Friday, June 5, 2026
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साइबर ठगी का नया पैंतरा

Samvad 52

27 7इन दिनों साइबर ठगों ने लोगों को अपने चंगुल में फंसाने के लिए एक और नया तरीका अपनाया है, जिसका नाम है डिजिटल अरेस्ट। यह साइबर क्राइम का नायाब तरीका है। साइबर ठगी करने वाला लोगों को फंसाने के लिए ब्लैकमेलिंग का खेल खेलता है और लोग उसके जाल में फंस जाते हैं। साइबर क्राइम के इस बिलकुल नए तरीके में स्कैमर्स पुलिस, सीबीआई या कस्टम का अधिकारी बनकर आपको कॉल करते हैं और डराकर घर पर ही बंधक बना लेते हैं। स्कैम का यह खेल यहीं से शुरू होता है। इस तरह के स्कैम को डिजिटल अरेस्ट कहते हैं। साइबर ठग गिरफ्तारी का डर दिखाकर आपको घर में ही कैद कर देते हैं।

सबसे पहले ठग आपको अधिकारी बनकर कॉल करता है। फिर बताया जाता है कि आपका आधार कार्ड, सिम कार्ड, बैंक अकाउंट का उपयोग किसी गैर कानूनी काम के लिए हुआ है। यहां से आपको डराने-धमकाने का खेल शुरू होता है और फिर ठगी का टारगेट पूरा किया जाता है। ठग वीडियो कॉल में अपने बैकग्राउंड को किसी पुलिस स्टेशन की तरह बना लेते हैं, जिसे देखकर पीड़ित डर जाता है और वह उनकी बातों में आ जाता है। ठग जमानत की बात कहकर आपसे ठगी शुरू करते हैं। अपराधी आपको वीडियो कॉल से ना हटने देता है और ना ही किसी को कॉल करने देता है। हाल ही में साइबर ठगी के जरिए डिजिटल अरेस्ट के कुछ मामले सामने आए हैं। कुछ प्रमुख घटनाओं से ठगी के इस महाजाल को समझने की कोशिश करते हैं।

नोएडा में रहने वाली एक महिला ने बताया कि उन्हें एक कॉल आया। यह कॉल इंटरनेशनल कूरियर कंपनी के कर्मचारी ने किया था। उसने महिला को बताया कि उनके नाम से भेजे पार्सल में ड्रग्स मिला है। महिला ने जब इस तरह के किसी भी भी पार्सल की जानकारी न होने की बात कही तो उन्होंने बताया कि वे इसकी शिकायत मुंबई साइबर क्राइम ब्रांच में दर्ज करवा रहे हैं। इसके बाद महिला के पास एक वीडियो कॉल आता है, जिसका बैकग्राउंड किसी पुलिस स्टेशन का था। पुलिस अफसर बनकर बात कर रहे व्यक्ति ने वीडियो कॉल पर महिला को रातभर सोने नहीं दिया और उसे डरा-धमकाकर करीब 5.20 लाख रुपए अलग-अलग खातों में जमा करवा लिए। महिला को 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया।

एक अन्य मामले में नोएडा में साइबर जालसाजों ने भारतीय रेलवे के सेवानिवृत्त जीएम को 24 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट कर 52.50 लाख रुपए की ठगी की। जालसाजों ने ताइवान भेजे गए पार्सल में ड्रग्स, अंडरवर्ल्ड डॉन से संबंध और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर वारदात की। वहीं प्रयागराज के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को चार दिन तक उसके घर में डिजिटल अरेस्ट रखा गया और उससे 98 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। उसे मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। उसे डराने और धमकाने के लिए कोर्ट कोर्ट के फर्जी कागजात भी दिखाए गए। इसी तरह एक बुजुर्ग महिला से करीब एक करोड़ 48 लाख रुपए ठगने का मामला भी सामने आया था। इसी तरह 2.81 करोड़ रुपए की ठगी का भी एक मामला सामने आया है, यह ठगी का सबसे बड़ा मामला है।

