जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: भारतीय दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोष निर्माण को लेकर नदलेस ने किया कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस के आर्ट फैकल्टी लॉन में हुई इस बैठक में डा. अनिल कुमार, कर्मशील भारती, डा. अमित धर्मसिंह, डा. सुरेंद्र कुमार, बृजपाल सहज, उमरशाह, लोकेश चैहान, गीता कृष्णांगी और इंदु रवि आदि उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की व संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया।
डा. अमित धर्मसिंह ने कोष निर्माण के विषय में विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि भारतीय दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश अब तक के दलित साहित्य का वस्तुनिष्ठ इतिहास तो होगा ही साथ यह दलित साहित्य के अध्यताओं और शोधार्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होगा।
भारतीय दलित साहित्य एवं साहित्यकार कोश को लेकर पहली बैठक गत 13 मार्च को ऑनलाइन हुई थी। जिसमें अलग अलग प्रांतों से जुड़े सभी रचनाकारों ने एकमत होकर कोश निर्माण किए जाना महत्तपूर्ण कार्य बताया था।
उसी संदर्भ में कोश निर्माण को लेकर जानकारी जुटाने हेतु फॉर्मेट तैयार किया गया जिसे संबंधितों के हिसाब से सात भागों में वर्गीकृत किया गया है। इसके माध्यम से जानकारी प्रेषित करना और जुटाना अत्यंत सरल होगा। तत्पश्चात डा. अमित धर्मसिंह ने फॉर्मेट का वाचन किया। जिसमें कुछ आवश्यक सुधार करके सर्वसम्मति से पास किया गया।
कर्मशील भारती ने कहा कि वास्तव में कोश निर्माण का यह कार्य ऐसा है कि जिसकी दलित साहित्य में बेहद जरूरत थी। यह ऐसा अकादमिक कार्य होगा जिसके महत्त्व को किसी भी दृष्टिकोण से नकारा नहीं जा सकेगा। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि जो अब तक दलित साहित्य में नहीं हुआ और जोकि बहुत पहले किया जाना चाहिए था, वह अब किया जा रहा है।
जिसके लिए नदलेस की पूरी टीम बधाई और सराहना की पात्र है। डा. अनिल कुमार ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि निश्चित रूप से कोश निर्माण का यह कार्य बड़ा ही श्रमसाध्य और बड़ा ही मुश्किल कार्य है लेकिन असंभव नहीं है। अगर सभी साथियों ने कोश निर्माण को अपनी सहज जिम्मेदारी का हिस्सा बनाकर कार्य किया तो निश्चित ही हम, जल्दी ही कोश निर्माण की कार्य योजना को मूर्त रूप देने में सफल हो जायेंगे।
डा. सुरेंद्र कुमार आरएलए ने कहा कि श्सफल वही होते हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।श् वास्तव में कोश निर्माण का यह कार्य बहुत ही उत्तम विचार है, जिसको हर हाल में किया जाना चाहिए। इसके लिए मजबूत रणनीति से कार्य करने की जरूरत है।
उमरशाह ने कोश निर्माण के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार किए जाने के साथ साथ पत्र पत्रिकाओं में विज्ञापन आदि दिए जाने की बात रखी। इसके अतिरिक्त बृजपाल सहज, लोकेश चैहान, गीता कृष्णांगी और इंदु रवि ने भी कोश निर्माण के संदर्भ में अपने सहमतिपूर्ण विचार रखे।
इसके साथ ही सभी उपस्थित साहित्यकारों ने सोच पत्रिका के प्रवेशांक को छपाई के लिए उपयुक्त बताया। बैठक के अंत में इंदु रवि ने अपनी दो पुस्तकें और कर्मशील भारती ने अपना सद्य प्रकाशित नाटक की एक एक प्रति नदलेस के नाम भेंट की।

