Friday, May 31, 2024
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ज्वेलरी डिजाइनिंग कोर्स: पंजीकरण प्रक्रिया शुरू

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  • एकेडिमक काउंसिल में मुहर लगने के बाद इसी सत्र से शुरू हो रहा कोर्स
  • अगले साल से विवि में शुरू होगी ओडीएल पाठ्यक्रम की पढ़ाई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चौधरी चरण सिंह विवि में सोमवार को हुई एकेडिमक काउंसिल की बैठक में ज्वेलरी डिजाइनिंग के कोर्स पर मुहर लगने के साथ ही उसके लिए पंजीकरण प्रक्रिया भी खोल दी गई है। वहीं, आज विवि में होने वाली कार्य परिषद की बैठक में ज्वेलरी डिजाइनिंग कोर्स को लेकर स्टाफ संबंधित विषय पर चर्चा की जाएगी।

बता दें कि विवि की ओर से कोर्स को मुहर लगने के बाद ज्वेलरी डिजाइनिंग विभाग के बी-वॉक (बैचलर आॅफ वोकेशनल स्टडीज इन ज्वेलरी डिजाइनिंग एंड टेक्नोलॉजी) में पंजीकरण शुरू कर दिए गए है। इसकी थ्यौरी विवि में पढ़ाई जाएगी और प्रैक्टिकल देने के लिए छात्र-छात्राओं को 14 किलोमीटर दूर यानि नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ ज्वेलरी टेक्नोलॉजी वेदव्यापुरी जाना होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विवि उद्योगों और कारपोरेट के हिसाब से कई रोजगार परक पाठ्यक्रम इसी वर्ष से शुरु करने जा रहा हैं, जिसमें ज्वेलरी डिजाइनिंग शामिल है। इन पाठ्यक्रमों में डिग्री व डिप्लोमा ही कराए जाएंगे और पढ़ाई के साथ इंटर्नशिप भी कराई जाएगी। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर विवि ने ज्वेलरी विभाग बनाया है। विभाग की समन्वयक प्रो. बिंदू शर्मा रहेगी।

विवि अधिकारियों की माने तो ज्वेलरी विभाग का संचालन फाइन आर्ट विभाग में किया जाएगा। विवि इसका संचालन वेदव्यासपुरी स्थित इंस्टीट्यूट की मदद से करेगा। इस पाठ्यक्रम में 50 सीटों के लिए पंजीकरण होंगे जो कि सोमवार को होने वाली बैठक के बाद शुरु हो सकते है। इसके एक वर्षीय पाठ्यक्रम में डिप्लोमा, दो वर्षीय पाठ्यक्रम में एडवांस डिप्लोमा और तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में स्नातक की डिग्री मिलेगी।

अगले वर्ष शुरु होंगे विवि में ओडीएल कोर्स

एकेडिमक काउंसिल की बैठक में विश्वविद्यालय यूजीसी से अनुमति प्राप्त होने के उपरांत जनवरी 2024 से मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय स्थापित कर कला एवं वाणिज्य संकाय के निर्धारित विषयों में आॅनलाइन तथा ओडीएल पाठ्यक्रम प्रारंभ करने पर भी चर्चा की गई। जिसमें उम्मीद की जा रही है कि अगले साल विवि में आॅनलाइन शिक्षा शुरु कर दी जाएगी। इसके लिए भी एकेडमिक काउंसिल में प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है।

वहीं बैठक में प्री पीएचडी कोर्स वर्क की कक्षाएं इस प्रकार संचालित की जाएगी जिसमें विश्वविद्यालय से संबंधित महाविद्यालय के शिक्षकों को आवश्यकता अनुसार आॅनलाइन कक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। अन्य विद्यार्थियों को आॅफलाइन कक्षाएं उपलब्ध होगी है साधारण स्थिति में संबंधित समन्वयक के अनुरोध पर संबंधित संकाय अध्यक्ष किसी विद्यार्थी को अधिकतम 40 प्रतिशत तक कक्षाओं में आॅनलाइन उपस्थित होने की अनुमति प्रदान कर सकते हैं।

वहीं छात्रों की संख्या 60 से अधिक होने पर संबंधित विभाग दो बैच बनाने पर विचार कर सकता है परंतु इसके लिए औचित्य बताते हुए पूर्व अनुमति ली जानी आवश्यक होगी। अनुदानित या स्वयं वित्त पोषित योजना के अंतर्गत स्थापित विभागों से संबंधित विषयों में प्री पीएचडी कोर्स वर्क की कक्षाएं विश्वविद्यालय परिसर में संचालित होगी तथा जिन विषयों के विभाग विश्वविद्यालय परिसर में नहीं है उनकी कक्षाएं पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार महाविद्यालयों में संचालित होगी।

