- काम नहीं आई पुलिस की सख्ती, बार-बार लगा सड़क पर जाम, ना चेहरों पर मास्क और ना कोरोना का डर
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: देश में जानलेवा कोरोना वायरस की सुनामी के बीच महाभारतकालीन तीर्थ नगरी पर पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगी है। पर्यटक नए साल पर जान जोखिम में डाल रहे हैं।

नए साल के जश्न में लोग इस तरह से डूबे हैं कि मानों सब सामान्य है, कुछ हुआ ही नहीं है। बेखौफ जनता को देखने से लगता ही नहीं कि पर्यटकों को कोरोना का डर है। कोरोना से बेखौफ पर्यटक जश्न में डूबे हुए हैं।
महाभारतकालीन तीर्थ नगरी के धार्मिक स्थानों का नजारा शनिवार को देखने लायक था। सड़कों से लेकर प्राचीन स्थानों व जैन तीर्थ क्षेत्रों पर लोगों को हुजूम था। जिसके चलते सड़कें भी कई बार जाम हुई। कोरोना नियम ताक पर रखकर लोग मौज-मस्ती कर रहे हैं। कुछ जगहों पर प्रशासन ने सख्ती बरती है। जिसके तहत नए साल के जश्न में सड़कों पर हुड़दंग मचाने वालों को थाने में बिठाकर सबक सिखाया जा रहा है।
सैकड़ों किलोमीटर का सफर किया तय
देश में ऐसा कोई तीर्थ स्थान नहीं है, जो खचाखच न भर गया हो। ओमिक्रॉन संकट के बीच नए साल के स्वागत के लिए लोग सैकड़ों किमी का सफर तय कर फेवरेट टूरिस्ट डेशटिनेशन पर पहुंच गए हैं।
महाभारतकालीन तीर्थ व जैन धर्मनगरी हस्तिनापुर, शिमला, मनाली, मसूरी, नैनीताल चाहे जो भी नाम ले लीजिए, इन हिल स्टेशन पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर कोई नए साल के जश्न के लिए बेताब है। न चेहरे पर मास्क है और न दिल में कोरोना का डर। बस नए साल के खुमारी छाई हुई है।
जान बची तो लाखों पाए
हमारी जिम्मेदारी देश को आगह करने की है, सरकार की जिम्मेदारी जनता को जागरूक करने की है। पुलिस की जिम्मेदारी नियमों के पालन करवाने की है, पर इन पर अमल करने का काम जनता का है। अगर जनता नहीं समझेगी तो फिर शायद लोग अपनों को खोएंगे। आॅक्सीजन के लिए तड़पेंगे, इसलिए जान जरूरी है और कहावत भी है जान बची तो लाखों पाये। जान है तो जहान है।
बंद हुए मंदिरों के दरवाजे
2022 का आगाज ऐतिहासिक धर्मनगरी में कुछ इस तरह हुआ कि सुबह से प्राचीन और जैन तीर्थ क्षेत्र पर हुजूम नजर आने लगा। सूरज की तपिश बढ़ी तो भीड़ बढ़ने लगी। पुलिस प्रशासन की सख्ती भी काम नहीं आई। दोपहर में सड़कों पर जाम लगना गया। भीड़ इस हद तक बढ़ी कि दोपहर बाद मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं और भीड़ के लिए बंद हो गए।

