Sunday, April 21, 2024
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हारा असत्य, जीता सत्य

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  • रावण दहन: डोली भूमि गिरत दशकंधर, धू-धूकर जले रावण और मेघनाद के पुतले

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजय दशमी का पर्व बुधवार को शहर में धुमधाम से मनाया गया। कोरोना खात्मे के बाद दो साल बाद दशहरे मेले का आयोजन किया गया। वहीं दोपहर बाद हल्की-फुल्की बारिश होने की वजह से मेला संचालकों के चेहरे पर थोड़ी परेशानी की लकीरे दिखाई दी,

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लेकिन शाम के समय मौसम सही होने के बाद मेले की ओर से लोगों ने रुख किया। शहर में चारों ओर जाम का माहौल रहा। रामलीला मंचन के बाद रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया। भगवान श्रीराम के अग्निबाण चलाते ही बुराई के प्रतीक पुतले धू-धूकर जल उठे। इसके साथ ही जय श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे।

भैंसाली मैदान: रिमोट से हुआ रावण दहन, आंखों से निकले अंगारे

अयोध्यापुरी भैंसाली मैदान में बुधवार को विजय दशमी के अवसर पर भारी भीड़ उमड़ी और लोगों को हाईटेक लीला देखने को मिली। जहां सोशल मीडिया पर लीला का प्रसारण दिखाया गया। वहीं, दूसरी ओर रावण मुंह से बोलता हुआ दिखा। भैंसाली मैदान में दो रावण के पुतलों का दहन किया गया एक पर राम और रावण का युद्ध दिखाया गया तो दूसरे मंच पर रावण का दहन किया गया।

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लीला में चार घोड़ों पर रावण भगवान श्री राम से युद्ध करने आया। मुख्य अतिथियों द्वारा जैसे ही रिमोट दबाया गया रावण की आंखों से अंगारे निकलने शुरू हो गए और फिर जैसे ही भगवान श्रीराम ने दशानन के ऊपर बाण छोड़ा वैसे ही लोग रावण की अस्थियां लेने भाग पड़े। पुलिस ने जैसे-तैसे व्यवस्था संभाली।

साथ ही दूर-दूर से पहुंचे युवाओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। देर रात तक मेले जैसा आलम रहा। श्रद्धा और उत्साह के साथ लोग जुटे रहे। उद्घाटनकर्ता जयप्रकाश अग्रवाल बिल्डर और संजीव किशोर रहे। कार्यक्रम में रवि माहेश्वरी, अश्विनी गुप्ता, अमित अग्रवाल, नीरज मित्तल, गणेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

धू-धू कर जला दशानन

रजबन स्थित रामलीला मैदान में श्री रामलीला कमेटी रजबन के तत्वावधान में दशहरे मेले का आयोजन किया गया। दशहरे मेले का उद्घाटन सुनील वाधवा पूर्व उपाध्यक्ष छावनी परिषद द्वारा किया गया। वही मुख्य अतिथि कैंट विधायक अमित अग्रवाल दीप प्रज्ज्वलन किया। रावण के पुतलों का दहन सुनील यादव द्वारा किया।

दशहरे के अवसर पर राम और रावण की सवारी रजवंत बड़ा बाजार राधा कृष्ण मंदिर से आरंभ होकर राजबन बड़ा बाजार से होते हुए रजनी छोटा बाजार हनुमान चौक से होकर मेला स्थल पर पहुंची। जहां पर राम और रावण की सेनाओं में भयंकर युद्ध हुआ और राम के द्वारा मेला स्थल पर ही रावण का वध हुआ।

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वहीं, मेला स्थल के आसपास लगी दुकानों पर लोगों ने जमकर आनंद लिया इस तरह दशहरे के पर्व के साथ ही रजबन की रामलीला का समापन भी हो गया। दशहरा उत्सव में अध्यक्ष राजेश यादव, महामंत्री सुनील कनौजिया, सतीश यादव, कोषाध्यक्ष रजनीश यादव, सुधीर भटनागर, श्याम मदान, राम मदान, दिनेश यादव, अभिषेक शर्मा आदि मौजूद रहे।

