जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: एआईएमआईएम अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। ओवैसी ने नियुक्ति प्रक्रिया में प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी शामिल करने की वकालत की।
ओवैसी ने कहा कि जब यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, तभी उन्होंने इसके प्रावधानों को लेकर चिंता जताई थी। उनके मुताबिक, इस कानून से आम जनता के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को सेवानिवृत्ति के बाद कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। ओवैसी ने कहा कि इस कानून को रद्द कर नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया जाना चाहिए।
#WATCH | Lucknow, UP | On INDIA Bloc protest, AIMIM President Asaduddin Owaisi says, “Protests, as even stated by the Supreme Court, are the right of each citizen… I am not linked to the INDIA Bloc… I cannot comment on this; they can carry on with their program…”
He also says, “We are against the provisions of the law for the appointment of the Chief Election Commissioner, and it should be abolished along with SIR. As far as INDIA Bloc wants to go and meet the CJI, how are we part of the executive? We are MPs, MPs. How will we meet the Chief Justice of India?… If we have any complaint, it is against the Prime Minister… Just a few days ago, the Standing Committee of One Nation One Election was trying to meet the Supreme Court, but everyone raised their voice that this would be a violation of the separation of powers. The legislature, executive and the judiciary are separate, so this needs to be taken care of.”
— ANI (@ANI) October 12, 2026
एसआईआर प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी ओवैसी ने सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर यह प्रक्रिया कहां से आई। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के तहत 10 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। इसके बावजूद फॉर्म-6 के जरिए आवेदन करने वालों की मैपिंग पर जोर दिया जा रहा है। ओवैसी ने एसआईआर प्रक्रिया को बंद करने की मांग भी की।
INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन से बनाई दूरी
INDIA ब्लॉक के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर ओवैसी ने कहा कि विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सुप्रीम कोर्ट भी इस अधिकार को मान्यता दे चुका है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने गठबंधन के प्रदर्शन और उसके कार्यक्रम पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
सीजेआई से मुलाकात पर उठाया शक्तियों के बंटवारे का सवाल
INDIA ब्लॉक के नेताओं की भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की पहल पर भी ओवैसी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सांसद होने के नाते वह कार्यपालिका का हिस्सा नहीं हैं और उनकी शिकायत केंद्र सरकार से है। उन्होंने सवाल किया कि सांसद मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कैसे कर सकते हैं?
ओवैसी के इन बयानों के बाद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

