Saturday, June 15, 2024
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ऑनलाइन गेम्स: कुछ फायदे, कुछ नुकसान

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पेरेंट्स के बीच यह एक डिबेट का टॉपिक है कि ऑनलाइन गेमिंग एक ऐसी एक्टिविटी है जिसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए या नहीं। कई प्रोफेशनल रिसर्चर ने यह अध्ययन करने की कोशिश की है कि बच्चों और बड़ों के विकास पर वीडियो गेम का क्या प्रभाव होता है। हर किसी वीडियो और ऑनलाइन गेम्स का अलग-अलग टारगेट होता है। कुछ गेम्स मनोरंजन के उद्देश्य से बनाए जाते हैं जबकि कुछ रिलैक्सेशन के लिए, वहीं कुछ गेम्स स्टिमुलेटिंग होते हैं और कुछ लर्निंग और ब्रेन डेवलपमेंट के लिए अच्छे होते हैं। हालांकि, सभी गेम बच्चों के लिए अच्छे नहीं होते हैं और उनके विकास पर इन गेम्स के बुरे प्रभाव हो सकते हैं।

अध्ययनों ने साबित किया है कि वीडियो गेम खेलने से प्लेयर के रेस्पांस सिस्टम और रिफ्लेक्स में सुधार होता है। अध्ययनों ने यह भी साबित किया है कि जो लोग नियमित रूप से ऑनलाइन गेम खेलते हैं, उनके ब्रेन की एक्टिविटी में भी सुधार होता है। ऑनलाइन गेम खेलते वक्त खिलाड़ी को कम समय में क्विक फैसले लेने होते हैं जो प्लेयर्स को तेजी से डिसीजन लेने और उन्हें एक कदम आगे रहने के लिए ट्रेन करता है।

टीम में काम करना सिखाता है

ऑनलाइन गेमिंग लोगों को यह सिखाती है कि एक टीम और एक यूनिट की तरह काम करना कितना जरूरी है। आजकल अधिकतर गेम्स में एक से ज्यादा प्लेयर्स की जरूरत होती है जिसमें दुनिया भर से लोग खेलते हैं। इसके चलते, ऑनलाइन वीडियो गेम्स खेलते वक्त लोगों को एक-दूसरे के साथ यूनिटी बनानी होती है जिससे उन्हें एक साथ और एक टीम की तरह काम करने की स्किल्स सीखने में मदद मिलती है।

कॉग्निटिव फंक्शन को बेहतर करता है

जब हम किसी स्किल को बार-बार दोहराते हैं तो ब्रेन एक स्ट्रक्चर डेवलप कर लेता है और अपने फंक्शन को सही तरीके से पूरा करने के लिए नए न्यूरल पाथवेज और ट्रांसमीटर बनाता है। गेमर्स को मल्टीटास्किंग करने के लिए लगातार स्क्रीन, अपने हाथों और आंखों के बीच कोर्डिनेशन बनाने की जरूरत होती है।

ऑनलाइन गेम्स बच्चों को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं

सामान्य परेशानियां: लोग अक्सर वीडियो गेम में इतने फंस जाते हैं कि उन्हें एहसास ही नहीं होता कि वे अपनी लाइफ में और क्या-क्या मिस कर रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि आप बच्चों के लिए एक बाउंड्री सेट करें कि उन्हें कितने समय के लिए गेम खेलना हैं और बाकी समय में क्या काम करना हैं।

स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव: जो लोग, विशेष तौर पर बच्चे ऑनलाइन गेम खेलने के लिए पूरा समय स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं, वो अपना ज्यादातर समय घर के अंदर ही बिताते हैं और बाहर खेलने नहीं जाते। इस आदत को लगातार फॉलो करने के कारण बच्चों में कई स्वास्थ्य समस्याएं जैसे पोस्चर खराब होना, विजन लॉस और यहां तक कि ब्रेन डैमेज होने का भी खतरा रहता है।

सोशल आइसोलेशन: कई बार बच्चे ऑनलाइन गेमिंग से इतना लीन हो जाते हैं कि वो अपने परिवार और पेरेंट्स से दूर होते चले जाते हैं। इस कारण वो खुद को सोशली बेहद आइसोलेट कर लेते हैं और पेरेंट्स के कितना ही कोशिश करने के बाद भी उनके लिए सोशलाइज करना मुश्किल होता है। इसके अलावा, बच्चे घरेलू कामों, आउटडोर गेम्स और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने में दिलचस्पी भी खत्म हो जाती है।

सीरीयस हेल्थ कंडीशन: वीडियो गेम्स की लत लग जाने के कारण वीडियो गेमिंग के बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो सकते हैं। हार्ट अटैक, मोटापा, अवसाद और लत आदि के रिस्क बच्चों में होते हैं। विशेष तौर पर, बच्चों के लिए हेल्थ रिस्क पर मसल्स और स्केलेटल संबंधी डिसआर्डर हो सकते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को सतर्क रहना चाहिए कि उनके बच्चे क्या गेम खेल रहे हैं। युवाओं के बीच वीडियो गेम बहुत पॉपुलर हैं लेकिन इसे क्रिएटिव तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह उनके लिए अच्छा हो सकता है।

समय की अहमियत खो जाती है: ऑनलाइन गेमिंग की आदत होने के कारण गेमर्स अपना अधिकतर समय खराब कर देते हैं और यहां तक कि अपनी नींद पर भी ध्यान नहीं देते है। इसके कारण वे जितनी जरूरत होती है, इतनी नींद भी नहीं ले पाते हैं। 7 घंटे से कम नींद लेना आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। इसके अलावा, आॅनलाइन गेम खेलते वक्त गेमर्स को अपने समय की भी अहमियत नहीं होती।


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