Monday, June 14, 2021
- Advertisement -
HomeUttar Pradesh NewsSaharanpurयोगी जी, नाजुक हाल में सहारनपुर की स्वास्थ्य सेवाएं

योगी जी, नाजुक हाल में सहारनपुर की स्वास्थ्य सेवाएं

- Advertisement -
0
  • मेडिकल कालेज में खाली बेड बता रहे कि उठ चुका है भरोसा
  • कोरोना के कारण हर रोज बढ़ता जा रहा है मौत का आंकड़ा

प्रमुख संवाददाता |

सहारनपुर: सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ आज सोमवार को सहारनपुर जरूर पहुंच रहे हैं किंतु अगर स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो हालात ठीक नहीं हैं। सहारनपुर भी पश्चिम के उन जिलों में शुमार है, जहां अधिकारी फकत आंकड़ों का खेल, कर रहे हैं। सच्चाई तो ये है कि कोविड अस्पतालों का हाल बुरा है।

हर रोज सरकारी रिकार्ड में दर्जन भर मौतें हो रही हैं। हालांकि, मरने वालों की संख्या इससे कुछ ज्यादा ही होती है। टीकाकरण की रफ्तार भी धीमी है। मरीजों को समय पर आक्सीजन नहीं मिल रहा। ठीक से उपचार भी नहीं हो रहा। दावे तो बहुत किए जा रहे। यहां तक कि दवाओं की किट मरीजों के घर तक पहुंचाने के अफसरों के निर्देश हैं लेकिन, असल में ऐसा कुछ नहीं है। यहां की स्वास्थ्य सेवाएं ही वेंटीलेटर पर हैं।

सहारनपुर सूबे का आखिरी जिला है। यहां से उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा इन तीन राज्यों की सीमाएं लगती हैं। महत्वपूर्ण जिला होने के बाद भी यहां की स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर हैं। कोरोना की दूसरी लहर की बात करें तो गांवों में भी संक्रमण फैल चुका है। अब महानगर के अलावा कस्बों और गांवों में घर-घर कोरोना लक्षण वाले मरीज हैं। सीएचसी और पीएचसी का तो हाल काफी खराब है।

कोविड अस्पतालों में भी कोई खास सुविधा नहीं है। मेडिकल कालेज में इन दिनों आक्सीजन प्लांट जरूर शुरू हो गया है किंतु सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हैं। यहां भर्ती कोरोना मरीजों के तीमारदार हमेशा से ही इस बात का रोना रोते आए हैं। दरअसल, यहां की हांफ रही स्वास्थ्य सेवाओं को खुद ब खुद आक्सीजन की दरकार है।

व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होने से ग्रामीणों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। अधिकांश मौतें शहर के निकट वाले गांवों में हो रही हैं। चूकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज दौरा तय है लिहाजा आनान-फानन व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं। सड़कों को चमकाया जा रहा है। चूने का छिड़कांव हो रहे हैं। अफसरों की टोली गांवों का रख कर गई है। लेकिन, देहात की लचर स्वास्थ्य सुविधाओं में विशेष सुधार नहीं हुआ है।

अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर हालात जुदा हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अभी भी उपचार परीक्षण का बंदोबस्त नहीं है। ग्रामीणों का हाल ये है कि वह कोरोना का लक्षण होने पर फकत झोलाछाप डॉक्टरों से उपचार कराने को मजबूर हैं। सबसे खास बात ये है कि कोरोना के कारण अन्य बीमारियों के मरीजों का अस्पतालों में उपचार नहीं हो रहा है। इससे गंभीर बीमारों और बुजुर्गों को खास तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले तो ये व्यवस्था थी कि निजी अस्पतालों में भी वैक्सीन लगाई जा रही थी। लेकिन, अब उनसे यह हक छिन चुका है।

वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। पत्रकारों के लिए अलग से काउंटर खोलने की बात कही गई थी किंतु अभी तक यह संभव ही नहीं हो सका है। अधिकारी इस बारे में केवस आश्वासनों की खुराक देते आ रहे हैं। अव्यवस्था का ही आलम है कि यहां राजकीय मेडिकल कालेज में सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं। आंकड़े देखें तो जनपद का पिलखनी स्थित राजकीय मेडिकल में सबसे अधिक मौतें हो रही हैं।

बात अगर पिछले पांच छह दिनों की करें तो गत 11 मई को चार, 12 मई को 7, 13 मई को 4, 14 मई को 15 और 15 मई को 10 मौत राजकीय मेडिकल काले में ही हुई है। यदि कोविड मरीजों के खाली बेड की बात करें तो 12 बजे तक प्राइवेट अस्पतालों में केवल दो अस्पताल मेगा केयर अस्पताल में मात्र पांच और वीब्रोस अस्पताल में मात्र दो बेड ही खाली है। जबकि बात अगर सरकारी कोविड अस्पतालों की करें तो करीब-करीब प्रत्येक अस्पताल में आधे बेड खाली हैं। दरअसल, बेड इसलिए खाली हैं कि सरकारी व्यवस्था से लोगों का भरोस उठ चुका है।

What’s your Reaction?
+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_img

Most Popular

- Advertisment -

Recent Comments