Thursday, April 25, 2024
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सरकारी नौकरी भी मिलती नहीं, स्वरोजगार भी घटा

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  • लगातार बढ़ती जा रही बेरोजगार युवाओं की संख्या, निकाय चुनाव में युवाओं का बड़ा मुद्दा
  • कैंची एवं क्रिकेट के लिये गेंद एवं बल्लों का भी घट गया कारोबार
  • चाइना के सामान के कम रेट के कारण बढ़ी डिमांड
  • स्वदेशी सामान तैयार करने में बढ़ गई लागत घट गया कारोबार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: क्रांतिधरा पर लगातार आबादी बढ़ी जा रही है जिसमें वर्तमान में आबादी करीब 25 लाख को पार कर चुकी है। बेरोजगारी आबादी के अनुसार बढ़ने के बजाय घट गई है। लाखों युवा रोजगार की तलाश में भटक रहा है। जहां एक तरफ देश में निजिकरण के चलते बढ़ते प्राइवेट सेक्टर के कारण सरकारी नौकरी का मिलना वर्तमान समय में युवाओं को मुश्किल हो गया है। युवा कुछ समय पूर्व स्वरोजगार एवं लघु उद्योग के माध्यम से कारोबार से जुड़ा था। उनका अब वह कारोबार भी लगातार घटता जा रहा है।

महानगर में मुख्य रूप से हथकरघा के रूप में कपडेÞ एवं खद्दर का कारोबार एवं कैंची और क्रिकेट के खेल में काम आने वाले बल्ले एवं गेंद बनाने के कारोबार से अच्छी खासी संख्या में युवा जुड़ा हुआ था, लेकिन जैसे-जैसे चाइना के सामान का देश में बढ़ता आयात और देश में स्वदेशी सामान तैयार करने में जो लागत आ रही है। वहीं स्वरोजगार से जुड़े कुछ युवाओं का कहना है कि सरकार की उदासीनता के चलते जहां सरकारी नौकरी का युवाओं को मिलना मुश्किल हो गया है।

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वहीं, दूसरी ओर जो युवा स्वरोजगार से जुड़े हैं, वह भी घटता जा रहा है। निकाय चुनाव के अंतर्गत नगर निगम क्षेत्र में मेयर के रूप में नई सरकार को चुना जाना है। चुनाव के दौरान किसकी सरकार बने उसमें अच्छी खासी संख्या वोटरों के रूप में युवाओं की दिखाई देती है। सभी पार्टियों का फोकस भी युवाओं पर ही रहता है, लेकिन चुनाव के दौरान तमाम पार्टियां जहां एक तरफ जनता को तमाम लुभावनी घोषणाओं के चलते युवाओं को नौकरी के क्षेत्र में रोजगार दिलाने का भी आश्वासन तो देती हैं,

लेकिन अधिकतर वायदों पर खरी नहीं उतरती। चुनाव के बाद नौकरी या स्वरोजगार नहीं मिलने पर युवा वोटर खुद को ठगा-सा महसूस करता है। क्रांतिधरा के युवाओं का कहना है कि वर्तमान में सरकारी नौकरी एवं प्राइवेट सेक्टर में जॉब मिलना तो दूर की बात है। जो युवा हथकरघा के क्षेत्र में कैंची, बैट बल्ले, खद्दर के कारोबार से जुड़े थे। अब वह कारोबार धीरे-धीरे घट रहा है। जिस कारण युवा बेरोजगार होकर क्रांतिधरा पर सड़क पर घूम रहा है।

कारोबारियों का झलका दर्द

कैंची उद्योग के कारोबार से जुडेÞ रहीस से बात की तो उसने बताया कि कुछ लोग फर्जी तरीके एनजीओ या अन्य संस्था बनाकर खुद को योजना का पात्र बताकर बडेÞ स्तर पर सरकारी धन को हड़प कर जाते हैं। जबकि पात्र व्यक्ति जो उस कारोबार से जुड़ा है। वह उस योजना के लाभ से वंचित रह जाता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुये बताया कि कैंची कलस्टर लघु उद्योग लोहियानगर में वर्ष 2014-15 के बीच स्थापित हुआ था। जिसमें कुछ लोगों के द्वारा द्वारा कलस्टर में फर्जीवाड़ा करके योजना का करोड़ों रुपया हड़प कर लिया गया। जबकि पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित रह गये। बैट बल्लों के कारोबार से जुडेÞ अनुज सिंघल अध्यक्ष स्पोर्ट्स ने बताया कि आईपीएल से किक्रेट बैट की बिक्री में तेजी आई है।

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वहीं कश्मीर विलो लकड़ी जो आती थी उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जिसके चलते इस उद्योग से जुड़े लोगों को परेशनी आ रही है प्रतिबंध हटाना चाहिए, ताकि जो युवा इस रोजगार से जुड़ा है, उसका यह कारोबार बचा रहे। वहीं कोषाध्यक्ष सरदार इकबाल सिंह ने बताया सरकार युवाओं को नोकरी तो दे नहीं रही कम से कम जो लकड़ी कश्मीर से बैट तैयार करने के काम आती थी।

उस पर लगा प्रतिबंध हटा देना चाहिए। ताकि युवा रोजगार से जुडा रहे। वहीं गुड्स व्यापार संघ के मंत्री रविंद्र रविंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को लघु उद्योग को बढ़ावा देना चाहिए, लेकिन लकड़ी की कुछ आरा मशीनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। उसे हटा देना चाहिए, ताकि युवा रोजगार से जुड़ा रहे।

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