Tuesday, April 28, 2026
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शहर में गैस रिफिलिंग सेंटर या मौत के आउटलेट

  • रोक लगाकर अफसर भूले अवैध रिफिलिंग सेंटर की सुध लेना
  • शहर के भीड़ भरे इलाकों में भरे जा रहे मिनी गैस सिलेंडरों की रिफिलिंग दे रही हादसों को दावत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर और देहात में खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में गैस रिफिलिंग सेंटरों के नाम पर लोगों ने मौत के आउटलेट खोले हुए हैं। यूं कहने को प्रशासन ने एलपीजी गैस रिफिलिंग सेंटरों पर रोक लगायी हुई है, लेकिन उसके बावजूद जगह-जगह खुलेआम धड़ल्ले से एलपीजी की रिफिलिंग की जा रही है।

ना कोई रोकने वाला है ना कोई टोकने वाला है। वहीं दूसरी ओर सूत्रों की मानें तो ये तमाम अवैध एलपीजी गैस रिफिलिंग सैंटर पुलिस की छत्रछाया में संचालित किए जा रहे हैं। जबकि हिदायत दी गयी है कि किसी भी थाना क्षेत्र मेंअवैध रूप से एलपीजी गैस रिफिलिंग सैंटर न संचालित किए जाएं।

हादसों से नहीं सीखा सबक

गैस रिफिलिंग सेंटरों के नाम पर खुले मौत के इन आउटलेट पर पूर्व में अनेकों बार हादसे हो चुके हैं। लेकिन लगता है कि इसको रोकने के लिए जिम्मेदार अफसर पूर्व में हुए इन हादसों से कोई सबक सीखने को तैयार नहीं हैं। हादसों की यदि बात करें तो कुछ दिन पूर्व गंगानगर थाना क्षेत्र के कसेरूबक्सर के समीप गुर्जर चौक के पास स्थित गैराज में रिफिलिंग के दौरान आग हादसा हो गया था।

इस गैराज में अरसे से बडेÞ स्तर पर खुलेआम गाड़ियों में एलपीजी गैस रिफिलिंग की जा रही थी। ऐसा नहीं था कि पुलिस को इसकी भनक नहीं थी, लेकिन सेटिंग-गेटिंग के चलते इस गैराज में धड़ल्ले से गैस रिफिलिंग का काम किया जा रहा था। इसी प्रकार का एक हादसा रिफिलिंग के दौरान पूर्व में लिसाडीगेट क्षेत्र में हो चुका है। लेकिन लगता नहीं कि इस हादसों से किसी ने कोई सबक सीखा हो।

विस्फोट के मुहाने पर आबादी

यूं तो सभी जगह गैस रिफिलिंग सेंटर खुले हुए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा खतरे की यदि बात की जाए तो शहर के घनी आबादी वाले या फिर पिछडेÞ ऐसे इलाके जहां मजदूर पेशा लोग रहते हैं और दिन भर की मेहनत मजदूरी के बाद जो कुछ थोड़ा बहुत कमाते हैं उससे शाम को चूल्हा जलाने का जुगाड तलाशते हैं। इसी तलाश का एक हिस्सा पांच किलो का मिनी रसोई गैस सिलेंडर पर 50 या फिर 100 रुपये की एलपीजी गैस भरवाने का होता है।

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जिन इलाकों में बाहरी लेबर रहती है जो ज्यादातर निर्माण स्थलों के आसपास ठिकाना बनाए हुए हैं, वह इस प्रकार के तबके के लोग ज्यादा मिलेंगे। ये लोग आसपास के बाजार में जहां भी एलपीजी सिलेंडर से रसोई गैस की रिफिलिंग की जाती है, हाथ में मिनी गैस सिलेंडर लटकाए देखे सकते हैं।

भीड़ वाले बाजारों में सबसे ज्यादा खतरा

एलपीजी के रसोई गैस सिलेंडरों से यूं तो पूरे शहर हो या देहात सभी जगह मिनी गैस सिलेंडरों की रिफिलिंग की जा रही है, लेकिन खतरनाक इलाकों या फिर जिन इलाकों पर खतरा मंडरा रहा है ऐसे इलाकों में सरधना, लिसाड़ीगेट, नौचंदी, लोहिया नगर, ब्रहमपुरी, कंकरखेड़ा, भावनपुर सरीखे थाना क्षेत्र अधिक हैं। और तो और खैरनगर जैसे शहर की पुरानी आबादी वाले इलाके में भी न केवल मिनी गैस सिलेंडर बेचे जा रहे हैं

बल्कि वहां पर एलपीजी के सिलेंडरों से मिली गैस सिलेंडरों में गैस की रिफिलिंग भी की जा रही है। यदि खैर नगर सरीखे भीड़ वाले इलाके में मिनी गैस सिलेंडर में रिफिलिंग के दौरान कोई हादसा हो जाए तो फिर उसके परिणाम कितने घातक साबित होंगे इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। केवल खैर नगर इलाका ही अपवाद नहीं ऐसे तमाम इलाके महानगर में हैं जो इन गैस रिफिलिंग सैंटरों के नाम पर खोले गए मौत के आउटलेट की वजह से खतरे के मुहाने पर हैं।

एलपीजी गाड़ियां हैं पंप नहीं

तमाम कार कंपनियों ने एलपीजी की गाडियां तो निकाल दी हैं, लेकिन मेरठ की यदि बात की जाए तो एलपीजी की सड़क पर दौड़ रही इन गाड़ियों के लिए शहर में एक भी एलपीजी पंप नहीं लगाया गया है। पेट्रोल के रेटों के आसामन छूने की वजह से लोग आमतौर पर गैस की गाड़ियां यूज करते हैं। इनमें बड़ी संख्या कंपनी से फिटिड एलपीजी गाड़ियों की भी है।

ऐसा नहीं कि केवल एलजीपी की गाड़ियां भर हैं। जो एलपीजी किट वाली गाड़ियां हैं उनको चलाने वाले उनमें एलजीपी भी भरवाते हैं। महानगर के किसी भी इलाके में इस प्रकार की गाड़ियों में एलजीपी के रसोई गैस सिलेंडर से गैस भरवाई जा सकती है। इन पर कभी कार्रवाई की गयी हो ऐसा याद नहीं आता। लगता है कि प्रशासन को किसी बड़ी वारदात का इंतजार है।

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