जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की हवा अब सांसों पर बोझ बनती जा रही है। सोमवार की सुबह शहर के कई इलाकों में घनी धुंध और स्मॉग की चादर छाई रही। दृश्यता इतनी कम रही कि सुबह-सुबह दफ्तर और स्कूल जाने वाले लोगों को वाहन चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सोमवार को 390 से 400 के बीच दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब से गंभीर’ श्रेणी में आता है।
राजधानी की हवा में जहर, सांस लेना हुआ मुश्किल
एम्स, आनंद विहार, पंजाबी बाग, द्वारका और आईटीओ जैसे इलाकों में AQI 370 से 420 के बीच पहुंच गया।
एम्स के आसपास: 378
आनंद विहार: 410
आईटीओ: 398
द्वारका सेक्टर-8: 390
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की रफ्तार बेहद कम रहने और तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषक तत्व हवा में घुलने के बजाय जमीन के पास ही ठहर गए हैं, जिससे हवा और अधिक जहरीली बन रही है।
NCR में भी बिगड़ा हाल
नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे इलाकों में भी हालात दिल्ली से बेहतर नहीं हैं।
नोएडा: AQI 392
गुरुग्राम: 381
फरीदाबाद: 399
गाजियाबाद: 403
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि NCR में यह स्थिति स्टबल बर्निंग (पराली जलाने), वाहनों के उत्सर्जन और निर्माण कार्यों की धूल के कारण बनी हुई है।
स्वास्थ्य पर खतरे की घंटी
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इतनी खराब वायु गुणवत्ता से सांस की बीमारियों, एलर्जी, आंखों में जलन और हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
अस्थमा या COPD के मरीजों को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह हवा बेहद खतरनाक है।
सरकार और प्रशासन की सख्ती
दिल्ली सरकार ने स्थिति को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई कदम लागू किए हैं—
निर्माण और धूल फैलाने वाले कार्यों पर प्रतिबंध
डीजल जेनरेटर के उपयोग पर रोक
औद्योगिक क्षेत्रों में उत्सर्जन पर निगरानी
आवश्यक सेवाओं को छोड़कर पुराने वाहनों पर रोक
साथ ही, सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि कारपूलिंग का इस्तेमाल करें, अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचें और मास्क पहनकर ही बाहर निकलें।
राहत की उम्मीद कब?
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों तक हवा की रफ्तार कम बनी रहेगी, जिससे स्थिति में तत्काल सुधार की संभावना कम है। हल्की उत्तर-पश्चिमी हवाएं बुधवार के बाद तेज होने पर ही प्रदूषण में कुछ राहत मिल सकती है।

