Tuesday, May 28, 2024
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रालोद में बगावत, राहुल देव ने जयंत को कहा अलविदा

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  • रालोद में उनका पहला त्यागपत्र, पार्टी को लगेगा झटका
  • सरधना विधानसभा सीट भी होगी प्रभावित
  • राहुल देव के अलावा भी रालोद के कई नेताओं के तेवर बागी, दो दिन में और हो सकते हैं त्यागपत्र

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सिवालखास से गुलाम मोहम्मद को रालोद का प्रत्याशी बनाने के बाद बगावत हो गई है। रालोद के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं कद्दावर नेता राहुल देव ने रालोद से त्यागपत्र दे दिया है। यह रालोद में उनका पहले त्यागपत्र हैं, जिससे पार्टी को निश्चित रूप से झटका लगेगा। राहुल देव के त्यागपत्र देने का नुकसान सरधना विधानसभा सीट पर भी सपा प्रत्याशी अतुल प्रधान को भी हो सकता हैं। क्योंकि राहुल देव मूल रूप से दौराला के रहने वाले हैं, जो सरधना विधानसभा को हिस्सा है तथा जाट बहुल इलाका हैं।

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राहुलदेव ने त्यागपत्र देने से पहले कहा कि रालोद कार्यकर्ताओं ने पूरे पांच साल मेहनत की और राजनीति का जो पिच तैयार किया, उस पर अब बैटिंग करने के लिए सपा नेता गुलाम मोहम्मद को उतार दिया गया है। सरधना से अतुल प्रधान को चुनाव मैदान में उतार दिया गया। यह सब राहुल देव को नागवार गुजरा और उन्होंने रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया और मंगलवार की शाम को रालोद की सदस्यता से त्यागपत्र देने का ऐलान कर दिया। रालोद राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को भी अपना त्यागपत्र भेज दिया।

हालांकि रालोद में अभी उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं हुआ हैं। उनसे रालोद के कई नेता बातचीत कर रहे हैं, लेकिन राहुल देव ने स्पष्ट कर दिया कि अब उनकी रालोद में वापसी नहीं होगी। क्योंकि रालोद नेताओं को मेरठ जनपद में अपमान का घूट पीना पड़ रहा हैं। ऐसे हालात में राहुल देव ने चुप नहीं बैठने की बात कहीं।

गठबंधन को लेकर ‘रार’, जाट महासंघ भी कूदा मैदान में

सिवालखास विधानसभा क्षेत्र से सपा के गुलाम मोहम्मद को टिकट थमा दिये जाने के बाद तूफान खड़ा हो गया है। अचानक बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी के बीच जाट महासंघ भी कूद गया हैं। जाट महासंघ ने ऐलान किया है कि जाट इस प्रत्याशी का विरोध करेंगे। राष्ट्रीय जाट महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित जाखड़ ने ऐलान किया है कि अगर सिवालखास में गठबंधन ने जाट बिरादरी से प्रत्याशी नहीं बनाया तो जाट इसका विरोध करेगा। किसी भी विधानसभा सीट पर गठबंधन को वोट नहीं दी जाएगी।

राष्ट्रीय जाट महासंघ की तरफ से ऐलान किया गया है कि जब अखिलेश यादव के क्षेत्र में क्या कोई उम्मीदवार नहीं लड़ रहा तो फिर चौधरी जयंत सिंह के क्षेत्र में सपा कैसे अपना उम्मीदवार उतार रही है? रोहित जाखड़ ने कहा कि यह जाटों के स्वाभिमान की लड़ाई है, अगर मेरठ जैसे महत्वपूर्ण जिले में जाटों को सम्मानपूर्वक प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा तो फिर ऐटा-मैनपुरी में मिलेगा?

गठबंधन का गलत टिकट वितरण भाजपा के लिए मुफीद!

