
जब एक 16 साल की लड़की को पाशविकता से मार दिया गया तो देश, समाज, धर्म, सरकार सभी को याद आई कि दिल्ली में रोहिणी की आगे कोई शाहबाद डेयरी नामक बस्ती भी है। महज जीने की लालसा लिए दूर-दराज के इलाकों से सैकड़ों किलोमीटर पलायन कर आए मजदूर-मेहनतकश बहुल झुग्गी इलाका है यह। यहां रहने वाली आबादी को साफ पानी नहीं मिलता है, गंदे नाले, टूटी-फूटी सड़कों की भीषण समस्या तो है ही। एक इंसान होने के अस्तित्व के तलाश यहां किसी गुम अंधेरों में खो जाती है। चूंकि साक्षी की हत्या एक समीर खान ने की थी तो किसी के लिए धार्मिक साजिश है तो किसी के लिए पुलिस की असफलता तो किसी के लिए और कुछ। एक सांसद पहुंच गए। कई विधायक मंत्री गए। यथासंभव सरकारी फंड से पैसे दे आए।