Sunday, January 23, 2022
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Homeसंवादसंस्कारहथौड़े की तरह कठोर न बनें

हथौड़े की तरह कठोर न बनें

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मनुष्य को हथौड़े की तरह क्रूर या कठोर नहीं बनना चाहिए। उसके प्रहार से ताला खुलता नहीं है बल्कि टूट जाता है। ठीक वैसे ही यदि व्यक्ति अपनी शारीरिक शक्ति के बल पर किसी को जीतना चाहता है अथवा वश में करना चाहता है तो वह सौ प्रतिशत असफल रहता है। शक्ति का प्रयोग करके दूसरे व्यक्ति को पराजित किया जा सकता है, उसका मनोबल तोड़ा जा सकता है, परंतु किसी के दिल को नहीं छुआ नहीं जा सकता। किसी के दिल में अपनी जगह बनाना बहुत कठिन कार्य होता है।

मनुष्य का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि वह सबके हृदयों में सदा के लिए बस जाए। लोग चाहकर भी उसे भूल न सकें। सभी उसे उसकी सहृदयता, सरलता, सबको अपना बना लेने की कला, नि:स्वार्थ सबकी सहायता करने आदि के गुणों के कारण उसे हमेशा के लिए याद रखें। मनुष्य को अपने आचार-व्यवहार के प्रति सतत सावधान रहना चाहिए। जब वह दूसरों के हृदय में बस जाता है तो उसका दायित्व भी बढ़ जाता है। लोगों की उससे और अधिक उम्मीदें होने लगती हैं। मनुष्य की कठोरता या क्रूरता सामने वाले को तोड़कर रख देती है। वह किसी का प्रिय नहीं बन पाता। दूसरे शब्दों में कहें तो तलवार के जोर पर किसी का दिल नहीं जीता जा सकता। ऐसे व्यक्ति का दूसरों का दिल जीतने का सपना साकार होना असंभव-सा हो जाता है। कोई भी कठोर स्वभाव वाले व्यक्ति को पसंद नहीं करता और न ही उससे मित्रता करना चाहता है। मनुष्य की कठोरता उसके अहंकार का परिचायक होती है। उसे सबसे अलग-थलग कर देती है।

एक बोधकथा कुछ समय पहले पढ़ी थी, मुझे बहुत पसंद आई। इसमें बताया गया है कि एक हथौड़ा ताले को केवल तोड़ सकता है, उसे खोल नहीं सकता। एक छोटी-सी चाबी बहुत ही सरलता से बड़े-से-बड़े ताले को खोल देती है। इसका कारण है कि वह ताले के अन्तस को छू लेती है। इसलिए उसका दिल जीत लेती है और इसलिए वह ताला खुल जाता है। इस कथा को थोड़े परिवर्तन और अशुद्धि संशोधन के पश्चात यहां दे रही हूं।

एक ताला बनाने वाले की दुकान पर चाबियां बनाई जाती थीं। वहां पर एक हथौड़ा भी पड़ा रहता था एक दिन उस हथौड़े ने चाबी से पूछा- मैं तुमसे अधिक शक्तिशाली हूं, मेरे अन्दर लोहा भी तुमसे ज्यादा है। आकार में भी तुमसे बड़ा हूं लेकिन फिर भी मुझे ताला तोड़ने में बहुत समय लगता है। तुम इतनी छोटी हो फिर भी इतनी आसानी से मजबूत-से-मजबूत ताला कैसे खोल देती हो?

चाबी ने मुस्कुरा के ताले से कहा-तुम ताले पर ऊपर से प्रहार करते हो और उसे तोड़ने की कोशिश करते हो, लेकिन मैं ताले के अन्दर तक जाती हूं, उसके अन्तर्मन को छूती हूं। घूमकर ताले से निवेदन करती हूं और ताला खुल जाता है।
कितनी गूढ़-गंभीर बात कही है चाबी ने कि मैं ताले के अन्तर्मन को छूती हूं, इसलिए वह खुल जाता है।
मनुष्य कितना भी शक्तिशाली हो, उसके पास कितनी भी ताकत हो, जब तक वह दूसरों के दिल में नहीं उतरेगा, उनके अन्तर्मन को नहीं छू सकेगा, तब तक कोई उसका सम्मान नहीं करता।

यह कहानी हमें समझा रही है कि मनुष्य को हथौड़े की तरह क्रूर या कठोर नहीं बनना चाहिए। उसके प्रहार से ताला खुलता नहीं है बल्कि टूट जाता है। ठीक वैसे ही यदि व्यक्ति अपनी शारीरिक शक्ति के बल पर किसी को जीतना चाहता है अथवा वश में करना चाहता है तो वह सौ प्रतिशत असफल रहता है। शक्ति का प्रयोग करके दूसरे व्यक्ति को पराजित किया जा सकता है, उसका मनोबल तोड़ा जा सकता है, परंतु किसी के दिल को नहीं छुआ नहीं जा सकता। किसी के दिल में अपनी जगह बनाना बहुत कठिन कार्य होता है।

इसमें कोई सन्देह नहीं कि यदि मनुष्य चाबी की तरह सरल बन जाए तो सबके दिलों के मजबूत ताले खोलकर उन पर राज कर सकता है। लोग उस पर विश्वास करके अपने रहस्य उस पर उजागर कर सकते हैं। उसकी सरलता ही उसकी लोकप्रियता का बहुत बड़ा कारण होती है।


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