जिन विद्यार्थियों ने किसी राज्य विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय या किसी मान्यता प्राप्त शोध संस्थान में प्री पीएचडी कोर्स वर्क पूर्ण कर लिया है उन्हें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में प्री पीएचडी कोर्स वर्क से उन मुक्ति होगी। विश्वविद्यालय से संबंधित महाविद्यालय तथा परिसर के विभागों से पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के शोध प्रबंध शोध गंगा में अपलोड किए जाएंगे।

शोध विभाग द्वारा शोध प्रबंध को स्वीकार किए जाने के बाद संबंधित विषय के संयोजक से एक सप्ताह में 6 बाह्य परीक्षकों का पैनल सील बंद लिफाफे में प्राप्त किया जाएगा। तदोपरांत शोध प्रबंधन के मूल्यांकन के लिए बाह्य परीक्षकों के नामांकन की पत्रावली बंद लिफाफे में कुलपति के अदेशार्थ प्रस्तुत की जाएगी।

शोध प्रबंध के मूल्यांकन के लिए बाह्य परीक्षकों के नाम प्रस्तावित करते समय शोध निदेशक तथा संयोजक से अपेक्षा की जाती है कि वह बाह्य परीक्षकों के नाम में पुनरावृत्ति से बच्चे एवं बाह्य परीक्षकों के पद विशेषज्ञ और विश्वविद्यालय के बारे में सुनिश्चित कर लें। बैठक में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, कुलसचिव धीरेंद्र कुमार, प्रो. वीरपाल सिंह, प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, प्रो. संजय भारद्वाज, प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।

पेटेंट में विवि को देश में चौथे और यूपी में मिला पहला नंबर

चौधरी चरण सिंह विवि पेटेंट के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर और देश में चौथे स्थान पर रहा है। देशभर में सरकारी विवि में कोलकाता विवि को बीते तीन वर्ष की अवधि में सर्वाधिक 40 पेटेंट अवार्ड हुए हैं। 27 पेटेंट हासिल कर जामिया मिल्लिया इस्लामिया देशभर में दूसरे, आचार्य नागार्जुन विवि गुंटूर 16 पेटेंट के साथ तीसरे नंबर पर रही है। जेएनयू, हैदराबाद विवि, मद्रास विवि और सीसीएसयू को 15-15 पेटेंट मिले हैं। ये विवि संयुक्त रूप से देश में चौथे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश राज्य विवि में सीसीएसयू पेटेंट पाने में पहले नंबर पर है, जो कि विवि के लिए गर्व की बात है।

पेटेंट के बारे में जानकारी देते हुए विवि कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला ने बताया कि विवि परिसर और सर छोटूराम इंजीनियिरंग कॉलेज से शिक्षकों के 50 से ज्यादा पेटेंट पाइप लाइन में हैं। अगले छह महीने में इनमें कई विवि को ग्रांट होने की उम्मीद है।

कुलपति के अनुसार यदि ऐसा हुआ तो सीसीएसयू देशभर में श्रेष्ठ रैंक सूची में शुमार हो जाएगा। प्रो.वीरपाल सिंह के अनुसार उक्त रैंकिंग एक पत्रिका एवं निजी एजेंसी द्वारा दी गई है। एजेंसी ने देशभर में तीन साल में सर्वाधिक पेटेंट पाले विवि की सूची तैयार की है।

यूपी में पेटेंट फाइल करने में सीसीएसयू पहले स्थान पर

एजेंसी एवं पत्रिका की सर्वाधिक पेटेंट फाइल करने वाले सरकारी विवि सूची में यूपी से कोई विवि नहीं है। तीन वर्ष की अवधि में ही सर्वाधिक 114 पेटेंट फाइल करके जामिया मिल्लिया विवि पहले नंबर पर रही है। 111 पेटेंट के साथ कोलकाता विवि दूसरे, 99 पेटेंट से उसमानिया विवि तीसरे, आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी गुंटूर 76 पेटेंट के साथ चौथे और 46 पेटेंट फाइल करते हुए श्री पद्मावती महिला विश्वविद्यालयम तिरुपति पांचवें नंबर पर रही है।

सरकारी विवि में ही इसी अवधि में सर्वधिक पेटेंट प्रकाशित करने में जामिया मिल्लिया 106, उस्मानिया विवि 99, आचार्य नागार्जुन विवि गुंटूर 76, कोलकाता विवि 65 और श्री पद्मावती महिला विश्वविद्यालयम तिरुपति 49 पेटेंट प्रकाशन के साथ क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चौथे एवं पांचवें नंबर है।

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