Monday, January 24, 2022
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सिर्फ महायोजना में आउटर रिंग रोड

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आउटर रिंग रोड भी मेरठ विकास प्राधिकरण की महायोजना 2021 में प्लान किया गया था। तब इक्कीसवीं सदी के शहर में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की गई थी। यह योजना फिलहाल सिर्फ कागजों में हैं, धरातल पर कब उतरेगी? यह देखना बाकी है। अब महायोजना 2031 की प्लानिंग की जा रही है, जल्द ही आपको महायोजना 2031 आपके सामने होगी।

इसमें भी बहुत सारे प्लान किये जाएंगे, जो सिर्फ कागजों पर होंगे, धरातल पर योजना कब उतरेगी? यह कहना अभी मुश्किल होगा। क्योंकि वर्तमान में आउटर रिंग रोड भी कागजों में तो मौजूद हैं, मगर धरातल पर आउटर रिंग रोड पर कभी काम ही नहीं हुआ।

मेरठ दिल्ली एनसीआर का हिस्सा है। इसको देखते हुए ही तमाम प्लान यहां तैयार किये जाते हैं। प्रदूषण हो या फिर ग्रीन बेल्ट का मामला, तमाम मुद्दों को लेकर सुप्रीमकोर्ट की फटकार भी लगती रहती हैं। इसके बाद ही अधिकारियों की नींद टूटती हैं।

अब आउटर रिंग रोड को लेकर जनप्रतिनिधि काम क्यों नहीं कर रहे हैं? यह बड़ा सवाल है। इनर रिंग रोड पर काम चल रहा है तो फिर आउटर रिंग रोड पर क्यों नहीं? ये कहा जा सकता है कि आउटर रिंग रोड की आवश्यकता नहीं  है तो फिर उसका प्लान महायोजना 2021 में एक्सपर्ट ने क्यों किया? इसको लेकर तमाम सरकारी एजेंसियों को स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

आउटर रिंग रोड के निर्माण होने से मेरठ शहर पर बना ट्रैफिक का दबाव तो कम होगा ही, साथ ही एनसीआर में जो दिक्कत ट्रैफिक की बढ़ रही है, उसमें भी राहत मिलेगी। इस बात को एक्सर्ट भी मानते हैं, लेकिन काम कौन करेगा?

जहां आउटर रिंग रोड का प्लान, वहां बन रही कॉलोनी

महायोजना 2021 में सरकारी दस्तावेजों में आउटर रिंग रोड का प्लान किया गया हैं, लेकिन मौके पर अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। जब यहां पर अवैध कॉलोनी काट दी गई तथा वहां पर मकान बनकर तैयार हो जाएंगे तो कैसे जमीन का अधिग्रहण हो पाएगा? भविष्य में ये तमाम मुश्किले सरकारी एजेंसियों के सामने आने वाली हैं, लेकिन फिलहाल आला अफसरों ने आंखें बंद क्यों कर ली है।

फिलहाल इतना तो किया ही जा सकता है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में आउटर रिंग रोड यदि बनती है तो उसमें किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं होगी। इस तरह की अधिकारियों को पहल तो करनी ही होगी, तभी आउटर रिंग रोड का भविष्य भी तय हो सकता है।

जहां बस स्टैंड प्लान किये, वहां अब बिल्डिंग खड़ी है…

बागपत बाइपास स्थित एक बस स्टैॅड मास्टर प्लान 2021 में तैयार किया गया था। वहां पर मकान बनकर तैयार हो गए हैं, जहां बस स्टैंड धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहा है। ये हालत है एमडीए के प्लान की। प्लान सिर्फ कागजों पर बनते हैं, धरातल पर कोई काम नहीं होता। यह उसी का उदाहरण है।

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