_img