जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारत में जल्द ही पॉलीमर (प्लास्टिक) के नोटों का चलन शुरू हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट जारी किए जाने की योजना है। इन नोटों में वही आधुनिक सुरक्षा मानक अपनाए जाएंगे, जो वर्तमान में कागज के नोटों की छपाई में इस्तेमाल किए जाते हैं। यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो अगले साल तक ये नोट बाजार में आ सकते हैं।
निजी कंपनियों से मांगी गई पॉलीमर शीट
रिजर्व बैंक ने पॉलीमर शीट की आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों से भी प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। शुरुआती चरण सफल रहने पर बड़े मूल्यवर्ग के नोट भी चरणबद्ध तरीके से पॉलीमर सामग्री पर छापे जा सकते हैं। इन नोटों का डिजाइन, आकार और छपाई मौजूदा भारतीय मुद्रा की तरह ही होगी, लेकिन नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए इनमें अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक जोड़ी जाएगी।
आरबीआई अधिकारियों के अनुसार, पॉलीमर नोटों के प्रचलन की निश्चित समय-सीमा अभी तय नहीं की गई है। हालांकि, इन्हें जारी करने का नीतिगत फैसला लिया जा चुका है और नोटों की छपाई से पहले कई तकनीकी एवं प्रशासनिक चरण पूरे किए जाएंगे।
2012 में भी हुई थी शुरुआत की कोशिश
भारत में पॉलीमर नोटों को लेकर यह पहली पहल नहीं है। वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला समेत कुछ शहरों में 10 रुपये के करीब एक अरब पॉलीमर नोटों के परीक्षण को मंजूरी दी थी। हालांकि, तकनीकी चुनौतियों के चलते यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
कटे-फटे और गंदे नोटों से मिलेगी राहत
पॉलीमर नोट पारंपरिक कागज के नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। ये आसानी से नहीं फटते, गंदे कम होते हैं और लंबे समय तक उपयोग में बने रहते हैं। इसके अलावा इनमें माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम, विशेष सुरक्षा स्याही और अन्य आधुनिक सुरक्षा फीचर्स होंगे, जिससे नकली नोट तैयार करना बेहद कठिन हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में इन नोटों की छपाई और रखरखाव की लागत भी कम होगी।
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड समेत कई देशों में पॉलीमर नोट वर्षों से सफलतापूर्वक प्रचलन में हैं।
नोटों की छपाई पर बढ़ता खर्च
रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में नोटों की छपाई पर खर्च बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024 में यह 5,101.4 करोड़ रुपये था। खर्च में यह वृद्धि मुख्य रूप से मुद्रा की बढ़ती मांग के कारण हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 के दौरान लगभग 23.8 अरब गंदे और अनुपयोगी नोटों को चलन से हटाया गया। माना जा रहा है कि कम मूल्यवर्ग के 10 और 20 रुपये के नोटों को सबसे पहले पॉलीमर स्वरूप में जारी किया जाएगा।