सूरजकुंड: रावण दहन के साथ गूंज उठा जय श्रीराम

बाबा मनोहर नाथ मंदिर रामलीला सूरजकुंड की ओर से सूरजकुंड पार्क में दशहरे मेले का आयोजन किया गया। आसपास के इलाकों के हजारों लोग यहां पहुंचे। पुतले के दहन से पहले जबरदस्त आतिशबाजी की गई और पूरा इलाका रंगीन रोशनी से जगमगा उठा।

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पार्क में 105 फीट ऊंचे रावण और 100 फीट ऊंचे कुंभकरण के साथ 95 फीट के मेघनाद के पुतले का दहन किया गया। पुतलों का दहन होते ही जय श्री राम के नारे गूंज उठे। श्री महामंडलेश्वर नीलिमानंद महाराज ने आरती की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संजीव गोयल सिक्का, राज्य मंत्री सुनील भराला, विनीत अग्रवाल शारदा, सुरेश जैन ऋतुराज और अरुण वशिष्ठ ने पूजन किया।

अतिथि के रूप में सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, अमित अग्रवाल, जगदीश त्यागी, जयकरण गुप्ता, अतुल गुप्ता, अजय गुप्ता, विकास चौबे, मनोज गुप्ता आदि उपस्थित रहे। मुख्य संयोजक विवेक वाजपेयी, अध्यक्ष पीयूष शास्त्री, महामंत्री मनोज गुप्ता, व्यवस्था प्रभारी नरेश गुप्ता और सुभाष त्यागी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

दिल्ली रोड: 120 फीट के रावण का हुआ दहन, दो घंटे तक हुई आतिशबाजी

दिल्ली रोड स्थित श्री रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ 120 फीट ऊंचे रावण के पुतले का रिमोट से दहन किया गया। इससे पहले दिल्ली से आए कलाकारों द्वारा श्रीरामलीला का मनमोहक मंचन किया गया। भगवान श्री राम दल व रावण सेना युद्ध के लिए रथ पर सवार होकर बैंडबाजे के साथ शाम 4 बजे दिल्ली गेट चौक स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर से ब्रह्मपुरी, इंदिरा नगर से होते हुए बहादुर मोटर्स के सामने से रामलीला मैदान दिल्ली रोड पहुंचा।

इस दौरान लीला मंचन के मुख्य उद्घाटनकर्ता डॉ. ओम प्रकाश अग्रवाल दयानंद नर्सिंग होम एवं अजय अग्रवाल सुपुत्र स्व. दयानंद गुप्ता रहे। अधर्म के विरुद्ध धर्म, असत्य के विरुद्ध सत्य, अन्याय के विरुद्ध न्याय आज अपनी चुनौती लेकर खड़ा थे। दोनों ही पक्षों के वीर, अपनी पूरी शक्ति के साथ सुसज्जित खड़े थे एक ओर अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित रावण की असुर सेना, दूसरी ओर वृक्ष, चट्टान आदि उठाए भगवान राम की वानर और रीछों की सेना थी।

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राम और रावण के बीच युद्ध मे रावण का वध होता है। रावण के वध के साथ रोग, अपराध ,भ्रष्टाचार, गंदगी, लोभ, लालच, महिला उत्पीड़न, आज के दृष्टिकोण से मिलावट खोरी, टूटी सड़कें, सिल्ट से भरे नाले, अवैध निर्माण, अतिक्रमण, जाम, प्रदूषण जैसी बुराइयों का प्रतीक रावण को मानकर उसको जलाया जाता है और बुराइयों का अंत होता है। मंचन देखने आई हजारों की संख्या में भक्त जनों की भीड़ इस लीला मंचन का आनंद लेती है और मेले में लगी अस्थाई खाने व खिलौनों की दुकानों में खरीदारी करती है।

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