Tuesday, September 15, 2026
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आरबीआई की गाइड लाइन के खिलाफ काम कर रहे एसबीआई के बैंक मैनेजर

  • आरबीआई की स्पष्ट गाइड लाइन के बावजूद कहीं आईडी तो कहीं बिना किसी पहचान के बदले जा रहे हैं 2000 के नोट

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बैंक में उपभोक्ताओं के साथ 2000 के नोट जमा करने के नाम पर बदसलूकी करने से भी बैंक मैनेजर बाज नहीं आ रहे हैं। आरबीआई की गाइड लाइन के विपरीत उपभोक्ता से बैंक मैनेजर आधार कार्ड की प्रति मांग रहे हैं और 2000 के नोट का नंबर भी लिख रहे हैं। एक बार से ज्यादा दिन में 2000 के नोट जमा नहीं किये जा रहे हैं। घंटों तक लोगों को बैंक में रोका जा रहा हैं, इस तरह से परेशान किया जा रहा हैं। इस तरह का बदसलूकी करने वाला व्यवहार रोहटा रोड स्थित एसबीआई बैंक के मैनेजर अनस चौधरी कर रहे हैं। उनकी हरकतों से लोग परेशान हो गए हैं।

दरअसल, आरबीआई ने आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए गाइड लाइन जारी की हैं। कहा गया है कि किसी का आधार कार्ड में नहीं लिया जाएगा। पैनकार्ड भी नहीं लेंगे, लेकिन यहां रोहटा रोड पर तो एसबीआई के मैनेजर अनस चौधरी ने तो तमाम सीमाएं लांघ दी हैं। उन्हें पैनकार्ड भी चाहिए और आधार कार्ड भी। बिना इनके दो हजार का नोट बैंक में जमा नहीं किया जा रहा हैं। इस तरह से लोगों को परेशान किया जा रहा हैं। कोई व्यक्ति बैंक मैनेजर से पूछता है तो उसके साथ बदसूलकी की जाती हैं।

बैंक मैनेजर के अमर्यादित व्यवहार से आम जनता परेशान से हैं। इसकी चर्चा यहां आम हैं। दरअसल, लोग 2000 हजार का नोट जमा कराने के लिए जाता है तो उसे उल्टे डराया-धमकाया जा रहा हैं, जबकि आरबीआई ने गाइड लाइन जारी कर लोगों को किसी तरह से परेशान नहीं करने की बात कही हैं, लेकिन रोहटा रोड स्थित एसबीआई के बैंक मैनेजर अनस चौधरी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं।

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इस तरह के व्यवहार से जनता परेशान हैं। मैनेजर की शिकायत एजीएम आॅफिस में करने की बात कुछ लोगों ने की हैं। इसकी शिकायत ‘जनवाणी’ के पास भी पहुंची हैं, जिसके बाद ‘जनवाणी’ की टीम मौके पर गई, जिसमें पाया कि बैंक मैनेजर लोगों के साथ बदसलूकी करते हैं। आरबीआई की गाइड लाइन के विपरीत लोगों से आधार कार्ड, पैनकार्ड आदि की मांग की जाती हैं।

नोट बदलने की पॉलिसी में अपनी डपली-अपना राग बजा रहे बैंक

आरबीआई की गाइड लाइन से इतर दूसरे दिन भी बैंकों में नोट बदलने की प्रक्रिया को लेकर अपनी डपली-अपना राग का आलम दिखाई दिया है। हालांकि इस दौरान नोट बदलवाने के लिए कहीं भी लाइन लगने जैसे हालात अभी नहीं बन रहे हैं। अधिकारी से लेकर अर्थ व्यवस्था के जानकार तक यह मान रहे हैं कि अभी बाजार की स्थिति वेट एंड वाच की है।

मंगलवार यानि 23 मई से आरबीआई ने 2000 रुपये के नोट प्रचलन से वापस लेने की रणनीति के तहत सभी बैंकों में इसके लिए व्यवस्था की है। पहले दिन भी बैंकों में आने वाले ग्राहकों की संख्या सामान्य दिनों के समान बताई गई। जबकि दूसरे दिन भी इसमें कोई इजाफा होने की खबर नहीं मिली है। अभी बैंकों में आने वाले ग्राहक जानकारी जरूर हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

