Tuesday, August 9, 2022
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutकैसे खेलेगा इंडिया, बिना कोच के पसीना बहा रहे खिलाड़ी

कैसे खेलेगा इंडिया, बिना कोच के पसीना बहा रहे खिलाड़ी

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  • चार साल से तीरंदाजी खिलाड़ियों को कोच का बेसब्री से इंतजार
  • खिलाड़ियों ने लगाया खेल अधिकरी पर सुविधाएं नही देने का आरोप

जनवाणी संवाददाता  |

मेरठ: पीएम का नारा है खेलेगा इंडिया, तो आगे बढ़ेगा इंडिया लेकिन कैसे यह सबसे बड़ा सवाल है। जिन खिलाड़ियों ने अपने देश के लिए पदक जीतने के सपने संजोएं है। उन खिलाड़ियों को पिछले चार सालों से स्टेडियम मेंकोच भी नही मिल रहा। बिना कोच और सुविधाओं के यह खिलाड़ी बलबूते पर ही देश का प्रतिनिधित्व करने के सपने पाले अपने सपनों को सच करने का हौसला पाले है।

मेरठ का कैलाशप्रकाश स्टेडियम गवाह बना है ऐसे खिलाड़ियों का जिनको न तो सुविधाएं मिल रही न ही कोच। तीरंदाजी में अपने हुनर को तराशने के लिए यह खिलाड़ी जमकर पसीना बहा रहे है लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। स्टेडियम के मेन गेट के बराबर में ही जिले के 18 होनहार तीरंदाज प्रैक्टिस करते मिले, गौर करने वाली बात यह है कि इनको प्रशिक्षण देने वाला कोई नही है।

तीरंदाजी का ही वरिष्ठ खिलाड़ी अमित सराएवाल इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहा है। अमित का कहना है कि तीरंदाजी के खिलाड़ियों को स्टेडियम से कोई सुविधा नही मिल रही है। जिला खेल अधिकारी कहते है कि बिना कोच के वह कोई मदद नही कर सकते। खिलाड़ियों की एक किट 8 हजार रूपये की आती है। जिस टारगेट पर निशाना लगाया जाता उसकी कीमत 4 हजार रूपये है जो खिलाड़ी अपनी जेब से ही खर्च करके लाते है।

प्रैक्टिस के लिए स्टेडियम के कोने में एक जगह दी गई है जहां पर वह प्रैक्टिस करते है। लेकिन प्रोफेशनल कोच नही होने के कारण उनको प्रशिक्षण ठीक से नही मिल रहा है। तीरंदाजी खिलाड़ियों का एकमात्र हॉस्टल सोनभद्र में है-जो खिलाड़ी अपने देश के लिए मैडल जीतना चाहते है उनको कठिन परिश्रम के साथ डाईट व हॉस्टल जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए लेकिन मेरठ में इनमें से कोई सुविधा नही है। पूरे प्रदेश में तीरंदाजी का एकमात्र हॉस्टल सोनभद्र में है। वहां पर बिना जिला खेल अधिकारी के लैटर के एडमिशन नही मिलता। ऐसे में जब मेरठ में तीरंदाज खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा ही नही है तो वह सोनभद्र कैसे पहुंचेगें यह बड़ सवाल है।

पूरे प्रदेश में महज तीन कोच-तीरंदाजी में भविष्य बनाने के सपने देखनें वाले उभरते खिलाड़ियों को कोचिंग कैसे मिलेगी क्योंकि पूरे उप्र में महज तीन कोच ही है वह भी संविदा पर। ऐसे में विश्वस्तरीय टूर्नामेंटों के लिए तीरंदाजी के उभरते खिलाड़ियों का भविष्य कैसा होगा इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

जिला खेल अधिकारी गदाधर बारीखी का कहना है स्टेडियम मेंजगह की कमी है बड़ी मुश्किल से तीरंदाजी के खिलाड़ियों को जगह उपलब्ध कराई गई है, हमने एक कमरा भी इन खिलाड़ियों को सामान रखनें के लिए दे दिया है, अगर इनका कोई समय निश्चित नही है तो उसके लिए छूट दी गई है कि यह किसी भी समय आकर अपनी प्रैक्टिस कर सकते है, पूरे प्रदेश के 75 जिलों में आर्चरी के कुल 3कोच है, कोचों की पोस्ट खाली है लेकिन कोई एप्लाई नही करता न ही क्वालिफाईड है ऐसे में हमसे जो हो सकता है हम कर रहे है।

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