Monday, March 23, 2026
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पुलिस ने चाइल्ड केयर से बात करने का लिया फैसला

  • फिलहाल सौतेले सात भाई बहनों के पास है मासूम

ज्ञान प्रकाश |

मेरठ: चरित्रहीनता और अवैध संबंधों के कारण भले ही आबाद और जावेदा की जिंदगी का अंत हो गया हो, लेकिन इनकी मौत ने चार मासूम बच्चों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया है। पहाड़ सी जिंदगी बिना ममता और प्यार के कैसे गुजरेगी इसको लेकर पुलिस मानवीय रूप से परेशान है। हालांकि घर में सात सौतेले भाई और बहन है, लेकिन पुलिस ने चाइल्ड केयर से बात करने का विकल्प खुला रखा हुआ है।

सिटी गार्डन कालोनी में रहने वाले मुर्गी विक्रेता आबाद और उसकी पत्नी जावेदा की गला काट कर हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप जावेदा के कथित भाई और प्रेमी हसीन उर्फ समीर पर लगा था। मृतक की बेटी सानिया ने पुलिस को बताया था कि समीर मामू ने मम्मी का कत्ल किया था। इससे पहले मामू ने दूसरे कमरे में पापा की गर्दन काट कर हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद समीर बजाय मेन गेट से निकलने के मुर्गी रखने वाले जाल के सहारे दीवार फांद कर फरार हो गया था। समीर ने बताया कि उसने तीन दिन पहले छुरा खरीदा था और मारने का मन बना लिया था।

घटना के समय रात में सानिया (9 वर्ष), जावेद (5 वर्ष), सना (4 वर्ष) और 3 साल का बच्चा साजिद भी घर में था। आबाद की पहली पत्नी से सात बच्चे हैं, जो वयस्क हो चुके हैं। जबकि दूसरी पत्नी जावेदा के बच्चे तो मासूम ही है। घटना के पांच दिन बाद तीन साल के साजिद और चार साल की सना की आंखों में आंसू बरकरार है। अब उसकी चिंता करने वाला कोई नहीं है। सानिया थोड़ी बड़ी है, लेकिन इतनी भी नहीं कि वो कुछ सोच सके, लेकिन वक्त ने उसे समय से पहले बड़ा कर दिया है।

मां-बाप की हत्या के बाद पहला सवाल यह उठा कि इन बच्चों को कौन रखेगा। आबाद के घर वाले और पहली पत्नी के सात बच्चों ने पुलिस के सामने हामी भर ली कि चारों बच्चे उनके पास ही रहेंगे, लेकिन पुलिस को इस पर यकीन नहीं लगा। सीओ ब्रहमपुरी ने इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी से बच्चों को सुपुर्दगी में देने के लिये बाल आयोग से बात करने के निर्देश दिये हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सना और साजिद को लेकर है। अब इन बच्चों को सुबह से लेकर रात तक बस दूसरों के रहमोकरम पर रहना पड़ रहा है। कहने को सौतेले भाई है, लेकिन इतने छोटे बच्चों को संभालना भी आसान काम नहीं है।
पूर्व पति की याद में प्रेमी को समीर कहती थी जावेदा

बच्चों से कहा था कि मामू कहकर बुलाया करो

ब्रह्मपुरी के सिटी गार्डन कालोनी में हुए दोहरे हत्याकांड में जेल गए हसीन उर्फ समीर को मृतका जावेदा पति के रूप में देखती थी। पहले पति से तलाक के बाद वो अपने प्रेमी को समीर के नाम से बुलाने लगी थी और बच्चों से कह दिया था कि मामू कहकर बुलाया करो। मुर्गी विक्रेता आबाद और जावेदा की हत्या के आरोप में जेल में बंद हसीन उर्फ समीर का कहना था कि जावेदा का पति से तलाक होने के बाद उसने आबाद से निकाह भले कर लिया था, लेकिन उसकी जेहन में पहला पति समीर ही बसा हुआ था।

जब उसकी जान पहचान समीर से हुई और दोस्ती प्यार में तब्दील हुई तो उसने हसीन को समीर कह कर बुलाना शुरू कर दिया। जावेदा की बड़ी बेटी सानिया के मुताबिक मम्मी उसे कहती थी कि समीर को मामू कहकर बुलाया करो। समीर नाम को लेकर कई बार आबाद ने आपत्ति भी जताई थी, लेकिन हर बार जावेदा उसे रिश्ते का भाई बताकर माहौल को शांत कर देती थी। जब आबाद को इस रिश्ते की सच्चाई पता चली तो घर में कलह शुरु हो गया। ऐसे में आबाद ने बजाय ठोस कदम उठाने के उसने गलत काम में साथ देना शुरू कर दिया।

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