Wednesday, February 28, 2024
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…लो अब कोरोना ने बदल दिया शादियों में ‘नौतने’ का अंदाज

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कोरोना काल के बाद और सोशल मीडिया के युग में शादी कार्ड्स की बिक्री पर पड़ा असर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: ‘छप गए हैं कार्ड आज लाडो तेरी शादी के, बंट रहे हैं कार्ड रे आज लाडो तेरी शादी के’। शादियों में दावत के लिए नौतने को कार्ड्स शादी समारोह का वैसे तो सबसे अहम हिस्सा होते हैं लेकिन कोरोनाकाल के बाद एवं सोशल मीडिया के इस दौर में आधुनिकता की छाप न्योता देने अथवा नौतने पर भी पड़ चुकी है। भागदौड़ वाली इस जिन्दगी में समय की बचत सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

शादी समारोह के लिए बांटे जाने वाले इंविटेशन कार्ड्स की महत्ता को हांलाकि नकारा नहीं जा सकता। कार्ड्स न पहुंचने पर किसी भी परिचित के रुठ जाने के डर से ज्यादातर लोग कार्ड्स अथवा इंविटेशन पर खास फोकस करते हैं। हालांकि मेरठ से लेकर दिल्ली तक शादी कार्ड्स का थोक कारोबार करने वाले व्यापारियों की बातोें पर अगर विश्वास करें तो एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आता है।

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इन व्यापारियों के अनुसार अगर कोरोना काल के बाद की स्थिति देखें तो शादी काडर््स का कारोबार लगभग 20 प्रतिशत तक घट गया है। बुढ़ाना गेट के कार्ड कारोबारी शरद रस्तोगी के अनुसार कोरोनाकाल के बाद उनके कारोबार पर अच्छा खासा असर पड़ा है। वो कहते हैं कि जहां कोरोना से पूर्व छोटे से छोटे फंक्शन के लिए भी लोग कार्ड्स बांटते थे वहीं अब यह दायरा काफी हद तक सिमट कर सिर्फ शादियों के इर्द गिर्द रह गया है।

दिल्ली के कार्ड कारोबारी विनीत कुमार तो यहां तक बताते हैं कि अब शादियों में भी कार्ड का कारोबार 80 फीसदी तक रह गया है। एक अन्य कार्ड कारोबारी साबिर कहते हैं कि कोरोनाकाल में मुस्लिम परिवारों में हजारों दहेज विहीन शादियां हुई जिसमें कार्ड बांटने अथवा न्योता देना का रिवाज काफी हद तक कम रहा। साबिर के अनुसार कोरोनाकाल वाला यह सिलसिला काफी हद तक कोरोनाकाल के बाद भी जारी रहा।

वाट्सएप बना पसंदीदा माध्यम

कार्ड कारोबारी बताते हैं कि अब कई लोग शादियों में अपने परिचितों को नौतने के लिए जहां कार्ड के इस्तेमाल के अलावा वाट्सएप और वीडियो कॉल को खास तरजीह दे रहे हैं। इन कारोबारियों के अनुसार कई बार लोग एक कार्ड का खूबसूरत डिजाइन तैयार करवा कर अपने परिचितों को वाट्सएप कर देते हैं या फिर वीडियो कॉल कर न्योता दे रहे हैं। कार्ड कारोबारियों के अनुसार हांलाकि यह परम्परा कार्ड कारोबारियों के लिए जरुर घाटे का सौदा है लेकिन इससे लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

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