जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारत और वेस्टइंडीज के बीच रांची में खेले गए टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को छह विकेट से हार का सामना करना पड़ा। मैच में भारतीय बल्लेबाजी के दौरान शिवम दुबे को श्रेयस अय्यर से पहले बल्लेबाजी के लिए भेजने के फैसले पर सवाल उठे। इस फैसले को लेकर मुख्य कोच गौतम गंभीर की आलोचना भी हुई। हालांकि, मैच के बाद गंभीर ने टीम के बल्लेबाजी क्रम में बदलाव का बचाव करते हुए कहा कि टी20 क्रिकेट में ओपनर्स के अलावा किसी भी बल्लेबाज का स्थान तय नहीं होता।
शिवम दुबे को पहले भेजने पर उठे सवाल
भारतीय पारी के 11.1 ओवर में टीम का स्कोर 139 रन था, जब शिवम दुबे को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। उस समय श्रेयस अय्यर बल्लेबाजी के लिए तैयार थे, लेकिन टीम प्रबंधन ने दुबे को पहले मौका दिया। दुबे इस अवसर का फायदा नहीं उठा सके और 10 गेंदों पर सात रन बनाकर आउट हो गए।
इसके बाद श्रेयस अय्यर ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 18 गेंदों पर 40 रन बनाए। ऐसे में दुबे को पहले भेजने के फैसले पर सवाल उठने लगे। आलोचकों का मानना था कि अय्यर को पहले भेजा जाता तो भारतीय पारी को और मजबूती मिल सकती थी।
गंभीर ने किया बल्लेबाजी क्रम में बदलाव का बचाव
मैच के बाद गौतम गंभीर ने शिवम दुबे को पहले भेजने के फैसले पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हमने शिवम का इस्तेमाल लंबे समय से इसी तरह किया है। विश्व कप में भी और उससे पहले भी ऐसा हुआ है। यह सिर्फ एक बार की बात नहीं है।” गंभीर ने आगे कहा कि मैच में टीम ने अपनी लय खो दी थी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कभी फैसले उम्मीद के मुताबिक परिणाम देते हैं, तो कभी नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय टीम बल्लेबाजी क्रम में लचीलापन बनाए रखेगी।
उनके मुताबिक, टी20 क्रिकेट में केवल सलामी बल्लेबाजों की जगह तय होती है, जबकि बाकी बल्लेबाजों को परिस्थितियों और टीम की जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्रम पर भेजा जा सकता है।
गेंदबाजों के लिए बेहतर मुकाबले की जरूरत
गौतम गंभीर ने मैच के दौरान गेंदबाजों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि टीम हार को हल्के में नहीं लेती और लगातार सुधार करने की कोशिश करती है। गंभीर ने वेस्टइंडीज की जीत का श्रेय भी दिया।
उन्होंने कहा कि ओस और सपाट पिचों पर गेंदबाजी करना मुश्किल होता है। ऐसे हालात में गेंदबाजों के लिए बल्लेबाजों को चुनौती देना कठिन हो जाता है। गंभीर ने जोर देते हुए कहा कि क्रिकेट में बल्ले और गेंद के बीच बराबरी का मुकाबला होना चाहिए, ताकि गेंदबाजों को भी अपनी क्षमता दिखाने का उचित अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि भारतीय गेंदबाजों ने टीम में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है और उनके करियर को ध्यान में रखते हुए परिस्थितियों पर भी विचार करना जरूरी है।
मयंक यादव की तेज गेंदबाजी से प्रभावित हुए गंभीर
भारतीय कोच ने युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव की भी तारीफ की। गंभीर ने कहा कि मयंक एक तेज गेंदबाज हैं और उन्हें अपनी ताकत के मुताबिक गेंदबाजी करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई गेंदबाज 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर सकता है, तो उसे ऐसा करना चाहिए। वहीं, गेंदबाजी की गति से ज्यादा जरूरी अपनी भूमिका को समझना और उसके मुताबिक प्रदर्शन करना है। गंभीर के मुताबिक, तेज गेंदबाज के तौर पर खेलते समय तेजी से गेंदबाजी करना खिलाड़ी की जिम्मेदारी है और मयंक ने ऐसा करके सफलता हासिल की।
भारत ने बनाए 249 रन, वेस्टइंडीज ने लक्ष्य हासिल किया
मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 249 रन बनाए। संजू सैमसन ने 82 रन, ईशान किशन ने 43 रन, श्रेयस अय्यर ने 40 रन और तिलक वर्मा ने नाबाद 44 रन की पारी खेली।
250 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने आक्रामक बल्लेबाजी की। कप्तान शाई होप ने 45 गेंदों पर नौ छक्कों और छह चौकों की मदद से 102 रन बनाए। वहीं, शरफेन रदरफोर्ड ने 37 गेंदों पर सात छक्कों और सात चौकों की मदद से 84 रन की शानदार पारी खेली।
दोनों बल्लेबाजों की पारियों के दम पर वेस्टइंडीज ने 18.3 ओवर में चार विकेट खोकर 252 रन बना लिए और मुकाबला छह विकेट से जीत लिया। इस हार के बाद भारतीय टीम के बल्लेबाजी क्रम और गेंदबाजी रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, गौतम गंभीर ने साफ किया कि टीम परिस्थितियों के अनुसार प्रयोग जारी रखेगी और अपने प्रदर्शन में सुधार करने पर ध्यान देगी।

