Saturday, June 22, 2024
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10 से 17 मार्च तक रहेगा होलाष्टक

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  • शुभ कार्य रहेंगे बाधित, लेकिन देवी-देवता की आराधना अति शुभकारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिन तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। हालांकि इन आठ दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, लेकिन देवी-देवता की आराधना के लिए यह बहुत ही शुभकारी दिन माने जाते हैं।

बता दें कि 17 फरवरी से फाल्गुन मास का आरंभ हो चुका है। इसी मास में रंगों का पर्व होली भी मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में होली के पर्व का विशेष महत्व है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का पर्व मनाया जाता है, लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से ही होलाष्टक लग जाता है। फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।

हालांकि इन आठ दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते, लेकिन देवी देवता की आराधना क लिए यह बहुत ही शुभकारी दिन माने जाते हैं। आइए जानते हैं कब से लग रहा होलाष्टक और इस दौरान किन कार्यों को करने की होती है मनाही। होलाष्टक 10 मार्च गुरुवार से लेकर 17 मार्च गुरुवार तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करना अपशकुन होता है। होलाष्टक से होली और होलिका दहन की तैयारी शुरू हो जाती है।

होलाष्टक में क्यों नहीं होते शुभ कार्य

होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ कार्य नहीं करने के पीछे पौराणिक कथा है जिसके अनुसार कामदेव द्वारा भगवान शिव की तपस्या भंग करने के कारण फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि पर क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया था। अन्य कथा के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर पाने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए इन आठ दिनों में कठिन यातनाएं दी थीं। इसलिए होलाष्टक काल को विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन समारोह आदि जैसे शुभ कार्यों को करने के लिए अशुभ माना जाता है।

होलाष्टक पर न करें ये कार्य

फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक लग जाता है। होलाष्टक लगते ही हिंदू धर्म से जुड़े सोलह संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। चाहे कोई नया घर खरीदना हो या कोई नया व्यवसाय शुरू करना हो सभी शुभ कार्य रोक दिये जाते हैं। यदि इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनके अंतिम संस्कार के लिए भी शांति कराई जाती है। एक मान्यता अनुसार किसी भी नविवाहिता को अपने ससुराल की पहली होली नहीं देखनी चाहिए।

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