वहीं जयपुर में रहने वाली एक महिला बैंक मैनेजर के पास साइबर क्रिमिनल का कॉल आया। कॉलर ने खुद के दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण का अधिकारी बताते हुए कहा कि आपके आधार कार्ड से ली गई एक सिम का उपयोग अवैध कार्यों के लिए किया जा रहा है। मैनेजर यह सुनकर हैरान रह जाती है। इसी दौरान एक दूसरे व्यक्ति का कॉल आता है, जो खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताता है। गिरफ्तारी से बचने के लिए एक डाउनलोड करके वीडियो कॉल पर आने की कहता है। करीब पांच घंटे तक वह क्रिमिनल मैनेजर को डिजिटल अरेस्ट करके रखता है। इस दौरान वह गिरफ्तारी से बचने के लिए रुपए ट्रांसफर करने के लिए कहता है। डर के मारे मैनेजर ने अपनी एफडी तोड़कर 17 लाख रुपए साइबर क्रिमिनल द्वारा बताए गए अकाउंट पर ट्रांसफर कर दिए।

दरअसल इस तरह के अपराधों पर रोक लगाने के लिए सरकार भी कार्रवाई कर रही है। हाल ही में सरकार ने तेजी से बढ़ रही डिजिटल अरेस्ट और ब्लैकमेल की घटनाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 1,000 स्काइप आईडी को ब्लॉक किया है। बावजूद इसके इस तरह की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। आरबीआई की एक रिपोर्ट की मानें तो वित्त वर्ष 2023 में 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के बैंक फ्रॉड देश में रिकॉर्ड किए गए हैं। पिछले एक दशक की बात करें तो एक जून, 2014 से लेकर 31 मार्च, 2023 तक भारतीय बैंकों में 65,017 फ्रॉड के मामले सामने आए हैं, जिसकी वजह से 4.69 लाख करोड़ रुपए की ठगी की गई है। साइबर क्रिमिनल्स यूपीआई स्कैम, क्रेडिट कार्ड स्कैम, ओटीपी स्कैम, नौकरी के नाम पर स्कैम, डिलीवरी स्कैम आदि के जरिए लोगों को चूना लगा रहे हैं। इसके अलावा अब डिजिटल हाउस अरेस्ट भी साइबर अपराधियों का हथियार बन रहा है।

असल में यह सब साइबर ठगों की ओर से लोगों को डराने और धमकाने के फर्जी तरीके हैं। जांच एजेंसी या पुलिस आपको कॉल करके धमकी नहीं देती है। जांच एजेंसी या पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करती है। अगर आपको भी डराने-धमके के लिए इस तरह के कॉल आते हैं तो आप तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें या फिर 1930 नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही सोशल मीडिया साइट एक्स पर साइबर पोस्ट के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यदि कोई मैसेज या ई-मेल आता है तो उसे सबूत के तौर पर पुलिस को दें। यदि किसी कारण आपने कॉल रिसीव कर लिया और आपको वीडियो कॉल पर कोई धमकी देने लगा तो स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिए वीडियो कॉल को रिकॉर्ड करें और शिकायत करें। किसी भी कीमत पर डरें नहीं और पैसे बिलकुल भी ना भेजें।

अगर कोई आपको झांसे में लेने का प्रयास करे तो उसके नंबर को तत्काल ब्लॉक कर दें। अगर आपको कोई संशय हो तो पुलिस विभाग की वेबसाइट पर तमाम जानकारी और उसके अफसरों के नंबर रहते हैं। आप उनसे भी जानकारी ले सकते हैं। एफआईआर की धमकी देने वाले को नजरअंदाज करें।

इसके अलावा आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। किसी के साथ अपनी निजी जानकारियां जैसे कि आधार कार्ड, पैन कार्ड या फिर अन्य बैंकिंग डिटेल्स शेयर न करें। कोई भी बैंक या फिर सरकारी-गैर सरकारी संस्थान आपसे पिन, ओटीपी आदि की जानकारी नहीं पूछता है। ऐसे में आपको किसी के साथ अपनी निजी जानकारियां गलती से भी शेयर नहीं करनी चाहिए। साथ ही अपने सोशल मीडिया और बैंक अकाउंट आदि के पासवर्ड को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए, ताकि आप आॅनलाइन फ्रॉड से बच सकें।

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