Saturday, June 22, 2024
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अब व्यावसायिक रूप से दक्ष बनेंगे माध्यमिक के छात्र

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  • कक्षा 9 से लागू होगा पाठ्यक्रम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को व्यवसाय और स्वरोजगार में दक्ष बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम लागू किया जाएगा। शैक्षिक सत्र 2022-23 से कक्षा 9 से इसकी शुरुआत कर चरणबद्ध तरीके से कक्षा 12 तक लागू किया जाएगा। वर्ष 2024-25 तक माध्यमिक के 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा।

व्यावसायिक शिक्षा में सेवा,निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस करते हुए बच्चों को प्रशिक्षण के लिए आईटीआई, पॉलीटेकिभनक सहित अन्य संस्थानों के प्रशिक्षक तैनात किए जाएंगे। वहीं, बच्चों के लिए इंटर्नशिप और साल में दो से तीन बार कॅरिअर काउंसिलिंग की भी व्यवस्था की जाएगी।

पहले चरण में राजकीय विद्यालयों के साथ उन माध्यमिक विद्यालयों को शामिल किया जाएगा, जहां पहले से व्यावसायिक शिक्षा संचालित है और संसाधन उपलब्ध हैं।

जिला स्तर पर विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के लिए सत्र 2021-22 से सर्वे किया जाएगा। स्थानीय मांग और आवश्यकता के अनुसार विद्यालयों में ट्रेड्स का निर्धारण किया जाएगा। ट्रेड्स का चयन सर्वे, रोजगार कार्यालय और स्थानीय इंडस्ट्री से प्राप्त सूचना का विश्लेषण करने के बाद किया जाएगा।

व्यावसायिक शिक्षा को व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सामान्य शिक्षा और सामान्य शैक्षिक संस्थानों में व्यावसायिक प्रशिक्षण का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि बच्चों में रोजगार के लिए आवश्यक न्यूनतम दक्षता विकसित हो।

सेवा निर्माण और कृषि सेक्टर पर होगा फोकस

विद्यालयों में ट्रेड्स के निर्धारण में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग नहीं हैं,वहां कृषि से संबंधित ट्रेड्स को प्रमुखता से लागू किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा के लिए स्थानीय पॉलीटेकिभनक, आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, किसान सेवा केंद्र, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, स्किल इंडिया मिशन, यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के साथ चिकित्सा, पशुपालन, कृषि और फलोत्पादन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।

व्यावसायिक शिक्षा को नए रूप में लागू करने के लिए विद्यार्थियों को भाषा की दक्षता, उद्यमिता का ज्ञान और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की जानकारी भी दी जाएगी।

विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी भाषा के प्रयोग में दक्ष बनाया जाएगा। कक्षा 6 से 8 तक में व्यावसायिक शिक्षा में समाजोपयोगी उत्पादन कार्य, कार्यानुभव के प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को हस्तकौशल और कार्यानुभव के प्रति जागरूक किया जाएगा।

सेवाए निर्माण और कृषि सेक्टर पर होगा फोकस
विद्यालयों में ट्रेड्स के निर्धारण में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग नहीं हैं, वहां कृषि से संबंधित ट्रेड्स को प्रमुखता से लागू किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा के लिए स्थानीय  पॉलीटेक्निक , आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, किसान सेवा केंद्र, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, स्किल इंडिया मिशन, यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के साथ चिकित्सा, पशुपालन, कृषि और फलोत्पादन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा को नए रूप में लागू करने के लिए विद्यार्थियों को भाषा की दक्षता, उद्यमिता का ज्ञान और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की जानकारी भी दी जाएगी। विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी भाषा के प्रयोग में दक्ष बनाया जाएगा। कक्षा 6 से 8 तक में व्यावसायिक शिक्षा में समाजोपयोगी उत्पादन कार्य, कार्यानुभव के प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को हस्तकौशल और कार्यानुभव के प्रति जागरूक किया जाएगा।

 

कॅरिअर काउंसिलिंग भी होगी
रोजगार कौशल बढ़ाने के लिए अध्यापकों और अभिभावकों की मौजूदगी में छात्रों की कॅरिअर काउंसिलिंग की जाएगी। माध्यमिक के सभी स्कूलों में बच्चों के कौशल की पहचान और मार्गदर्शन के लिए काउंसलर की व्यवस्था की जाएगी।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत व्यावसायिक शिक्षा के प्रति रुचि पैदा करने के लिए प्रत्येक शैक्षिक सत्र में दो से तीन बार काउंसिलिंग की जाएगी। काउंसिलिंग में प्रतिभावान बच्चों की पहचान कर उन्हें उनकी रुचि और कौशल क्षमता के आधार पर प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।

 

व्यावसायिक ट्रेडों का विकल्प दिया जाएगा
प्रत्येक माध्यमिक विद्यालय में कम से कम चार व्यावसायिक ट्रेडों का विकल्प दिया जाएगा। इनमें से एक ट्रेड ओडीओपी से संबंधित होगा। कक्षा 9 एवं 10 में दो व्यावसायिक ट्रेड्स और कक्षा 11 एवं 12 में एक व्यावसायिक ट्रेड को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

