- संजय वन में बनाया जा सकता है चिड़ियाघर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सबकुछ सही रहा तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला चिड़ियाघर अपने मेरठ में बनेगा। हालांकि चिड़ियाघर के निर्माण को लेकर वर्ष 2021 में भी चर्चाएं रही, लेकिन 2022 में इसके बनने की पूरी-पूरी उम्मीद की जा रही है। शासन की ओर से इसके निर्माण को लेकर पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। अब केवल बजट आने का इंतजार है।
बता दे कि चिड़ियाघर का नाम लेते ही बच्चों के चेहरे मुस्कान आ जाती हैं, लेकिन मेरठ और उसके आसपास के अधिकतर बच्चे चिड़ियाघर में जानवरों को देख नहीं पाते हैं। ऐसे में चिड़ियाघर बनने से वन्य जीवों के बारे में न सिर्फ यहां के छात्र-छात्राओं को जानने को मिलेगा, बल्कि पर्यटन की स्थिति से मेरठ के लिए यह बड़ी सौगात होगी।
प्रदेश में अभी दो चिड़ियाघर कानपुर और लखनऊ में है। गोरखपुर में चिड़ियाघर बनाने का काम चल रहा है। प्रदेश सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी एक चिड़ियाघर बनाना चाहती है। मेरठ में यह चिड़ियाघर दिल्ली रोड स्थित संजय वन में बनाया जाएगा।
संजय वन 23 हेक्टेयर एरिया मेें फैला हुआ है। यहां कनेक्टिीविटी की समस्या भी नहीं है, क्योंकि यह शहर से सटा हुआ है। चिड़ियाघर यहां बनता है तो आने जाने वालों को सुविधा रहेगी। डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि अभी लिखित में हमारे पास शासन से पत्र नहीं आया हैं, लेकिन हमने चिड़ियाघर के लिए जगह चिह्नित कर ली है। संजय वन में पहले से भी जानवर रहा करते थे, ऐसे में यह सबसे अच्छी जगह हो सकती है।
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हले भी था संजय वन में चिड़ियाघर
वन अधिकारियों के मुताबिक पहले भी संजय वन में मिनी चिड़ियाघर हुआ करता था। जहां 1992 तक मिनी चिड़ियाघर था। उसमें सैकड़ों प्रकार के पक्षी, हिरन, खरगोश, लोमड़ी और यहां तक कि मगरमच्छ भी था।
जलीय जीवों का बड़ा हेबिटेट है मेरठ
हस्तिनापुर सेंचुरी जलीय जीवों का बड़ा हेबिटेट है। गंगोटिक डॉल्फिन पाई जाती है। यहां एक समय उद बिलाव भी बड़ी संख्या में होते थे। घड़ियाल और कछवे भी काफी संख्या में पाए जाते थे। इसलिए चिड़ियाघर में इस प्रकार के जीवों को रखा जाएगा। जिन्हें बच्चे देख उनकी जानकारी ले सकें।

