जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। यह हमला अमेरिकी संघीय अदालत द्वारा अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ कुछ आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के बाद सामने आया।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिकी अदालत के फैसले से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं अधिक है। राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा, “एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया। भारत इसकी बहुत बड़ी कीमत चुका रहा है।”
अमेरिकी अदालत ने क्या फैसला दिया?
न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के जज निकोलस गाराउफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग के अनुरोध को मंजूरी देते हुए गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व सीईओ विनीत जैन से जुड़े मामले में तीन आरोप स्थायी रूप से खारिज कर दिए।
10 अगस्त को जारी 47 पन्नों के आदेश में प्रतिभूति धोखाधड़ी की साजिश, वायर धोखाधड़ी की साजिश और प्रतिभूति धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों को हटाने की अनुमति दी गई। इन आरोपों के स्थायी रूप से खारिज होने का मतलब है कि इन्हीं आरोपों को दोबारा दर्ज नहीं किया जा सकता।
दो आरोपों पर अभी फैसला बाकी
अदालत ने मामले में दो अन्य आरोपों पर अभी निर्णय नहीं दिया है। इनमें विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम के उल्लंघन और न्याय में बाधा डालने की साजिश से जुड़े आरोप शामिल हैं।
ये आरोप भारत में रहने वाले पांच सह-आरोपियों से संबंधित हैं। इनमें रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल शामिल हैं। ये आरोपी अब तक अमेरिकी अदालत में पेश नहीं हुए हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग को अदालत की निर्धारित शर्तें पूरी करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। इसी समयसीमा तक गैरहाजिर आरोपियों के वकीलों को भी यह पुष्टि करनी होगी कि उनके मुवक्किल आरोपों को खारिज किए जाने पर सहमत हैं।
क्या अदाणी को आरोपों से बरी किया गया?
अदालत के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आरोपों को खारिज करना अभियोजन पक्ष के विवेक का इस्तेमाल करने से जुड़ा निर्णय है। इसे आरोपों की सत्यता पर अदालत की राय या सरकार के फैसले पर न्यायिक सहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस मामले में कोई मुकदमा नहीं चला, न ही किसी गवाह से पूछताछ हुई और अदालत के सामने सबूतों की जांच नहीं हुई। अदाणी समूह ने शुरुआत से ही आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उसने लागू कानूनों के अनुरूप काम किया।
अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप हटाने की मांग क्यों की?
अमेरिकी न्याय विभाग ने मई में विस्तृत समीक्षा के बाद मामले में आरोपों को खारिज करने का अनुरोध किया था। विभाग ने इसके पीछे अधिकार क्षेत्र और सबूतों से जुड़ी चुनौतियों का हवाला दिया।
विभाग के अनुसार, जिन गतिविधियों को लेकर आरोप लगाए गए थे, उनका बड़ा हिस्सा भारत से संबंधित था और भारतीय अधिकारी भी मामले की जांच कर चुके हैं। विभाग ने यह भी कहा कि किसी निवेशक को हुए नुकसान की पहचान नहीं की गई है।
न्याय विभाग ने तर्क दिया कि मामले को आगे बढ़ाना उसकी मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं है। साथ ही, बाइडन प्रशासन के अंतिम हफ्तों में सार्वजनिक किए गए इस मामले के मुकदमे तक पहुंचने की संभावना भी बेहद कम थी।
विभाग ने इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित ‘नाम लेकर बदनाम करने’ की कोशिश के रूप में देखे जाने की बात भी कही थी। अदाणी ने अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वह इसे विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं।

