Saturday, June 10, 2023
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जर्जर मशीन से कैसे बनेगी कंपोस्ट खाद?

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  • लोहियानगर प्लांट का अनुबंध खत्म, फिर भी कार्य जारी, नवंबर 2021 में अनुबंध, 2022 में खत्म
  • 2415 सफाई कर्मचारियों के ठेकेदार का भी अनुबंध हुआ था खत्म, नहीं मिला ठेकेदार
  • गांवड़ी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की जमीन का मामला कोर्ट मेें विचाराधीन, डाल रहा कूड़ा
  • किसान प्लांट से आर्गेनिक कम्पोस्ट लेते हैं तो खेतों में पुन: पॉलीथिन, कपड़ा, र्इंट-पत्थर वापस जायेगा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लोहियानगर स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में एक वर्ष पूर्व इनवायरन आॅर्गेनिक वर्क्स एंड सप्लायर्स मेरठ को जो टेंडर छोड़ा गया था, उसका अनुबंध छह माह पूर्व पूरा हो चुका है। जिसमें यह अनुबंध नवंबर 2021 में दिया गया था और नवंबर 2022 को पूरा हो चुका है। वहीं एक वर्ष के भीतर मशीने भी जर्जर हालत में जा पहुंची है, जिसमें जैसा कूड़ा मशीन में छटनी के लिये डाला जा रहा है।

ठीक वैसा ही कूड़ा बिना छटनी हुए ही निकल रहा है। निगम के आलाधिकारियों की भूमिका पर बड़ा सवाल यह है कि कूड़ा निस्ताण अवैज्ञानिक तरीके से किए जाने का मामला एनजीटी कोर्ट में चल रहा है। वहीं, जो अवैज्ञानिक तरीके से भी यदि कुछ कार्य चल रहा है। वह भी मानक के अनुसार नहीं किया जा रहा है। एक तो मशीने जर्जर होकर टूटने लगी है और कंपनी का छह माह पूर्व अनुबंध भी पूरा हो चुका है।

निगम के द्वारा अभी तक रिटेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है। पुरानी कंपनी से नियम शर्तो के आधार पर कुछ समय के लिये अनुबंध बढ़ाने की बात निगम के आलाधिकारी कर रहे हैं, लेकिन कब तक अनुबंध खत्म होने के बाद पुरानी कंपनी कार्य करती रहेगी। उसकी आगामी तिथि भी निर्धारित नहीं कर पा रही हैं। यह सब मजबूत सेटिंग का खेल या फिर निगम के बड़े हुक्मरान की मेहरबानी कहिए।

कहावत है कि मजबूत सेटिंग हो या हुक्मरान की मेहरबानी हो तो जिसके बाद असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और यदि आपकी सेटिंग कमजोर और हुक्मरान की नजर यदि टेढ़ी हो जाये तो फिर आपका नियमानुसार आसान कार्य भी होना संभव नहीं है। आसान कार्य को कराने के लिये आपकी कार्यालय के चक्कर काटते हुये जूते, चप्पल घिस जायेंगी, लेकिन आपका कार्य नहीं होगा, यदि मजबूत सेटिंग है तो आपको कार्यालय आने की जरूरत नहीं घर बैठे ही कार्य हो जायेगा। भले ही निगम भ्रष्टाचार एवं मजबूत सेटिंग के एक से बढ़कर एक मामले मीडिया की सुर्खिंया बनकर महानगर की जनता के बीच निगम की छवि को धूमिल कर रहें हो,

लेकिन शायद अधिकारियों को उन पर कोई असर नहीं पड़ता और पड़े भी क्यों जब उनकी शासन में अच्छी ओर मजबूत पकड़ है तो उन्हें छवि धूमिल होने से कोई असर भी नहीं पड़ता। तभी तो दर्जभर से अधिक मामले निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के हो चुके हैं, लेकिन अभी तक शायद एक मामले में भी कार्रवाई धरातल होती दिखाई नहीं पड़ रही है।

नगरायुक्त की भूमिका को लेकर एनजीटी नाराज

हाल ही में जिस तरह से एनजीटी कोर्ट में बहस के दौरान नगरायुक्त अमित पाल शर्मा की कार्यशैली को लेकर तीखी टिप्पणी की गई। जिसमें कहा गया कि क्यों न नगरायुक्त की कुर्सी सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक कूडे के ढ़ेर पर कुर्सी डलवा दी जाये, क्योंकि अवैज्ञानिक तरीके से कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। उसके बावजूद जो अवैज्ञानिक तरीके से कूड़ा निस्तारण प्रक्रिया चल रही है।

उसमें भी लापरवाही बरती जा रही है। जिसमें इनवायरन आॅर्गेंनिक वर्क्स एंड सप्लायर कंपनी का अनुबंध नवंबर 2021 से 2022 तक के लिये हुआ था। जिसमें करीब छह माह बीतने के बाद भी आगामी अनुबंध के लिये निगम की तरफ से अभी तक कोई रिटेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की वहीं जो जर्जर मशीनें प्लांट में चल रही है, उन्हें भी ठीक नहीं कराया जा सका है।

जेसीबी से डाला जा रहा कूड़ा

कूड़ा कचरा मशीन में जेसीबी से डाला जा रहा है। वह प्लांट के अंदर छटनी होकर ठीक वैसा ही फाइनल होकर निकल रहा है। जिसमें कुछ पॉलीथिन व र्इंट पत्थर ही मशीन निकाल पा रही है। बाकी कूड़ा कचरा एवं र्इंट वैसे ही निकल रही है। जो भी किसान प्लांट से छटनी हुई कम्पोस्ट खेतों में डालने के लिये खरीदेंगे तो खेतों में किसानों को परेशानी जरूर पैदा करेगी।

देखना है कि आखिर कब तक आगामी कंपनी से अनुबंध होता है या फिर इसी कंपनी को रिटेंडर के जरिये कार्य करने को दिया जायेगा और खराब मशीन को कब तक ठीक कराया जायेगा। गांवड़ी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट जो है,जोकि वेस्ट-टू-एनर्जीं प्लांट लगाया है। उसका मामला कोर्ट में चल रहा है। उसके बावजूद भी निगम अवैज्ञानिक एवं गलत तरीके से वहां पर कूड़ा डलवाना जारी रखे हुये हैं।

जबकि बताया गया है, उक्त भूमि पर कोर्ट से स्टे लगा हुआ है। उसके बावजूद निगम वहीं पर कूड़ा डाल रही है। वहीं, एक मामला इसी तरह का 2415 सफाई मजदूरों का है। उनका भी रिटेंडर नहीं होने से उन्हें 10 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है, यदि दूसरा टेंडर हो जाये तो करीब 14 हजार रुपये से अधिक के मिलना कब का शुरू हो गया होता।

लोहियानगर स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में जो मशीन जर्जर बताई जा रही है। उनको ठीक कराया जा रहा है। वहीं जो अनुबंध कंपनी से हुआ था वह नवंबर माह में पूरा हो चुका है। आगामी कार्य भी उसी कंपनी से टेंडर की नियम व शर्तों के अनुसार ही कराया जा रहा है।

जब अगला प्लांट शुरू होगा तब उससे अनुबंध खत्म कर लिया जायेगा। उसके लिये अभी निर्धारित तिथि नहीं बताई जा सकती। -डा. हरपाल सिंह, प्रभारी स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा, कल्याण अधिकारी नगर निगम मेरठ।

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