वहीं बाजार में 2000 के नोट को लेकर क्या रणनीति बनती है, इस पर भी लोग नजर गड़ाए हुए हैं। इस बीच बाजार में गोल्ड और 2000 के नोट को सबसे ज्यादा अफवाहों का बाजार गर्म रहा है। जिसके मुताबिक अघोषित रुपये से एकत्र 2000 के नोट की एवज में कुछ लोग गोल्ड खरीदने की जुगत में हैं, लेकिन उन्हें इसकी एवज में नोट की वास्तविक कीमत से कम पर समझौता करने के लिए कहा जा रहा है। इसके अलावा दुकानदार भी 2000 रुपये का नोट लेने से परहेज कर रहे हैं।

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गढ़ रोड स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा के प्रबंधक शेखर गुप्ता ने बताया कि पहले दिन उनकी ब्रांच में 25 लोग नोट बदलने के लिए पहुंचे। जबकि दूसरे दिन इसमें काफी कमी रही है। उनका कहना है कि बैंक की सभी शाखाओं में 2000 के नोट बदलने के लिए दो काउंटर अलग से बनाए गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में नोट बदलने के लिए आने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है।

वहीं, एचडीएफसी बैंक की ओर से नोट बदलने के लिए आने वाले ग्राहकों से आईडी लेने और निर्धारित फार्म पर हस्ताक्षर लेने की व्यवस्था की गई है। यही नीति अन्य निजी क्षेत्र के बैंकों में भी की गई है। हालांकि एक्सिस बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक के फॉर्म में इसी प्रकार डिटेल मांगी गई है। इसके साथ ही सीरियल नंबर भी लिखकर देने को कहा गया है। वहीं, यूको बैंक में भी इसी प्रकार का एक फार्म ग्राहकों को भरने के लिए दिया गया है। जिसमें नाम, आइडेंटी प्रूफ, मोबाइल नंबर, बैंक को दिए जाने वाले 2000 के नोटों की डिटेल लिख कर देने को कहा गया है।

हालांकि इस डिटेल में क्या नोटों के सीरियल नंबर भी देने होंगे, इसका कोई उल्लेख यूको बैंक के फार्म पर दर्ज नहीं है। बहरहाल बैंकों की ओर से अपनाए जा रहे अलग-अलग नियमों को लेकर ग्राहक भी असमंजस में हैं। इसी कारण बैंकों में नोट बदलने के लिए आने वाले लोगों की संख्या अभी दो अंकों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। वैसे माना यही जा रहा है कि जैसे-जैसे सितंबर करीब आएगा, बैंकों में 2016 की भांति लंबी-लंबी लाइनें लग जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

2000 के नोट बदलने वालों से ली जाए आईडी

एसबीआई को छोड़कर लगभग सभी बैंकों में इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि 2000 के नोट बदलने वालों से आईडी ली जाए। इससे बैंक पारदर्शिता के साथ कार्य कर सकते हैं। जबकि बिना आईडी लिए नोट बदले जाने की पॉलिसी से आने वाले समय में इसको लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। संतोषजनक स्थिति यह है कि आम लोगों ने पहले दो दिन में किसी प्रकार की हड़बड़ाहट का प्रदर्शन नहीं किया है।

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और इस बात को समझा है कि आरबीआई ने 2000 का नोट अवैध घोषित नहीं किया है। बल्कि इसे प्रचलन से बाहर करने के लिए वापस लेने का निर्णय लिया है। और इस प्रक्रिया के लिए आरबीआई ने 4 महीने 7 दिन का समय भी दिया है। मेरठ जनपद में मौजूद सरकारी और निजी क्षेत्र के 459 बैंक हैं, जिनमें से 233 बैंक शाखाएं मेरठ महानगर क्षेत्र में हैं। इन सभी शाखाओं से फीडबैक लिया जा रहा है। पहले दो दिनों में कोई हड़बड़ी की स्थिति कहीं देखने को नहीं मिली है। -सुशील कुमार मजूमदार, जिला अग्रणी बैंक अधिकारी, मेरठ

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