नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। बीमारी की कठिन परिस्थितियों में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अक्सर एक बड़े सहारे की तरह काम करती है। लेकिन अस्पताल में भर्ती के दौरान की गई छोटी-सी गलती भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। कई लोग यह मान लेते हैं कि ज्यादा बीमा राशि होने पर वे किसी भी महंगे या लग्जरी कमरे का चयन कर सकते हैं, जबकि असल में ऐसा हमेशा संभव नहीं होता।
रूम रेंट कैपिंग क्या है?
अधिकतर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में ‘रूम रेंट कैपिंग’ का नियम होता है, यानी अस्पताल के कमरे के किराए की एक अधिकतम सीमा तय होती है। सामान्य तौर पर यह सीमा बीमा राशि का लगभग 1% प्रतिदिन होती है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी पॉलिसी 5 लाख रुपये की है, तो आप लगभग 5,000 रुपये प्रतिदिन तक का ही कमरा चुन सकते हैं।
अगर आप इससे अधिक कीमत वाला कमरा लेते हैं, तो अतिरिक्त खर्च आपको खुद वहन करना पड़ सकता है। कई पॉलिसियों में नर्सिंग चार्ज भी रूम रेंट के साथ जुड़ा होता है, इसलिए पॉलिसी की शर्तों को ध्यान से समझना जरूरी है।
महंगा कमरा लेने का असर: प्रोपोर्शनेट डिडक्शन
यदि आप तय सीमा से महंगा कमरा चुनते हैं, तो इसका असर सिर्फ रूम रेंट तक सीमित नहीं रहता। इसे ‘प्रोपोर्शनेट डिडक्शन’ कहा जाता है। इस स्थिति में बीमा कंपनी डॉक्टर फीस, ऑपरेशन थिएटर चार्ज और नर्सिंग चार्ज जैसे अन्य खर्चों में भी आनुपातिक कटौती कर देती है। परिणामस्वरूप, कुल क्लेम राशि में काफी कमी आ सकती है और बड़ा हिस्सा आपको अपनी जेब से देना पड़ सकता है।
आईसीयू चार्ज के लिए अलग नियम
सामान्य वार्ड की तरह ही आईसीयू बेड के लिए भी एक तय सीमा होती है। आमतौर पर यह सीमा बीमा राशि का लगभग 2% प्रतिदिन होती है। यानी 5 लाख रुपये की पॉलिसी पर करीब 10,000 रुपये प्रतिदिन तक आईसीयू खर्च कवर किया जा सकता है। गंभीर स्थिति में भर्ती होने से पहले इन नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
पॉलिसी लेते समय ध्यान देने योग्य बातें
इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए बेहतर है कि पॉलिसी खरीदते समय ‘नो रूम रेंट कैपिंग’ वाला प्लान चुना जाए। अगर आपकी मौजूदा पॉलिसी में यह सीमा है, तो अस्पताल में भर्ती के समय अपनी पात्रता जरूर जांच लें और उसी के अनुसार कमरा चुनें। नियमों को समझकर लिया गया निर्णय आपको क्लेम के समय होने वाली वित्तीय परेशानी से बचा सकता है।

