Wednesday, April 29, 2026
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खुशखबरी: रैपिड रेल की मिल गई चाबी

  • गुजरात के सावली में एनसीआरटीसी को सौंपा भारत के पहले आरआरटीएस का पहला ट्रेनसेट, जल्द ही पहुंचेगा दुहाई डिपो

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गति से प्रगति के अपने ध्येय वाक्य के साथ भारत के सबसे पहले रीजनल रैपिड ट्रांसिट सिस्टम (आरआरटीएस) का पहला ट्रेनसेट गुजरात के सावली में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को सौंपा गया। आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के सचिव और एनसीआरटीसी के अध्यक्ष, मनोज जोशी ने एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक, विनय सिंह एवं एनसीआरटीसी और एल्सटॉम के अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में एक बटन के क्लिक के साथ ट्रेनसेट रोलआउट की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद, एल्सटॉम के प्रबंध निदेशक द्वारा पहली आरआरटीएस ट्रेनसेट की चाबियां एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक को सौंपी गईं। इस रोलआउट के साथ ही, इन ट्रेनों का डिलिवरी की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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पहला ट्रेनसेट जल्द ही दुहाई डिपो, गाजियाबाद पहुंचेगा। इस अवसर पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस एवं आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं और बधाई भेजी। अपने संदेश में श्रीपुरी ने कहा, यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है, यह परियोजना प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण की सच्ची अभिव्यक्ति है। आरआरटीएस शहरी गतिशीलता में परिवर्तन का अग्रदूत है। इस आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत रीजनल रेल में सवार होकर हम एक नए युग में प्रवेश करेंगे, क्योंकि आरआरटीएस क्षेत्रीय परिवहन के परिदृश्य को बदल देने वाला है।

बड़ा नेटवर्क हो रहा तैयार

यह क्षेत्र के संतुलित और सतत विकास को सक्षम बनाने एवं अनेकानेक संभावनाओं के ले द्वार खोलने वाला है। पहले चरण में ही दो और आरआरटीएस कॉरिडोर की योजना के साथ, यह भारत की क्षेत्रीय रेल की यात्रा की शुरूआत है। उन दो कॉरिडोर पर भी शीघ्र ही काम शुरू किया जाएगा और एक बार पूरा हो जाने के बाद आरआरटीएस एनसीआर के सभी प्रमुख केंद्रों को जोड़ने वाला एक बहुत बड़ा नेटवर्क तैयार करेगा। महामारी के बावजूद निश्चित समय में परियोजना की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने और इनकी दृढ़ता और समर्पित प्रयासों के लिए, एनसीआरटीसी और एल्सटॉम टीम को श्रेय जाता हैं।

न्यू इंडिया का सपना होगा साकार

एनसीआरटीसी के चेयरमैन ने कहा कि भारत का पहला आरआरटीएस न्यू इंडिया के सपने को साकार करने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार है। यह परिवहन के क्षेत्र में एक बेंचमार्क स्थापित करेगा। इस परियोजना को जो बात और भी खास बनाती है, वह यह है कि मेक इन इंडिया दिशानिदेर्शों के तहत इन 30 आरआरटीएस अल्ट्रा-मॉडर्न ट्रेनों को हैदराबाद में डिजाइन गया है और सभी ट्रेनसेट गुजरात के सावली में निर्मित हो रहे हैं। मल्टी-मॉडल इंटिग्रेशन के अपने मूल सिद्धांत के साथ आरआरटीएस, ट्रांजिट का एक तेज, आरामदायक, सुरक्षित, विश्वसनीय, समयनिष्ठ और किफायती तरीका होने जा रहा है।

