- रैपिड और मेट्रो ने शहर को दिलाई पहचान, 30 रैपिड और 10 मेट्रो ट्रेनें दौड़ेंगी ट्रैक पर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शुक्रवार को मेरठ मेट्रो की झलक दिखने के बाद अब मेरठ अंतर्राष्ट्रीय परिवहन मानचित्र पर चमकने को तैयार है। रैपिड और मेट्रो एक ही ट्रैक पर दौड़ने के कारण यह कॉरिडोर आधुनिक तकनीक की उम्दा मिसाल भी है। 30 हजार 274 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजक्ट का काम अब अपने बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच चुका है। रैपिड जहां प्रायोरिटी सेक्शन पर दौड़ रही है वहीं, अगले सेक्शन पर दौड़ने के लिए बिल्कुल तैयार है। उधर, मेरठ मेट्रो ट्रेनों की आमद भी शीघ्र ही दर्ज होने वाली है।
दरअसल, भारत में पिछले कुछ समय के दौरान परिवहन के बुनियादी ढांचे में क्रांति दिखी है। दिल्ली-मेरठ रैपिड कॉरिडोर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा मेरठ सहित कई शहरों में जिस प्रकार ‘मेट्रो परिवहन कल्चर’ विकसित हो रहा है उससे भी देश ने वैश्विक परिवहन मानचित्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। एनसीआरटीसी के इंजीनियर्स के अथक प्रयास और उनकी आधुनिक प्रणाली देश के रेलवे सिस्टम को इतनी जल्दी अपग्रेड कर देंगे शायद ही किसी ने सोचा होगा।

रैपिड और मेरठ मेट्रो दोनों अलग-अलग प्रणालियों की ट्रेनें होने के बावजूद दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस के बुनियादी ढांचे पर ही संचालित होने के कारण भी चर्चाओं में हैं। एनसीआरटीसी ने वैश्विक रेल परिवहन की दुनिया में एक अग्रणीय प्रयास को चिन्ह्ति करते हुए लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) पर हाइब्रिड लेवल तीन के साथ यूरोपीय ट्रेन नियंत्रण प्रणाली (ईटीसीएस) लेवल दो सिग्नलिंग प्रणाली लागू की है, जिसके चलते ट्रेन सेवाओं की फ्रिक्वेंसी और बढ़गी। रैपिड और मेट्रो कल्चर महानगरीय शहरों में जहां मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की तरफ इशारा कर रहा है
वहीं, यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ा रहा है। इन सबके चलते मेरठ अब वैश्विक परिवहन मानचित्र पर अपना एक अलग स्थान तय करने में व्यस्त है। एनसीआरटीसी पहले ही इस बात का ऐलान कर चुका है कि देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन रैपिड का पूरे 82 किमी लम्बे कॉरिडोर पर संचालन समय सीमा से पहले ही शुरू हो सकता है।

