- 40 घंटे बाद भी हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं, अफसरों पर गुमराह करने का आरोप
- परिजनों का थाने पर हंगामा एसपी इंटेलीजेंस ने मृतक के पिता से ली जानकारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: परीक्षितगढ़ के अमरसिंहपुर में प्रियांशु की मौत मामले में पुलिस ने हत्या की धारा में लिखापढ़ी से साफ इंकार कर दिया है, इसी के चलते 40 घंटे बीतने के बाद भी वारदात का मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सका है। मृतक के पिता का आरोप है कि पुलिस आत्महत्या की तहरीर पर अड़ी हुई है, जबकि प्रियांशु की गोली मारकर हत्या की गई है। जिनको नामजद करते हुए तहरीर दी गयी है, वो गांव के जिन सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए हैं उनकी डीवीआर पुलिस के कब्जे में है। परिजनों ने आशंका व्यक्त की है कि डीवीआर में कैद सबूत नष्ट किया जा सकता है।
वहीं, दूसरी ओर तहरीर में दिए गए जिनके नाम दिए गए हैं। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार शाम को मृतक के परिजनों ने थाना परीक्षितगढ़ पर पहुंचकर हंगामा किया। पीड़ित परिवार की ओर से मामले में पैरवी कर रहे एडवोकेट वीरेन्द्र वर्मा काजीपुर ने बताया कि परिजन जब तक थाने पर रहे तब तक एसओ परीक्षितगढ़ वहां नहीं आए। उन्होंने आईओ पर टाल दिया। मृतक के पिता संजीव के हवाले से एडवोकेट वीरेन्द्र वर्मा ने बताया कि दरअसल इस मामले में एसओ परीक्षितगढ़ आलाधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि मंगलवार को एसपी इंटेलीजेंस क्राइम के यहां से मृतक के पिता के पास एसआई समर चौधरी की काल आयी थी। उन्होंने मामले की जानकारी ली और पूछा कि वारदात की तहरीर अभी तक क्यों नहीं दी गयी है। उन्हें बताया गया कि एसओ को सोमवार सुबह आठ बजे दो को नामजद करते हुए तहरीर दे दी गयी है, लेकिन एसओ आत्महत्या की तहरीर मांग रहे हैं। संजीव का कहना है कि योगी पुलिस गरीबों की नहीं सुन रही है।
आरोपियों की पैरवी में उतरी पुलिस
प्रियांशु के परिजन जिन दो सगे भाइयों पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। परीक्षितगढ़ पुलिस उनकी खुली पैरवी में उतर आयी है। परिजनों का दावा है कि हत्या की वारदात के बाद दोनों युवक गांव में ही देखे गए। कई लोगों ने उन्हें गांव में देखा। उनमें से एक अपनी पत्नी को गांव से बाइक पर बैठाकर अन्यत्र जाते हुए देखा गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली फोरेंसिक जांच का इंतजार
एडवोकेट वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि प्रियांशु की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गयी है। उसमें चोट व हड्डियां टूटने की बात कही गयी है, लेकिन इसको ना काफी बताते हुए अब एसओ परीक्षितगढ़ फोरेंसिक रिपोर्ट के इंतजार की बात कह रहे हैं।
हत्या का मुकदमा, फिर भी गिरफ्तारी से परहेज
छात्र गगन हत्या कांड में आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मेडिकल पुलिस गिरफ्तारी से भाग रही है। वहीं, दूसरी ओर मामले में मेडिकल पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पीड़ित के परिजन मंगलवार को एसएसपी से मिले और आईओ बदलने जाने की मांग की। भावनपुर थाना क्षेत्र में 24 मई की शाम एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गयी थी। वारदात के वक्त छात्र के दो दोस्त भी साथ मौजूद थे, जिनके विरुद्ध बाद में परिजनों ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मंगलवार को परिवार को लेकर मुकदमे की विवेचना के संबंध में एसएसपी से मिले और विवेचना अधिकारी बदलने की मांग की। एसएसपी ने फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देकर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
मेडिकल थाना क्षेत्र की सांई नगर कालोनी में देवेंद्र तेवतिया अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह सीसीएसयू में जॉब करते हैं। 24 मई की सुबह उनका बेटा गगन हर रोज की तरह कॉलेज जाने के लिए घर से निकला। शाम को परिजनों को उसके दोस्त ने सूचना दी कि गगन ने खुद को गोली मार ली है। आनन-फानन में परिजन मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक गगन की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मामले को आत्महत्या करार दिया। कई दिन परिवार ने विरोध जताया, जिसके बाद गगन की मौत के वक्त मौके पर मौजूद रहे दो युवकों के खिलाफ धारा 302 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। इस मुकदमे को काफी समय बीत चुका है लेकिन पुलिस किसी नतीजे पर पहुंचती दिखाई नहीं दे रही है।
ऐसे में परिवार के सब्र का बांध टूटता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को पिता देवेंद्र तेवतिया परिवार के कुछ लोगों के साथ एसएसपी रोहित सिंह सजवाण से मिले। उन्होंने कहा कि जिस तरह का विवेचक का व्यवहार है, उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। वह चाहते हैं कि इस जांच को किसी अन्य सर्किल या फिर दूसरे जिले की पुलिस से जांच कराई जाए। एसएसपी ने एसओ मेडिकल से बात की तो उन्होंने बताया कि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। एसएसपी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि उन्हें फोरेंसिक रिपोर्ट आने का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो वह जांच भी दूसरे थाने को ट्रांसफर कर देंगे।

