Tuesday, May 28, 2024
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प्रकाश पर्व और वैशाखी पर निकला नगर कीर्तन

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  • नगर कीर्तन में गतका दल के हैरत भरे करतब देख मुग्ध हुए लोग

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नवम गुरु, हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित एवं खालसा पंथ की सृजना बैशाखी की खुशी में शनिवार को गुरुद्वारा माता सीता भैंसाली द्वारा एक नगर कीर्तन निकाला गया। जिसका संचालन अमरजीत सिंह एडवोकेट सहित श्री गुरु हरि राय साहिब सेवा सोसाइटी के नवयुवक से वादार कर रहे थे। नगर कीर्तन अरदास सम्पन्न कर पंज प्यारों, निहंग सिंहो एवं गणमान्यों सहित सेवादारों को सरोपे भेंट कर सतसरी अकाल के जयकारों के साथ प्रारम्भ हुआ।

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जिसमें सर्वप्रथम खालसायी नगाढ़ा बजाया जा रहा था जो प्रतीक है गुरु साहिब की सवारी आगमन का, पंज घुड़सवार निहंग सिंह खालसायी फौज के रूप में और पाच निशान साहिब (केसरी ध्वज) लिए शोभा बढ़ा रहे थे, चार साहिबजादे गतका चल (शस्त्र मुकाबला दल) कृपाण, खंडे, लाठियां, चक्र आदि शस्त्रों से हैरत अंगेज करतब दिखाते चल रहे थे, छोटे बालक-बालिकायें सुन्दर धार्मिक रूप वस्त्र धारण कर शोभा बढ़ा रहे थे, वो बैंड शबदों को बैंड की धुन में गा बजा रहे थे, स्त्री सत्संग कीर्तनी जत्था, भाई मदार्ना कीर्तनी जाता, निष्काम कीर्तनी जत्था गुरुवाणी के शबदों का विभिन्न वाद्यय यंत्रों को बाजा गायन करते चल रहे थे।

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श्रद्धालुजन झाडू-पानी से सम्पूर्ण मार्ग की सफाई सेवा का दर्शन करा रहे थे, पंज प्यारे साहिबान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जो सुन्दर सजे वाहन पर सुशोभित थे की आगवानी कर रहे थे। नगर कीर्तन से वातावरण गुरुमय हो गया। नगर कीर्तन गुरुद्वारा भैंसाली से शुरू होकर सदर बाजार, आबू लेन, बेगमपुल चौराहा, पैंठ बाजार, लालकुर्ती छोटा बाजार, बड़ा बाजार से होता हुआ गुरुद्वारा श्री कलगीधर में पहुंचा।

हरि जुग- जुग भक्त उपाया पैज रखदा आया रामराजे

खालसा पंथ की सृजना बैसाखी को समर्पित गुरु पंथ और गुरु ग्रंथ सप्ताह के अंतर्गत शनिवार को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा थापरनगर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रचार सोसाइटी द्वारा शबद-कीर्तन एवं प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें सर्वप्रथम सहायक ग्रंथी भाई किशनपाल सिंह ने गुरुवाणी पाठ का उच्चारण किया। उसके पश्चात हजूरी रागी भाई प्रीतम सिंह ने आसा की वार का कीर्तन करते हुये तन मन धन सभ सओंप गुरु कओ हुक्म मनिअ‍ै पाइये, हरि जुग-जुग भक्त उपाया पैज रखदा आया रामराजे आदि शबदों का मधुरतम आवाजों में गायन कर सभी को निहाल किया।

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सभा के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी चरनप्रीत सिंह ने प्रवचन करते हुए कहा कि खालसा पंथ की सृजना का बीजारोपण श्री गुरु नानक देव ने ही कर दिया था। नानक निरमल पंथ चलाया गुरु फुरमान है। उसी निरमल पंथ को 230 वर्षों बाद गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ का नाम देकर ही खालसा पंथ की स्थापना कर खालसा मेरो रूप है खास से सम्मान किया। श्री गुरु ग्रंथ साहित्य प्रचार सोसाइटी के प्रमुख सेवादार रणजीत सिंह जस्सल ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह ने ऐसे विकट समय में खालसा पंथ की सृजना की जब अन्याय एवं अत्याचार का बोलबाला था राजा प्रजा की रक्षा न कर मानवता को डराने सताने का ही काम करते थे और राजे सीह मुकदम कुत्ते, जाअि जगाअिन बैठे सुत्ते जैसा माहौल बन गया था।

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