जिले में गठबंधन का कुछ सीटों पर गलत टिकट वितरण भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है। टिकट बंटवारे में ब्राह्मण और पिछड़ी जातियों की अनदेखी गठबंधन के लिए चुनाव में बड़े नुकसान का सबब बन सकती है। इस बात के साफ संकेत सिवालखास विधानसभा में टिकट घोषणा के बाद मचे घमासान से मिल रहे हैं।

बता दें कि गठबंधन ने जिले की सात में से चार सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जबकि एक सीट पर जाट, एक गुर्जर और एक जाटव समाज के उम्मीदवार को टिकट दिया है। जिले की एकमात्र मेरठ दक्षिण सीट पर कई ब्राह्मण दावेदारी जता रहे थे, मगर उनको निराशा हाथ लगी है। वहीं, अन्य पिछड़ी जाति के प्रत्याशी को सरधना में भी गठबंधन कोटे से सफलता हाथ नहीं लग सकी है। ऐसे में इस मुद्दे को भाजपा प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार में जोर शोर से उठा रहे हैं। उनका समाज के बीच साफ तौर पर यह संदेश देने का प्रयास है कि गठबंधन में हिंदू जातियों के बजाय मुस्लिम जातियों को टिकट में ज्यादातर तरजीह दी गई है। यही वजह है कि घमासान के बाद भी सिवालखास और मेरठ दक्षिण सीट पर बाजी सपा के मुस्लिम प्रत्याशियों के हाथ लगी है।

हालांकि सिवालखास में सपा के पूर्व विधायक को रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ाई जाने की घोषणा की गई है। भविष्य में गठबंधन के ऐसे फैसलों के परिणाम क्या आएंगे? इस पर अभी से सियासी लोगों के बीच कयास बाजी का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल मोटे तौर पर देखा जा रहा है कि गठबंधन के टिकट वितरण का फार्मूला मेरठ में कुछ सीटों पर भाजपा के लिए मुफीद हो सकता है।

ग्रामीणों ने रालोद का झंडा फूंका

सिवाल खास विधान सभा क्षेत्र से रालोद-सपा गठबंधन में सपा के पूर्व विधायक गुलाम मौहम्मद को टिकट मिलने पर सिवाल विधान सभा क्षेत्र के गांवों में पाट्री कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने रालोद का झंडा फूं ककर विरोध जताया। रालोद के कथित कार्यकर्ताओं ने गठबंधन तोडकर स्वेच्छा से वोट डालने की धमकी दी है।

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प्रदेश में होने वाले विधान सभा चुनाव में रालोद मुखिया जयंत चौधरी व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पाट्रीयों के बीच गठबंधन हुआ था। रालोद-सपा के बीच हुए गठबंधन में रालोद की मिनी छपरौली कही जाने वाली सीट पर सपा के पूर्व विधायक गुलाम मौहम्मद का टिकट फाईनल हुआ था। सिवाल खास विधान सभा सीट पर गुलाम मौहम्मद को टिकट मिलने पर रालोद कार्यकर्ताओं व रालोद टिकट मांगने वाले नेताओं में मायूसी नही रोष भी उतपन्न हो गया। सपा कोटे से सपा के पूर्व विधायक गुलाम मौहम्मद का टिकट फाईनल होने पर सिवाल खास विधान सभा क्षेत्र के गांव-गांव ही नही गली-गली में गुस्सा व रोष व्याप्त है।

मंगलवार की देर शाम को रालोद के गढ गांव ढढरा में कथित रालोद कार्यकर्ताओं ने रालोद का झंडा फूंककर विरोध जताया और होने वाले चुनाव में अपना मत किसी भी राजनैतिक पाट्री या दल को वोट देने की स्वतंत्रता होने का हवाला भी दिया। सिवाल विधान सभा क्षेत्र के गांवों में चल रहे विरोध के चलते इस सीट पर सपा-रालोद के सारे के सारे सभीकरण धराशायी होते दिख रहे हैं।

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