Wednesday, April 29, 2026
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हाल-बेहाल: कहीं किताबें नहीं, कहीं स्टाफ कम

  • बीता आधा सत्र, नहीं पहुंची विद्यालयों में किताबें
  • डीबीटी योजना पर भी उठ रहे सवाल, कैसे सुधरेगी बेसिक स्कूलों की शिक्षा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बेसिक शिक्षा के ज्यादातर स्कूलों मेंं आधा सत्र बीत जाने के बाद भी छात्रों को कोर्स की पूरी किताबे उपलब्ध नहीं हो सकी है। ऐसे मेंं यहां पढ़ने वाले बच्चे किस तरह शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जिन विद्यालयों मेंं कोर्स पहुंच भी गया है तो वहां अभी तक अभ्यास पुस्तिकाएं नहीं है।

विभाग का कहना है शनिवार तक सभी विद्यालयों में कोर्स की पुस्तके भेजी जानी थी, लेकिन अभी इसमें चार-पांच दिनों का समय और लग सकता है। वहीं, इस संबंध मेंं बीएसए कार्यालय मेंं पुस्तकों के इंचार्ज विपिन का कहना है कि पीछे से ही पुस्तके अभी नहीं आई है, 10 सितंबर तक का समय निर्धारित था लेकिन इसमें कुछ और समय लग रहा है। 15 सितंबर तक सभी विद्यालयों में पुस्तके पहुंच जाएंगी। इसको लेकर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।

  • केस-एक

प्राथमिक कन्या विद्यालय मोहनपुरी मेंं कुल 97 छात्र है। इनमें से पहली कक्षा मेंं केवल एक ही पुस्तक कलरव आई है, जबकि दूसरी कक्षा की दोनो पुस्तके आ गई है। तीसरी कक्षा की सभी पुस्तके आ गई है लेकिन अभ्यास पुस्तिका नहीं है। चौथी कक्षा मेंं अंग्रेजी की पुस्तक नहीं आई है। वहीं पांचवीं कक्षा में केवल संस्कृत की ही पुस्तक पहुंची है बाकि किताबे अभी नहीं आई है। दो सहायक अध्यापिकाएं व एक विद्यालय इंचार्ज है। जबकि दो शिक्षामित्र है जो लंबे समय से नहीं आ रही है।

  • केस-दो

प्राथमिक विद्यालय मेंडिकल में केवल दो कमरों मेंं विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। एक कमरे मेंं दो कक्षाएं चलाई जा रही है पहली व दूसरी कक्षा के साथ तीसरी कक्षा के कुछ छात्र पढ़ते है। वहीं दूसरे कमरे में कक्षा चार व पांच के छात्रों को पढ़ाया जाता है और उनके साथ तीसरी कक्षा के भी कुछ छात्रों को बिठाया जाता है।

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यह विद्यालय एकल विद्यालय है ऐसे मेंं यहां केवल एक ही शिक्षिका है जबकि एक शिक्षा मित्र को अटैच किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या कक्षा एक से पांच तक के छात्रों को एक शिक्षक व एक शिक्षा मित्र पढ़ा सकती है। वहीं केवल दो कमरो में ही पांच कक्षाओं को चलाया जा रहा है तो किस तरह की पढ़ाई यहां हो रही होगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

  • केस-तीन

प्राथमिक विद्यालय जयभीम नगर में कुल 122 छात्र है। इनमें से कक्षा एक में 18, दो में 22, तीन में 29, चार में 22 व पांच में 31 छात्र है। कक्षा एक मेंं एक पुस्तक नहीं आई है, कक्षा दो में दो पुस्तके है जो आई है, कक्षा तीन की भी सभी पुस्तके आ गई है, कक्षा चार में भी पुस्तके आ गई है

जबकि कक्षा पांच में दो प्रमुख किताबे नहीं आई है। विद्यालय मेंं एक भी अभ्यास पुस्तिका नहीं आई है। दो शिक्षक व दो ही शिक्षामित्र है जो छात्रों को शिक्षा दे रहे है। अब जबकि आधा सत्र बीत चुका है तो जिन कक्षाओं की किताबे अभीतक नहीं आई है उनमेंं पढ़ने वाले छात्र किस तरह से परिक्षाएं देगे यह सवाल उठ रहा है।

  • केस-चार

प्राथमिक विद्यालय छिलौरा मेंं भी बड़ी संख्या मेंं कक्षा एक से पांचवीं तक की पुस्तकें नहीं आई है। यहां पर शिक्षक पुराने छात्रों से उनकी किताबे लेकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहीं जिन कक्षाओ मेंं पहले से ही किताबे नहीं थी उनमेंं पढ़ने वाले छात्रो को बिना पुस्तकों के ही पढ़ाया जा रहा है।

बच्चो को परीक्षाओं की तैयारी कराई तो जा रही है, लेकिन आधी अधूरी पुस्तकों के साथ। ऐसे भी विद्यालय है जिनमें सभी पुस्तकें पहुंच तो गई है जिनमें प्राथमिक विद्यालय प्रभातनगर, प्राथमिक विद्यालय औरंगशाहपुर डिग्गी जैसे विद्यालय शामिल है, लेकिन इनमें भी वर्कबुक नहीं पहुंची है।

कई विद्यालयो की शिक्षिकाओ ने बताया कि सरकार ने जो डीबीटी योजना चलाई है उसका पूरा लाभ छात्रों को नहीं मिल रहा है। बड़ी संख्या में छात्र बिना स्कूल ड्रैस व बैग के विद्यालय आते है। अभिभावक बच्चो की यूनिफार्म के लिए सरकार द्वारा भेजे जाने वाले पैसे का अपने लिए इस्तेमाल कर रहे है। इसलिए डीबीटी योजना ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रही है।

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