 

मूल्यांकन भी प्रभावी होगा
नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के आधार पर राष्ट्रीय मानकों में संबंधित क्षेत्र की दक्षता प्राप्ति और प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से तैयार किया जाएगा। मूल्यांकन के 50 प्रतिशत अंक सैद्धांतिक और 50 प्रतिशत अंक प्रायोगिक कार्य के आधार पर दिए जाएंगे। कक्षा 10 एवं 12 की बोर्ड परीक्षा में सामान्य विषयों में किसी विषय विशेष में अनुत्तीर्ण होने पर उसे व्यावसायिक शिक्षा के परिणाम से परिवर्तित किया जाएगा।

 

पार्टटाइम प्रशिक्षकों की व्यवस्था होगी
व्यावसायिक शिक्षा के लिए शुरुआती दौर में पार्टटाइम प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। 2024-25 से पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। आईटीआई, पॉलीटेकिभनक, विभिन्न ट्रेड से संबंधित कारखानों के प्रशिक्षकों और अनुभवी कर्मचारियों को भी प्रशिक्षक नियुक्त किया जाएगा। माध्यमिक के विज्ञान, जीव विज्ञान, शारीरिक शिक्षा और कृषि विज्ञान के अध्यापकों को प्रशिक्षित कर व्यावसायिक शिक्षा का पठन-पाठन कराया जाएगा।

 

फील्ड में ट्रेनिंग की व्यवस्था भी होगी
विद्यार्थियों को कौशल विकास एवं दक्षता के लिए प्रशिक्षण के दौरान फील्ड में ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाएगी। अप्रेंटिस ट्रेनिंग का लाभ प्रशिक्षण के बाद भी उपलब्ध कराया जाएगा। 2022-23 से राजकीय विद्यालयों में कक्षा 9 और 11 में 10 दिन इंटर्नशिप कार्यक्रम लागू किया जाएगा। उसके बाद सभी विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। अच्छी इंटर्नशिप के लिए वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), अटल इनोवेशन मिशन, किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीआई), आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेजों, साइंस एंड टेक्नोलॉजी लैब से भी समन्वय किया जाएगा। उच्च शिक्षा संस्थानों में स्नातक और परास्नातक स्तर पर विभिन्न व्यवसायों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इससे व्यावसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में डिप्लोमा और डिग्री प्राप्त करने के पर्याप्त अवसर प्राप्त होंगे।

 

प्रतिभाओं को मिलेगा प्रोत्साहन
विशेष प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें विशेष तकनीकी और अन्य सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। पर्याप्त संवर्धन एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा ताकि बच्चे अपनी रुचि के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें। बच्चों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल कराकर उनकी सफलता के लिए मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। 2021-22 से ऐसे बच्चों की पहचान कर कार्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। 2022-23 से सभी विद्यालयों व सभी कक्षाओं में लागू किया जाएगा।

 

विशिष्ट बच्चों की पहचान की जाएगी
विशिष्ट बच्चों को उचित शिक्षा, उनकी देखभाल और सहयोग के लिए विद्यालय से आंकड़े प्राप्त कर जिला स्तर पर डाटा संकलित किया जाएगा। ऐसे विद्यार्थियों के लिए डिजिटल तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएगा। उन्हें विद्यालय स्तर पर कंप्यूटर लैब में प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही सभी सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। बच्चों को स्वावलंबी बनाया जाएगा।

 

माह में दो बार होगा हेल्थ चेकअप
प्रत्येक विद्यालय में बच्चों का महीने में दो बार स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा और हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा। 2021-22 से इस व्यवस्था को शुरू किया जाएगा और 2022-23 से चरणबद्ध लागू किया जाएगा। सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूहों के बच्चों को लिए स्कूली शिक्षा के दायरे को व्यापक बनाया जाएगा।

 

ओलंपियाड के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा
विभिन्न विषयों के ओलंपियाड में भाग लेने के लिए बच्चों को प्रेरित किया जाएगा। विद्यालय स्तर पर इसकी तैयारी की जाएगी।  जिला और प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। 2021-22 से पहले चरण में इसे राजकीय विद्यालयों में लागू किया जाएगा।

 

विषय आधारित क्लब और सर्किल बनाए जाएंगे
प्रत्येक स्कूल में विषय व प्रोजेक्ट आधारित क्लब और सर्किल का गठन किया जाएगा। साइंस सर्किल, मैथ सर्किल, म्यूजिक सर्किल, ड्रामा सर्किल, स्पोर्ट्स सर्किल, इको  क्लब, योग क्लब की स्थापना कर विद्यालय और संकुल स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यालय स्तर पर हर तिमाही में सृजनात्मक सत्र आयोजित कर प्रखरबुद्धि के बच्चों की पहचान की जाएगी। विद्यार्थियों के लिए यूनिवर्सिटी रेडी कार्यक्त्रस्म को 2021-22 से राजकीय विद्यालयों में लागू किया जाएगा।

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