Wednesday, May 29, 2024
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करनावल, खिवाई, हर्रा में भाजपा को बगावत और भितरघात ले डूबा

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  • भाजपा पार्टी के सामने पार्टी के बागियों और अंर्तकलह से करना पड़ा मुसीबतों का सामना

जनवाणी संवाददाता |

सरूरपुर: नगर पंचायत करनावल और खिवाई में भाजपा पार्टी के सामने पार्टी के बागियों और अंतर्कलह से मुसीबत का सामना करना पड़ा है। करनावल में जहां भाजपा से बगावत कर चुनाव मैदान में लड़ने वाले लोकेंद्र सिंह भाजपा प्रत्याशी को पटखनी देकर भाजपा हाईकमान की आंखें खोल कर रख दी तो वहीं कस्बा खिवाई में भाजपा से बगावत कर पहले पत्नी रश्मि राघव को चुनाव लड़ाने का ऐलान करने और बाद में अपनी मां स्नेह लता को बगावत कर भाजपा प्रत्याशी के सामने चुनाव लड़ाना के लिए भाजपा को भारी पड़ा है।

खिवाई में मेरठ के गंगा प्लाजा व्यापार संघ के अध्यक्ष अनिल राघव भाजपा के टिकट की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने यहां दरकिनार करते हुए मीरा चौहान को टिकट दे दिया था। इससे बगावत कर पहले उन्होंने पत्नी रश्मि राघव को चुनाव लड़ाया, लेकिन पार्टी का दबाव पड़ने पर उन्होंने अपनी मां स्नेह लता को प्रत्याशी बनाकर भाजपा प्रत्याशी को पटखनी देने के लिए भीतरघात कर दिया था। इसी भितरघात के नतीजे के कारण यहां भाजपा हाईकमान द्वारा लगाए गए ऐड़ी चोटी जोर के बाद भी भाजपा प्रत्याशी तीसरे नंबर पर खिसक गए।

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यहां भाजपा प्रत्याशी को अपनो की अंतरकलह और बगावत भारी पड़ी है। भाजपा प्रत्याशी मीरा चौहान अंतर कलह और भितरघात के कारण तीसरे नंबर पर खिसक गई है तो वहीं उनकी जमानत जब्त हुई है। जबकि करनावल में भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ने वाले लोकेंद्र सिंह ने भाजपा प्रत्याशी के सामने बड़ा उलटफेर करते हुए बाजी मार ली तो वहीं भाजपा प्रत्याशी के लिए पूर्व विधायक जितेंद्र सतवाई भाजपा की स्टार प्रचारक रूबी फोगाट सहित तमाम भाजपा हाईकमान द्वारा ऐड़ी चोटी का जोर लगाया जा रहा था, लेकिन यहां भी बगावत कर सामने बिगुल बजाने वाले लोकेंद्र सिंह ने भाजपा प्रत्याशी को कड़ी शिकस्त दी है।

नगर पंचायत करनावल और खिवाई में भाजपा के बागी उसके लिए मुसीबत बन गए तो वही हर्रा में भी भाजपा प्रत्याशी रामभूल चौहान को भितरघात का कड़ा सामना करना पड़ा है। यहां लगभग 800 ठाकुर समाज की वोट है, लेकिन ठाकुर समाज के एक गुट द्वारा अंतर कलह के चलते रामभूल के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी को वोट देकर भाजपा प्रत्याशी को कड़ी शिकस्त दिलाई गई। नगर पंचायत की तीनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशी के भितरघात और बागी ही उसके लिए मुसीबत बन गए।

आखिर करनावल के दो परिवारों से सत्ता खिसकी

करनावल की सत्ता पर लगातार तीन दशक तक काबिज रहने वाले दो परिवारों के बीच से इस बार सत्ता की खिसक ही गई। पहली बार यहां दो फुगाट घरानों से सत्ता पंघाल परिवार में पहुंची है। लगातार तीन दशक तक उधम सिंह और सतीश चेयरमैन के परिवार तक सिमटी रही सत्ता बार पाकिस्तान के बिखराव के कारण तीसरे घराने जा पहुंची। वर्ष 1995 से वर्ष 2022 तक लगातार तीन दशक तक बारी-बारी से उधम सिंह और सतीश चेयरमैन के परिवार पर कस्बे के लोगों ने आस्था जताते हुए उन्हें सत्ता की बागडोर सौंपे रखी।

