Thursday, June 25, 2026
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आपको भी नींद में खर्राटे आ रहे तो हो जाइए सतर्क!

सोते समय खर्राटे आना अक्सर आम बात मानी जाती हैं। इसे कोई भी गंभीरता से नहीं लेता हैं, लेकिन ये खर्राटे गंभीर बीमारियों का कारण और संकेत हो सकते हैं। ‘जनवाणी’ शहर के विभिन्न डॉक्टरों से बातचीत के बाद पाया कि हर रोज बड़ी मात्रा में स्लीप एपनिया नामक बीमारी के मरीज आ रहे हैं, जो गंभीर बात हैं। महिला या फिर पुरुष दोनों में ही ये बीमारी देखने में आ रही हैं। डॉक्टरों की माने तो समय रहते इसका उपचार चालू नहीं कराया तो जान भी जा सकती हैं। दरअसल, खर्राटा आना स्लीप एपनिया नामक एक गंभीर स्लीप डिस आॅर्डर हैं। इसी बीमारी के चलते कई बड़े लोगों की मृत्यु हो चुकी हैं। जानकारों का कहना है कि संगीतकार बप्पी लहरी और अमेरिका के पूर्व दो राष्टÑपति की मौत भी इसी बीमारी के चलते हुई थी। इस वजह से डॉक्टर भी इस बीमारी को गंभीरता से लेते हैं। जब आपको खर्राटे आ रहे हो तो सावधान हो जाइए और सीधे डॉक्टर से इसमें सलाह ले। इसमें लापरवाही करने पर आपकी जान भी जा सकती हैं।

  • गंभीर बीमारियों के संकेत: डाक्टरों के यहां आ रहे बड़ी मात्रा में स्लीप एपनिया के मरीज
  • सांस रुकने की संभावना, मांसपेशियों में कमजोरी भी होती है वजह

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक स्वस्थ्य इंसान को गहरी नींद आना अच्छी बात है, लेकिन यदि उस नींद में ज्यादा खर्राटें आनें लगे तो यह पहचान है कई गंभीर बीमारियों की। इनमें सांस की नली में रूकावट होने की वजह से दिल व दिमाग को आॅक्सीजन पूरी तरह नहीं मिल पाती। इस वजह से कई बार स्ट्रोक पड़नें की संभावना बन जाती है। खर्राटों की गंभीरता को लेकर शहर के कई डाक्टरों ने अपनी राय रखी।

डा. अंकुर गुप्ता: कनग हॉस्पिटल के डा. अंकुर गुप्ता ने खर्राटों को बेहद गंभीर बताया। उनका कहना है खर्राटें आने की कई वजह होती है। इनमें सांस की नली कम चौड़ी होना, शरीर की मांसपेशियां कमजोर होना, काग लंबा होना, टांसिल बढ़ना, ताल्वा लटकना, जीभ मोटी होना मुख्य है। नार्मल तौर पर 40 से 45 साल की उम्र में खर्राटें ज्यादा आते है लेकिन उनकी वजह अलग अलग हो सकती है।

इनमें कई बार सर्जरी तक कराने की जरूरत पड़ती है। अन्यथा मशीन लगानी पड़ती है। सांस ठीक से न आने से शरीर में कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। इससे शरीर में घबराहट रहने लगती है, नींद में उठकर बैठ जाने की समस्या होने लगती है। गाड़ी चलाते समय नींद आना, आफिस में बैठकर सोना, दिमाग में क्लाउडीनैस रहना, दिल पर ज्यादा जोर पड़ता है, बीपी बढ़ने की शिकायत, शुगर बढ़ने जैसी समस्याएं होने लगती है। यह सभी कारण शरीर के लिए काफी घातक साबित होते हैं।

