Saturday, May 2, 2026
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अपनी पीठ खुद ही थपथपा दी पीडब्ल्यूडी ने

  • गड्ढा मुक्ति अभियान में पास हुए विभागीय अधिकारी
  • रेंडम सलेक्शन के बाद चयनित हुए इंस्पेक्शन वाले मार्ग
  • पांच मार्गों का निरीक्षण किया लखनऊ से आई टीम ने, मुख्य अभियंता भी रहे साथ

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान की समाप्ति पर गुरुवार को उसकी मॉनिटरिंग की गई। खास बात यह रही कि मॉनिटरिंग भी खुद पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने ही की। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भी कभी इस प्रकार की मॉनिटरिंग की जाती है तो उसमें किसी तीसरी एजेंसी को शामिल किया जाता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ। पीडब्ल्यूडी ने सड़कों के गड्ढे भरे और मॉनिटरिंग भी खुद ही कर ली तो पास होना तो लाजिमी था।

दरअसल, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान की घोषणा की थी तब पीडब्ल्यूडी को पूरे प्रदेश में 59 हजार 572 किलोमीटर सड़कों को गड्ढा मुक्त करना था, लेकिन वह समय सीमा में 46 हजार 684 किलोमीटर सड़कों को ही गड्ढा मुक्त कर पाया। मेरठ क्षेत्र में 2611.94 किलोमीटर सड़कों को गड्ढा मुक्त करना था, लेकिन विभाग निर्धारित समय में 2126.85 किलोमीटर सड़कों के गड्ढे ही भर पाया।

इसके अतिरिक्त अगर नवीनीकरण की बात करें तो प्रदेश भर में 10 हजार 973 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण होना था, यह काम भी पीडब्ल्यूडी समयावधि में पूरा नहीं कर पाया। 12 नवंबर तक वह 4 हजार 596 किलोमीटर सड़कों का ही नवीनीकरण का पाया। इसके अलावा विशेष मरम्मत के तहत प्रदेश भर की 11 हजार 918 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का काम होना था। इसमें भी पीडब्ल्यूडी फिसड्डी साबित हुआ और सिर्फ 6 हजार 142 किलोमीटर सड़कों की ही विशेष मरम्मत हो पाई।

इसके बाद शासन से विभाग को 15 दिनों का अतिरिक्त समय मिल गया। बावजूद इसके पीडब्ल्यूडी ने कागजों में तो सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त कर दिया लेकिन हकीकत इससे अलग थी। इसी हकीकत को जानने के लिए मुख्यालय से एक टीम गुरुवार को मेरठ में गड्ढा मुक्ति अभियान की समीक्षा करने पहुंची। सूत्रों के अनुसार लखनऊ से मुख्य अभियंता एम आसिफ के साथ मेरठ के मुख्य अभियंता राजीव कुमार ने गड्ढा मुक्त अभियान की समीक्षा की।

इनके साथ अधिशासी अभियंता एसके सारस्वत और अभियंता महेश बालियान भी साथ थे, टीम में कुछ और अधिकारी भी शामिल थे। जग जाहिर है कि जब कोई अपने काम की खुद समीक्षा करता है तो कमियां नहीं निकाली जाती बल्कि उन पर पर्दा डाला जाता है। मेरठ में सड़कों की हालत से सभी वाकिफ हैं, इसके बावजूद मॉनिटरिंग में कोई कमी नहीं निकलना अपने आप में सवाल खड़े कर रहा है।

मेरठ में इन मार्गों की हुई मॉनिटरिंग

दौराला-बरनावा मार्ग, मेरठ-बड़ौत मार्ग, मेरठ-आसिफाबाद मार्ग, मुबारिकपुर-मानपुर मार्ग, बिजौली संपर्क मार्ग।

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