हालांकि इस बार काफी समय से कस्बे में बदलाव की बयार आ रही थी दोनों परिवारों की सत्ता से ऊब चुकी नगर की जनता इस बार बदलाव चाहती थी। बदलाव के मूड में दिख रही जनता ने खामोश रहकर इसका जवाब दे भी दिया ।दो फोगाट परिवार पर सिमटी सत्ता को इस बार पाकिस्तान के बिखराव के कारण पंघाल परिवार को सौंप दी। वार्ड-1 और 4 को पाकिस्तान मोहल्ला कहते हैं। इसी पाकिस्तान मोहल्ले की निर्णायक भूमिका रहती थी, लेकिन इस बार पाकिस्तान मोहल्ले में बसपा प्रत्याशी ऋषिपाल सिंह पर आस्था जताते हुए उन्हें अपना खेवनहार चुन लिया तो

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वहीं कस्बे के अन्य समाज वर्गों ने लोकेंद्र सिंह पर आस्था जताते हुए उन्हें कस्बे की सत्ता की बागडोर सौंप दी। लगातार तीन दशक तक दोनों परिवारों के राज करने के बाद इस बार सत्ता तीसरे परिवार में पहुंची है। जो करनावल के इतिहास में नगर पंचायत गठन के बाद दूसरी बार ऐसा हुआ है। इससे पूर्व प्रथम चेयरमैन स्व. सुजीत कुमार के बाद वर्ष 1995 में तीसरे घराने के रणवीर चेयरमैन बने थे। जबकि उसके बाद से लगातार अभी तक दो घरानों के बीच सत्ता सिमटी हुई थी,

लेकिन इस बार तीसरे मोर्चे के गठन के रूप में मजबूती से उभरने वाले और भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ने वाले लोकेंद्र सिंह ने बाजी मार ली। भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़के उन्होंने कस्बे की जनता को जोड़ा और कस्बे की जनता ने दोनों परिवारों की सत्ता से उभरकर उनको सत्ता की बागडोर सौंपी। भाजपा से बगावत कर चुनावी मैदान में शुरू से ही मजबूत ताल ठोक कर तीसरे मोर्चे का रूप देने वाले लोकेंद्र सिंह इसमें काफी हद तक कामयाब हुए हैं। उन पर जनता ने विश्वास जताया है और दो घरानों से सत्ता किसका कर उन को सौंप दी है।

दूसरी बार सत्ता पर काबिज होकर शमीम बेगम ने तोड़ा 70 साल पुराना रिकॉर्ड

नगर पंचायत के खिवाई में शमीम बेगम ने 70 साल का इतिहास तोड़ते हुए दूसरी बार सत्ता पर काबिज होने वाले परिवार बन गया है। खिवाई के इतिहास में आजादी के बाद से आज तक किसी भी घराने ने एक बार सत्ता पर काबिज होने के बाद दूसरी बार कब्जा नहीं जमा पाया, लेकिन 70 साल बाद शमीम बेगम में इस रिकॉर्ड को तोड़ते हुए दूसरी बार पद पर काबिज होकर पहली चेयरपर्सन बन गई है।

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इससे पूर्व वर्ष 2005 में उनके पति शमशाद ग्राम प्रधान रहे थे तब से वे लगातार चुनाव लड़ते आ रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें शिकस्त मिल रही थी। इस बार शमीम बेगम ने चेयर पर्सन के पद पर परचम लहरा कर खिवाई के इतिहास में वह रिकॉर्ड कायम कर दिखाया जो किसी परिवार ने आज तक आजादी के बाद से नहीं किया। शमीम बेगम ऐसी पहली चेयर पर्सन बन गई है जिन्होंने एक परिवार से होते हुए दूसरी बार सत्ता हासिल की है। इससे पूर्व यहां लगातार दूसरी बार सत्ता हथियाने के लिए लगत 5 बार चुनाव लड़ने वाले मौलवी मुस्तफा सहित तमाम लोगों ने कोशिश की,

लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली। 70 साल बाद पहली बार शमीम बेगम ने अपने परिवार की वापसी सत्ता पर काबिज होकर की है। खिवाई का इतिहास रहा है कि जिसने एक बार यहां सत्ता कब्जाई दूसरी बार उसे जनता ने नकारा है, लेकिन उन्होंने इस बार सत्ता पर काबिज होकर इस मिथक रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया। शमीम बेगम अब ऐसी जनप्रतिनिधि बन गई है। जिनके परिवार ने दूसरी बार पद पर काबिज होकर सत्ता हासिल की है।

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