Tuesday, April 21, 2026
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टिकट पाने के उत्साह में एक-दूसरे को दिखाया नीचा

  • हर नेता ने अपने आंकड़े कम, दूसरे की कमी ही ज्यादा बताई
  • 11 नेताओं ने मेरठ-हापुड़ सीट से सांसद बनने का देखा ख्वाब

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: टिकट पाने के अति उत्साह में मेरठ के समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सपा सुप्रीमो के सामने ऐसी फजीहत कराई कि अखिेलश यादव को मेरठ का टिकट होल्ड पर कर देना पड़ा। सिर्फ दो नेताओं में टिकट की कश्मकश दूर करने में लगे सपा सुप्रीमो के सामने 11 नेताओं ने अपनी पेशी की। सबसे कमाल की बात तो यह है कि अखिलेश के सामने सभी नेता एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में ही लगे रहे।

हर नेता ने अपनी तारीफ तो कम, दूसरे नेता की बुराई ज्यादा से ज्यादा बताने की कोशिश की। हालांकि सपा सुप्रीमो इस बात पर तैयार थे कि नाम फाईनल कर दिया जाये। लेकिन नेताओं की फौज और एक-दूसरे की बुराई की परंपरा देख अखिलेश यादव ने मेरठ को होल्ड पर डाल दिया है। अब अखिलेश यादव टिकट का नाम फाइनल करने के साथ ही साथ संगठन की भी ओवर हॉलिंग के मूड में नजर आ रहे हैं।

समाजवादी पार्टी में हर कोई अपने को बड़ा नेता साबित करने की जुगत में लगा हुआ है। जुम्मा-जुम्मा आठ दिन आने वाले भी अपने को वरिष्ठ नेता कहने में बिल्कुल परहेज नहीं करते हैं। समाजवादी पार्टी में रहकर बसपा और कांग्रेस नेताओं से नजदीकियां बढ़ाने वाले भी गाहे-बेगाहे अपने को सच्चा सेवक साबित करने की कोशिश करते रहते हैं। हालांकि वह इसमें नाकाम ही रहते हैं। यह सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी में नेताओं की भारी भरकम फौज है। हर कोई सपा सुप्रीमो के करीब रहकर स्वार्थ की सिद्वि कर लेता है।

इनमें नये नेता तो बाजी मारकर ले जाते हैं, लेकिन सालों से संगठन में बिना किसी स्वार्थ के सेवा करने वाले नाकाम ही रह जाते हैं। सपा की सरकार में ऐसी ही नेता लाल बत्ती पाकर दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बन गये। इन नेताओं में से तो कई ऐसे थे जो संगठन में बिल्कुल नये ही आये थे, लेकिन सालों से सेवा करने वालों को दर किनार कर वह लाल बत्ती पा गये। कई तो ऐसे भी मंत्री बन गये। जिनको अपने हस्ताक्षर करना तो दूर, नाम तक लिखना नहीं आता था। कई ऐसे भी मंत्री का दर्जा पा गये। जिनको अपने विभाग की ए-बी-सी-डी का भी इलम नहीं था।

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अब ताजा मामला 12 मार्च को अखिलेश यादव के दरबार में मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर टिकट के उम्म्ीदवार का ऐलान करने का था। सपा अध्यक्ष पहले ही साफ कर चुके थे कि वर्तमान विधायकों को टिकट नहीं दिया जायेगा। लेकिन फिर भी मेरठ जिले के तीनों विधायक अपनी-अपनी तशरीफ लेकर पहुंच गये। अखिलेश यादव ने सभी नेताओं को अलग-अलग बुलाकर उनको पांच-पांच मिनट का समय दिया। इन पांच मिनट में नेताओं ने अपनी तारीफ या मेरठ सीट के जातिगत आंकड़ों तथा अपनी जीत का आधार तो अखिलेश यादव को समझाया नहीं।

हां इतना बताया कि फलां तो गैंगस्टर में निरुद्व हो रहा है। फलाने नेता की हिस्ट्री शीट खुली हुई है। किसी नेता को यह बताया गया कि वह तो अपने घर पर अपने परिवार की ही वोट हासिल नहीं कर सकता। तो किसी को यह बताया कि उसकी छवि पैराशूट नेता की है। अख्लिोश यादव के पास पूरे पांच मिनट की 11 नेताओं की परेड में एक ही नेता ऐसा नहीं पहुंचा। जिसको देखकर अखिलेश यादव सीट का ऐलान कर पाते। हालांकि अखिलेश यादव पूरी तरह मन बना चुके थे कि दो नेताओं में से एक को इस आधार पर चुन लिया जायेगा कि उसके पास इतना समर्थन है।

लेकिन यहां तो मामला ही उलट पच्चीस साबित हुआ। अपने संगठन की इतनी बुरी दुर्दशा देखकर अखिलेश यादव का माथा ठनक गया है। उनको साफ नजर आ रहा है कि यदि मेरठ में अपनी धाक जमानी है और लोकसभा सीट भी हासिल करनी है तो संगठन में आमूल-चूल परिवर्तन भी करना मुफीद रहेगा। लिहाजा अखिलेश यादव ने इन सभी नेताओं को बैरंग लौटा दिया है तथा मेरठ के टिकट को होल्ड पर डालने के बाद मेरठ संगठन में भी बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। बैठक में मौजूद सूत्र बताते हैं कि अख्लिेश यादव इतने गुस्से में हैं कि लोकसभा प्रत्यशाी के नाम के साथ-साथ संगठन को भी नया रूप दे देंगे।

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