Wednesday, April 1, 2026
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शहर में पार्किंग के लाले कैसे बनेगा सिटी स्मार्ट?

  • अवैध पार्किंग संचालक काट रहे चांदी, मौनी बाबा बने अफसर
  • एक दशक से दिखाया जा रहा मल्टीलेवल पार्किंग का सपना नहीं हो रहा पूरा
  • नेता से अधिकारी तक बनते रहे हैं इसकी राह में रोड़ा, सुध लेने वाला कोई नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लंबे समय से शहर को स्मार्ट बनाने का सपना संजोया जा रहा है, मगर हाल यह है कि सिटी में पार्किंग तक के लाले हैं। सड़कों पर बेतरतीब वाहनों की अवैध पार्किंग पर कोई लगाम नहीं लगाई जा रही। जिसकी वजह से शहर दिनभर जाम की चपेट में है। इसके बावजूद भी निगम से लेकर प्रशासन तक कोई इसकी सुध लेता नहीं दिखता। ऐसे में सवाल तो उठना लाजिमी है कि आखिर मेरठ को बिना बेहतर व्यवस्था किए ही स्मार्ट सिटी कैसे बनाया जा सकता है?

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शहर में पार्किंग के बेहतर इंतजाम नहीं होने से मुख्य मार्गों से लेकर सरकारी विभागों और बाजारों तक में जाम की समस्या आम हो चुकी है। शहर में बाजार और दफ्तर खुलते ही सड़कों पर जाम की स्थिति इतनी भीषण होती है कि वाहन दौड़ने के बजाय रेंगने लगते हैं।

हाल यह होता है कि दुपहिया वाहन ही नहीं पैदल तक राहगीरों का रास्तों से निकला दूभर होता है। इसकी एक बड़ी वजह पार्किंग व्यवस्था का शहर में नहीं होना और अवैध पार्किंग संचालकों को बेतरतीब वाहनों को सड़कों पर खड़ा करना है। इसकी आड़ में वह चांदी काट रहे हैं, मगर अवैध पार्किंग का संचालन करने वालों पर कार्रवाई करने से लेकर जाम के झाम से शहर को निजात दिलाने की कोई पहल प्रशासनिक स्तर से फिलहाल होती नजर नहीं आ रही है। फिर भी विभाग से अफसरों तक के दावे शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के हो रहे हैं।

बता दें कि, करीब एक दशक से मंडल मुख्यालय के शहर में मल्टीलेवल पार्किंग बनाने का डंका सरकार से विभाग तक पिट रहा हैं, मगर आज तक मेरठ के नागरिकों को यह सुविधा मयस्सर नहीं हो सकी है। कई बार पार्किंग के मामले में सरकार की पहल पर विभागों द्वारा कागजी खानापूर्ति तो कई बार की गई, मगर हर बार कोई न कोई अडंगा नेताओं की मिलीभगत के चलते अधिकारियों के स्तर पर इसमें लगता रहा है।

अब ऐसे में यह प्रश्न भी उठता है कि विकराल रुप धारण करती जा रही जाम की समस्या का अगर जिले में तैनात अधिकारी समाधान नहीं खोजेगे तो फिर शहर की पीड़ा को कौन सुनेगा? इतना ही नहीं जाम का बड़ा कारण बन रही सड़कों पर होने वाली अवैध पार्किंग पर लगाम कैसे कसी जाएगी और कौन कसेगा? भविष्य में शहर को स्मार्ट बनाने के लिए इन सुलगते सवालों के जवाब तो वेस्ट यूपी का हार्ट कहलाने वाले जनपद में तैनात अफसरों को ही खोजने होंगे।

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