Tuesday, April 23, 2024
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अब आसान नहीं होगा धरती का सीना चीरकर पानी निकालना

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  • मैरिज हॉल, रिजार्ट, गेस्ट हाउस आदि के लिए बोरवेल चला पाना हो सकता है टेढ़ी खीर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भूगर्भ जल प्रबंधन विभाग की तकनीक भाषा में नोटिफाइड एरिया और आम बोलचाल में डार्क जोन में आए मेरठ में व्यवसायिक प्रयोग के लिए जमीन का सीना चीरकर पानी हासिल करना आसान नहीं रह जाएगा। इसकी प्रक्रिया इतनी जटिल और महंगी होगी कि मैरिज हॉल, रिजार्ट, गेस्ट हाउस आदि के लिए बोरवेल चला पाना टेढ़ी खीर हो सकता है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार भूगर्भ जल प्रबंधन विभाग की टीम के माध्यम से पिछले दिनों मेरठ में चिन्हित किए गए 109 होटल, मैरिज हॉल, रिजार्ट, गेस्ट हाउस के संचालकों को डीएम दीपक मीणा की ओर से नोटिस जारी करके पंजीकरण कराने और अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की चेतावनी जारी की थी, लेकिन डीएम के नोटिस का केवल 17 संचालकों ने संज्ञान लेते हुए पंजीकरण कराकर अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया।

शेष 92 संचालकों को डीएम की ओर से दूसरा और अंतिम चेतावनी के रूप में नोटिस व्यक्तिगत रूप से जारी किए गए। जिसमें अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन कराने के लिए गठित समिति ने स्थलीय निरीक्षण में पाया कि संचालकों द्वारा बोरवेल के माध्यम से भूगर्भ जल दोहन किया जा रहा है।

निर्देशित किया गया कि उप्र भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम-2019 के निहित प्राविधानों के अनुसार भू-गर्भ जल दोहन के संबंध में आवश्यक उपकरण व अन्य मानकों की पूर्ति करते हुए 15 दिन के अंदर आॅनलाइन पंजीकरण कराकर विभाग से एनओसी प्राप्त कर लें। ऐसा न होने की स्थिति में प्रबंधक/ संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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इस संबंध में सीनियर जियोफिजिसिस्ट, भूगर्भ जल विभाग आदित्य पांडेय ने बताया कि डीएम की ओर से जारी अंतिम चेतावनी के बाद अभी तक 18 लोगों ने ही प्रक्रिया शुरू की है। जबकि नोटिस की अवधि भी समाप्त होने वाली है। अगर बिना पंजीकरण और एनओसी के बोरवेल का प्रयोग पाया जाता है, तो भारी भरकम जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने बताया कि इनमें से पांच व्यवसायिक स्थल बंद हो चुके हैं। एक भवन में चल रहा होटल बंद करके निजी प्रयोग में लिए जाने की सूचना दी गई है।

ऐसी है पंजीकरण और एनओसी की प्रक्रिया

आदित्य पांडेय के मुताबिक मंडप आदि व्यवसायिक प्रयोग के लिए भूजल निकालने के लिए एमएसएमई में पंजीकरण कराकर माइक्रो या स्माल यानि 10 केएलडी से कम के लिए एक मुश्त पांच हजार रुपये देकर पंजीकरण कराया जा सकता है। इससे अधिक पानी के प्रयोग के लिए एमएसएमई में पंजीकरण के साथ एनओसी जरूरी होती है।

राज्य भूजल प्रबंधन एवं विनियामक प्राधिकरण के मुख्य सचिव राजेन्द्र तिवारी की ओर से तीन जुलाई 2020 में जारी आदेश के अनुसार जल संकट के दृष्टिकोण से अति दोहित नोटिफाइड शहरी क्षेत्र में वाणिज्यिक, औद्योगिक आदि प्रयोग के लिए पंजीकरण पांच हजार रुपये देय होगा।

इसके साथ ही 500 घन मीटर से कम के लिए एक रुपया 20 पैसा प्रति घन मीटर प्रतिदिन से लेकर पांच हजार घन मीटर के लिए 1.50 रुपये प्रति घन मीटर प्रतिदिन की दर से शुल्क लिया जाएगा। भूगर्भ जल उपयोग की मात्रा एवं एक वर्ष में पम्पिंग दिनों को गुणा करके स्लैब की दर तय की जाएगी।

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