- गांव का पानी खतरनाक लेवल पर, ग्रामीणों में खौफ
- दर्जनों ग्रामीण कैंसर से पीड़ित, कई का चल रहा है हॉस्पिटल में उपचार
जनवाणी संवाददाता |
इंचौली: बेशक, फैक्ट्रियों की बदौलत बहचौला का नाम दुनियाभर में मशहूर हो रहा है, पर इसके साथ-साथ ही एक काला अध्याय भी जुड़ रहा है। ये अध्याय है पानी को जहर बनाने का। सवाल इन उद्योगों से लेकर सरकार तक पर उठ रहे हैं।
इंचौली थाना क्षेत्र के ब्लॉक रजपुरा के गांव बहचौला में रेडिक्स पावर सोल्यूशन बैट्री फैक्ट्री वर्ष 2009 से बैट्री निर्माण का कार्य कर रही है। जिसके लिए इस फैक्ट्री को अत्यधिक तेजाब की आवश्यकता पड़ती है।

गांववासियों का आरोप है कि फैक्ट्री कर्मचारियों द्वारा नालियों में तेजाबयुक्त पानी डाला जा रहा है। जो नालियों से बहकर गांव के तालाब में इकट्ठा हो रहा है।
आरोप है कि दूषित पानी से पूरे गांव का भूमिगत पानी दूषित हो चुका है। जिस कारण गांव में कई तरह की भयंकर बीमारी जन्म ले चुकी है। पानी दूषित होने से गांव में छोटे-छोटे बच्चे त्वचा रोगों से पीड़ित हो रहे हैं। उनका ये त्वचा रोग कैंसर जैसी भयंकर बीमारी का रूप ले सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि फैक्ट्री मालिक ने फैक्ट्री के अंदर ही वोरवेल करा रखा है तथा सीधा जमीन के अंदर ही केमिकलयुक्त पानी डाला जा रहा है। जबकि फैक्ट्री के पास ही पानी की टंकी स्थित है। जिससे पूरे गांव में पानी की सप्लाई होती है। पूरे गांव के पानी का टीडीएस स्तर खतरनाक लेवल पर पहुंच चुका है। वर्तमान समय में गांव में पानी पीने लायक नहीं बचा है।
अगर समस्या का समाधान अतिशीघ्र नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं, जब गांववासियों को गांव से पलायन करने को मजबूर होना पड़ेगा।
कई बार रेडिक्स पावर सोल्यूशन बैट्री फैक्ट्री मालिक प्रभनीत सिंह निवासी राजेंद्रपुरम, गंगानगर व कर्मचारियों से भी इस संबंध में शिकायत की है।
किन्तु फैक्ट्री मालिक द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। जिससे ग्रामीणों में फैक्ट्री मालिक के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। जबकि बैट्री फैक्ट्री को श्रम विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा दिन में केवल 12 घंटे चलाने की अनुमति प्राप्त है। जबकि फैक्ट्री मालिक द्वारा बैट्री फैक्ट्री को अवैध रूप से 24 घंटे चलाया जा रहा है।
खौफ के साये में पूरा गांव
2700 की आबादी वाले बहचौला गांव में लगभग आधा दर्जन लोगों को अब तक कैंसर हो चुका है। इनमें से कई लोगों मौत के मुहाने पर है। जबकि कई का इलाज चल रहा है।
अब लोगों में कैंसर को लेकर डर इस कदर बैठ गया है कि उन्होंने गांव में लगी टंकी का पानी को पीना ही छोड़ दिया है। सभी लोग वही गांव में बने हैंडपंपों से पानी लाते हैं और वहीं दिनभर पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। अगर अभी नहीं चेते तो काफी देर हो जाएगी। पूरा गांव दहशत के माहौल में जी रहा है।
कई बार किया विरोध

बहचौला के ग्रामीणों ने समय-समय पर फैक्ट्री द्वारा नालियों में गिराए जा रहे केमिकल व तेजाब युक्त पानी का विरोध किया है। न तो कभी सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और न ही प्रदूषण विभाग इस बारे में कभी गंभीर नजर आया है।
केमिकलयुक्त पानी के नुकसान
केमिकल युक्त पानी से खेत की उर्वरा शक्ति क्षीण हो जाती है जिससे फसलें बर्बाद हो जाती हैं। वहीं जहरीले पानी का असर से चर्म रोग, मुंह और शरीर के कई भागों में चकते उभर आते हैं।
केमिकल युक्त पानी पीने से पेट संबंधी रोग के साथ लीवर में दिक्कत की शिकायत रहती है। पानी में सुरक्षित स्तर से अधिक आर्सेनिक होने पर त्वचा रोगों की शुरूआत हो सकती है।
इससे आर्टिरियास्कलेरोसिस जैसा नसों का रोग, किडनी के रोग, मानसिक रोग, हृदय रोग पैदा हो सकते हैं। वहीं त्वचा, फेफड़ों, लिवर, किडनी और ब्लैडर का कैंसर भी हो सकता है।

हैंडपंपों से निकल रहे दूषित पानी को पीने से गांव में कैंसर जैसी भयंकर व अन्य प्रकार की बीमारी हो रही है। वहीं पानी पीने के लिए गांव के लोग मजबूर है, लेकिन इसी पानी में फिटकरी और उबाल कर लोग मजबूरी में पी रहे हैं।
-अंकुर चौहान, जनप्रतिनिधि

दूषित पानी से गंभीर बीमारियां बढ़ रही है। कहा कि दूषित और लाल पानी से बचाने के लिए लोगों को हैंडपम्पों का पानी पीने को मिले, ताकि बीमारियों की चपेट में न आएं।
-दीपांशु चौहान, अधिवक्ता

हमारे घर में लाल व काला पानी आ रहा है। जिसे पूरा परिवार पीता है। घरों में लगी पानी की टंकी पूरी तरह से केमिकलयुक्त पानी से लाल हो रही है। घर का फर्श भी लाल ही लाल दिखाई देता है।
-डा. फकीरचंद

बैट्री फैक्ट्री से निकले केमिकलयुक्त पानी को फैक्ट्री मालिक यदि फिल्टर कर नालियों में छोड़ते हैं तो काफी हद तक गांव के दूषित पानी को बचाया जा सकता है। बैट्री फैक्ट्री के बराबर में ही पानी की टंकी लगी हुई है। उसी टंकी से पूरी गांव की सप्लाई की जाती है। जो पूरा गांव उसकी टंकी का पानी पीकर जीवन यापन कर रहे हैं।
-राजेंद्र चौहान, ग्राम प्रधान बहचौला

तेजाब और बैट्रियों में डलने वाला पानी काफी महंगा है। पहले तो फैक्ट्री कर्मचारियों द्वारा केमिकलयुक्त पानी बरबाद नहीं किया जाता है। फिर भी थोड़ा बहुत बरबाद भी होता है तो उस केमिकलयुक्त पानी को ईटीपी मशीन के जरिए फिल्टर किया जाता है। उसके बाद ही गांव की नालियों में बहा दिया जाता है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है। जबकि फैक्ट्री मालिक के पास प्रदूषण विभाग की एनओसी भी है।
-प्रभनीत सिंह, रेडिक्स पावर सोल्यूशन, चेयरमैन


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