धरातल पर दिखेगी वास्तविकता

एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने कहा यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण माइल स्टोन है। आने वाले समय में वह इस परिवर्तनकारी परियोजना के लिए उनके सभी प्रयासों और योजनाओं को एक के बाद एक आकार लेते और धरातल पर एक वास्तविकता बनते हुए देखेंगे। आधुनिक कम्यूटर-केंद्रित (यात्री-केन्द्रित) सुविधाओं के साथ ये अत्याधुनिक ट्रेनें एक और उदाहरण हैं कि रणनीतिक दृष्टिकोण, कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ वह देश के भीतर क्या हासिल कर सकते हैं? एल्स्टॉम को दिए गए ट्रेनसेट की आपूर्ति और व्यापक रखरखाव के लिए बंडल्ड अनुबंध के साथ, हमने अब दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव अनुबंध के लिए एक निजी ओ एंड एम पार्टनर की चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है।

ब्रेक लगाने पर उत्पन्न होती है बिजली

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम इन ट्रेनों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जो ब्रेक लगाने पर बिजली उत्पन्न करती है और यह उत्पादित बिजली ट्रेन सिस्टम के ओवरहेड ट्रैक्शन के माध्यम से वापस इलेक्ट्रिक ग्रिड में चली जाती है। आरआरटीएस ट्रेनों में एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई 272 ट्रान्सवर्स बैठने की सीट, खड़े होने के लिए चौड़ी जगह, लगेज रैक, सीसीटीवी कैमरे, लैपटॉप/मोबाइल चार्जिंग सुविधा, डायनेमिक रूट मैप, आॅटो कंट्रोल एम्बिएंट लाइटिंग सिस्टम, हीटिंग वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम समेत अन्य सुविधाएं हैं।

वातानुकूलित आरआरटीएस ट्रेनों में स्टैंडर्ड क्लास और प्रीमियम वर्ग (प्रति ट्रेन एक कोच) के साथ-साथ एक कोच महिला यात्रियों के लिए आरक्षित होगा। आरआरटीएस अपनी तरह की पहली प्रणाली है जिसमें 180 किमी प्रति घंटे की गति वाली ट्रेनें हर 5-10 मिनट में उपलब्ध होंगी, जो दिल्ली और मेरठ के बीच की दूरी 55 मिनट में तय करेंगी।

रेलवे उद्योग में आएगा बड़ा बदलाव

इन दोनों अनुबंधों के सफल संचालन से देश में रेलवे उद्योग में एक बड़ा बदलाव आएगा। हमारे द्वारा उपयोग की जा रही सभी उन्नत तकनीकों और प्रतिबद्ध, कर्मनिष्ठ पेशेवरों की टीम जो इस परियोजना को साकार करने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं, उनकी मदद से हम इस परियोजना को निर्धारित समय पर पूरा करने की स्थिति में हैं और कुछ महीनों में ट्रायल रन शुरू कर देंगे। ट्रेनसेट निर्माण के लिए मेसर्स एल्सटॉम को अनुबंध दिया गया था, जिसके अनुसार वे आरआरटीएस के लिए 40 ट्रेनों की डिलीवरी करेंगे, जिनमें 10, तीन कोच वाली ट्रेनें मेरठ मेट्रो के लिए होंगी। अनुबंध के अनुसार एवस्टॉम 15 साल की अवधि के लिए इन रोलिंग स्टॉक का रख रखाव भी करेगी।

टेÑनों की डिलीवरी शुरू

अनुबंध में संपूर्ण दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के लिए डिजाइनिंग, आपूर्ति, इन्स्टालिंग, परीक्षण और सिग्नलिंग एवं ट्रेन कंट्रोल, सुपरविजन, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और दूरसंचार प्रणाली शामिल हैं। इस रोल आउट के साथ इन सेमी-हाई-स्पीड एरोडायनामिक ट्रेनों की डिलीवरी शुरू हो गई है। एनसीआरटीसी इस साल दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के प्राथमिकता वाले सेक्शन पर ट्रायल रन शुरू करेगी। अपने स्लीक और आधुनिक डिजाइन के साथ ये ट्रेनसेट, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से लैस हल्के वजन वाले होंगे और आॅटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी), आॅटोमेटिक ट्रेन कंट्रोल (एटीसी) और आॅटोमेटिक ट्रेन आॅपरेशन्स (एटीओ) के साथ संयोजित होंगे।

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