Thursday, February 25, 2021
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सरकारी संपत्ति की लूट पर अफसर चुप

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  • लूट ही नहीं बंगलों के व्यावसायिक प्रयोग सेना के लिए भी बनेंगे खतरनाक

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: छावनी क्षेत्र में सरकारी संपत्ति की लूट पर बजाए कठोर कार्रवाई के कैंट के अफसरों ने हाथ बांध लिए हैं। पेन जेब में रख लिया है। चारों ओर सरकारी संपत्ति की लूट मची है। वेस्ट एंड रोड स्थित ऐतिहासिक महत्व के कैसल व्यू को बार-बार खुर्दबुर्द किए जाने पर भी अफसर चुप क्यों हैं।

सबसे हैरानी भरी चुप्पी रेवेन्यू सेक्शन पर काविज मठाधीशों पर है। इस बंगले पर लाखों का टैक्स बकाया है। इसकी जानकारी सीईओ व डीईओ सरीखे अफसरों को दी गयी है या नहीं। यदि रेवेन्यू सेक्शन ने लाखों के बकाय टैक्स की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी तो किस के इशारे पर ऐसा किया गया या फिर निजी हितों के चलते रेवेन्यू सेक्शन के कर्ताधर्ता टैक्स के बकाए की फाइल पर कुंडली मारे बैठे रहे।

मरम्मत के नाम पर कार्रवाई से कन्नी काटने की कोशिश

मुस्तफा महल, उर्फ कैसल व्यू उर्फ ग्रांड कैसल व्यू और आने वाले दिनों में न जाने अभी कितने अन्य नामकरण इस बेशकीमती प्राचीन ऐतिहासिक इमारत के किए जाने हैं। जीएलआर की यदि बात की जाए तो इस बंगले के मालिकाना हक के तौर पर अशफाक जमानी बेगम व रिश्ते में उनके नाती बताए जाने वाले अमीर जावेद खां व इकबाल खां के नाम दर्ज हैं। फिर सवाल उठता कि जब जीएलआर में जिनके नाम दर्ज हैं तो क्या कार्रवाई इस संबंध में की गयी।

चेंज आफ परपज के कुसूरवारों पर चुप्पी

आवासीय बंगला और उसमें विवाह मंडप की तैयारी कैंट अफसरों को भले नहीं दिखाई दे रही हो, लेकिन इससे सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। चेंज आफ परपज सरीखे गंभीर मामले में क्या कार्रवाई की गयी है, कैंट अफसरों की ओर से इसके जवाब का इंतजार है। वो लोग कौन है जो सेना की अवासीय कालोनी से सटे मल्होत्रा के इस बंगले में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर रहे हैं।

क्या इसकी अनुमति सब एरिया हेड क्वार्टर से ली गयी हैं। यदि अनुमति ली गयी है तो फिर सेना के कौन वो अफसर हैं जिन्होंने मल्होत्रा एन्क्लेव में रहने वाले फौजी अफसरों के परिवार की सुरक्षा से समझौता कर लिया है। हालांकि इसको लेकर जनवाणी की ओर कोई दावा नहीं किया जा रहा है। हमारा मकसर सिर्फ ओल्ड ग्रांट के बंगलों को लेकर जिस प्रकार से खुर्दबुर्द किए जाने का खेल खेला जा रहा है उसकी सच्चाई मेरठ में तैनात फौज के सर्वोच्च अफसरों के समक्ष लाने का प्रयास भर है।

बड़ा सवाल यही है कि रेवेन्यू सेक्शन ने क्यों नहीं इस बंगले पर बकाए टैक्स की जानकारी कैंट बोर्ड के अध्यक्ष व नवागत सीईओ को दी। उल्लेखीय है कि इन दिनों रेवेन्यू सेक्शन हेड की सुप्रीमो भले ही किरण बाला हों, लेकिन होता वही है जो हितेश चाहते हैं। हितेश की ओर से यदि इस संबंध में कोई जानकारी दी जाती है तो जनवाणी उसको भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

बंगले में धंधे की तैयारी का गुनाहगार कौन

सवाल उठता है कि ओल्ड ग्रांट के मुस्ताफ महल उर्फ कैसल व्यू में तमाम कायदे कानून ताक पर रखकर जिस प्रकार से व्यावसायिक गतिविधियां शुरू किए जाने की तैयारियां हैं उसका गुनाहगार कौन है। डीईओ, या फिर कैंट बोर्ड अध्यक्ष या निवर्तमान सीईओ अथवा कैंट बोर्ड का रेवेन्यू सेक्शन जो बजाए टैक्स वसूली के फाइल पर कुंडली मारे बैठा है या फिर सेनेट्री को वो फिल्ड स्टाफ जिसको इंजीनियरिंग सेक्शन को रिपोर्ट करनी थी। या फिर यह मान लिया जाए कि हमाम में सभी नंगे नजर आते हैं। किसी को भी इस बात की परवाह नहीं कि दोनों हाथों से सरकारी संपत्ति लूटी जा रही है।

ओएस कैंट बोर्ड काटते हैं कन्नी

इस संबंध में जब कैंट बोर्ड कार्यालय अधीक्षक जयपाल तोमर की मार्फत सीईओ का पक्ष जानने का प्रयास किया तो कई बार काल किए जाने के बाद भी बात नहीं हो सकी।

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