Wednesday, October 20, 2021
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सीएम साहब! क्या होगी कार्रवाई ?: मुख्यमंत्री के जाते ही सिस्टम बदहाल, कहीं साज़िश तो नहीं

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सोचिये जरा जिस गांव में रविवार को जिले के मुखिया खुद आये और अधिकारियों को ग्रामीणों की कोरोना जांच और टीकाकरण व अन्य नियमों को लेकर दिशा निर्देश दिये। उसी गांव में अगले दिन नियमों की धज्जियां उड़ाईं गईं, न ही कोई प्रशासिनक अधिकारी इन्हें देखने वाला था ना कोई जनप्रतिनिधि। कुछ ही घंटों बाद गांव में कन्टेनमैंट जोन से बल्यिां हटा दी गईं, चिकित्सक केन्द्र में नहीं ऐसे में जनता का क्या होगा। और तो और जिले के अन्य गांवों का क्या हाल होगा। आप बिजौली की स्थिति को देखकर ही अंदाजा लगा सकते हैं। महज कुछ घंटों में ही प्रशासन पुराने ढर्रे पर लौट गया अब तो जनता का भगवान ही कुछ भला करे शायद… अफसरों की ये कारस्तानी यह बताने के लिए काफी है कि सरकार और सत्ता को बदनाम करने की कहीं तो कुछ साज़िश तो ज़रूर है ? सरकार मामले को संज्ञान में जरूर लेना चाहिए। अब देखना यह कि ऐसे अफसरों के विरुद्ध क्या शासन कुछ कार्रवाई करेगा या फिर इस पूरे मामले को सीएम योगी तक पहुंचाने वाले अफसर ही गोलमाल करके लीपापोती करेंगे।

सीएम के जाते ही बिजौली गांव में एक दिन सख्ती फिर दिखी लापरवाही

ऋषिपाल सिंह |

मेरठ: काश! ऐसा होता कि सीएम रोज यहां गांव में आया करते कम से कम ग्रामीणों को सही इलाज तो मिलता, लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है। सीएम तो सिर्फ एक दिन के लिये आये थे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने जो सुना दिया वो ही उन्हें सही लगा।

वास्तविकता को कुछ और ही जो सीएम के यहां से जाने के बाद देखने को मिली। बिजौली में सिस्टम फिर से पुराने ढर्रे पर लौट गया। जहां बनाये गये कंटेनमेंट जोन से बल्लियां ही हटा दी गईं। लापरवाही की हद तो यह ही कि जिस प्राथमिक केन्द्र का दौरान सीएम ने किया वहां प्रभारी की कुर्सी ही अगले दिन खाली मिली। अब ऐसे में ग्रामीणों की सही इलाज की जिम्मेदारी कौन लेगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बिजौली गांव का निरीक्षण किया और यहां अधिकारियों को ग्रामीणों के सही इलाज और सतर्कता बरतने के निर्देश दिये, लेकिन उनके निरीक्षण करने के अगले दिन ही सोमवार को सिस्टम यहां पूरी तरह से फेल दिखाई दिया।

इलाज तो दूर की बात यहां इलाज करने वाले डॉक्टर ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से गायब मिले। स्टाफ के नाम पर यहां सिर्फ खानापूर्ति हो रही है दो कर्मचारी एक महिला और एक पुरुष यहां मिले वो भी केवल टीकाकरण के लिये तैनात थे।

इसके अलावा पीएचसी केन्द्र में कोई कर्मचारी नहीं मिला। जिसके चलते यहां किसी का इलाज नहीं हो रहा था। जबकि अधिकारियों ने सीएम से सामने बड़ी बड़ी बाते कर सभी को इलाज दिये जाने की बात कही, लेकिन कुछ ही घंटों में सब उल्टा हो गया।

कुर्सी से गायब मिले केन्द्र प्रभारी

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर यहां बिजौली में विजय सागर प्रभारी है। जब जनवाणी की टीम यहां सुबह 11 बजे पहुंची तो यहां उनकी कुर्सी खाली पड़ी थी। उनके बराबर में ही एक कमरा था यहां भी कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। कार्यालय में अंदर घुसते ही मात्र दो कर्मचारी यहां मौजूद थे। जोकि वैक्सीनेशन का कार्य कर रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि यहां कोई तैनात क्यों नहीं है। क्या लोगों की टेस्टिंग की जा रही है तो उन्होंने कहा कि यहां टेस्टिंग होती ही नहीं है। अगर किसी को कोरोना की टैस्टिंग करानी है तो उसे खरखौदा जाना पड़ता है। प्रभारी के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि वह फिल्ड में हैं।

कंटेनमेंट जोन से हटा दी गईं बल्लियां

रविवार को सीएम जिस कोरोना मरीज नितिन त्यागी के चाचा नीरज त्यागी से मिले थे उसकी गली में लगी बल्लियां सोमवार को हटा दी गईं। मतलब सीएम के सामने ही यह सब ड्रामा किया गया। अगर इस गली में कोई कोरोना मरीज था तो इस गली की बल्लियां 14 दिन तक लगी रहनी थी, लेकिन लापरवाही की हद देखिये गली से बल्यिां हटा दी गईं हैं और प्रशासन की ओर से यहां कोई नजर रखने वाला नहीं है। इसके अलावा दो अन्य गलियां जहां बल्लियां लगाईं गईं थी सभी को वहां से हटा दिया गया। ऐसे में कोरोना मरीज और उसके परिजन खुले आम कहीं घूमे उन्हें कोई रोकने वाला नहीं है।

ग्रामीणों ने कहा-अब थोड़ी आएंगे सीएम

बिजौली निवासी रवि शर्मा से जब पूछा गया कि क्या जिस गली में कोरोना मरीज था वह आज ठीक हो गया है जो आप लोगों ने गली से बल्लियां हटा दी हैं तो उन्होंने कहा कि अब थोड़ी सीएम गांव में आएंगे वो तो कल ही आये थे बस। उनसे बात करने पर ऐसा लगा कि लोग यहां इस बीमारी को लेकर गंभीर ही नहीं है। वह खुद भी यहां बिना मास्क के घूम रहे थे और इन्हें यहां कोई रोकने वाला नहीं थी। सिस्टम की लापरवाही गांव में जाते ही आप खुद देख सकते हैं कि कितना कार्य किया जा रहा है।

डॉक्टरों के पीछे भागेंगे अब लोग

बिजौली निवासी पप्पू ने कहा कि सीएम के आने की सूचना के बाद एक दिन पहले ही यहां प्रशासनिक अधिकारी आ गये थे। गांव गांव में लोगों से पूछा गया कि कोई बीमार तो नहीं है। जो थे उन्हें दवाई बांटी गई। सीएम के आने के दिन सब बंद कर दिया गया किसी को घर से नहीं निकलने दिया गया। अब उनके जाने के बाद से यहां हालात आप खुद देख लीजिये। अब ग्रामीणों को डॉक्टरों के पीछे-पीछे भागना पड़ेगा।

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