डा. नवरतन: मेडिकल के एचओडी का कहना है नाक के पीछे एक मांस का टुकड़ा होता है जो सोते समय शिथिल हो जाता है। इस वजह से खर्राटें आते है। यह ऐसे लोगों में ज्यादा होता है जो मोटे होते है। इनकी वजह से सोते समय सांस रूक सकती है जिसे स्लीप एप्नीया कहा जाता है। यह बेहद खतरनाक स्थिति होती है। इसमें ओबिसिटी एप्नीया बढ़ने की संभावना भी रहती है। आमतौर पर खर्राटें आनें की वजह मोटापा ही ज्यादा रहता है

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लेकिन यदि इसपर कंट्रोल न किया जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। यदि बच्चों में खर्राटें आनें की समस्या है तो वह नार्मल नहीं होती। इसके पीछे कोई बड़ी वजह होती है जो आगे चलकर घातक साबित हो सकती है। बच्चों को खर्राटें आने पर जल्द से जल्द अच्छे डाक्टर को दिखाना चाहिए। यदि बच्चे की नाक के पीछे का मांस बढ़ा हुआ है और उसकी वजह से खर्राटें आते है तो इसका इलाज कराना जरूरी है। पूरी आॅक्सीजन न मिलने से और बीमारियां होने की संभावना होती है।

डा. दीपिका सागर: मेडिकल के न्यूरो विभाग की एचओडी का कहना है खर्राटें आने की मुख्य वजह मोटापा होती है। बहुत से लोगों की गर्दन छोटी होती है उनमें भी यह समस्या रहती है। ऐसे लोगो को लेटते समय उनकी सांस की नली दबने लगती है। इससे उनमें वेंटिलेशन नहीं होता। थाइराइड के मरीजों खासकर महिलाओं में खर्राटें आने की समस्या ज्यादा रहती है। इनमें मेटॉबोलिक सिंड्रोम वाले मरीज जिनमे शुगर, कॉलेस्ट्राल बढ़ने वाले मरीज, बीपी, हार्मोन इन्बैलेंस, गुर्दे की बीमारियों से ग्रस्त लोगों में यह समस्या सबसे ज्यादा रहती है।

इनमें थाइरायड व मोटापा सबसे गंभीर है, इन दोनों से बचाव रखना जरूरी है। आमतौर पर खर्राटों को थकान की वजह बताया जाता है लेकिन जिन लोगों में उपर लिखी समस्याएं है उनमें खर्राटें आने की समस्या जरूर रहती है। एक अन्य वजह है बोलने वाली नली में कोई समस्या होना जैसे सूजन आना, गांठ बनना आदि। इस वजह से भी ज्यादा खर्राटें आने लगते है इसे बीमारी की पहचान के रूप में भी देखा जाता है।

डा. वीएन त्यागी: वरिष्ठ चेस्ट रोग विशेषज्ञ का कहना है सारे खर्राटे खतरनाक नहीं होते लेकिन ऐसे मामले जिनमें सांस की नली बंद होने लगे तो यह गंभीर होता है। कई तरह से खर्राटें आते है इनमें एक दिमाग की वजह होती है जिसमे वहां से सांस लेने के सिग्नल आने बंद हो जाते है, जो बेहद खतरनाक स्थिति होती है। इसमे मशीन की जरूरत होती है। इसके अलावा जो मोटे लोग होते है और उनकी गर्दन छोटी होती है उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।

सोते समय इन लोगो की सांस की नली चपटी हो जाती है जिससे सांस लेने में परेशानी होती है। ऐसे लोग जब डीप स्लिप में होते है तो उन्हें खर्राटें आने लगते हैं। कई बार सांस पूरी तरह बंद होने लगती है जिसके बाद इंसान चौंककर उठ बैठता है। यह समस्या लंबें समय तक सांस पूरी नहीं तरह नहीं लेने के बाद पैदा होती है। इसकी शुरूआती पहचान के रूप में बीपी बढ़ना, गुर्दे की बीमारी, डाइबटीज मुख्य है। हर जगह आॅक्सीजन नहीं पहुंचने पर यह बीमारी होती है। इस बीमारी को स्लीप एप्नीया कहते है जो बेहद गंभीर होती है।

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